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सपा राजः पति के बोर्ड में पत्नी का इंटरव्यू

Tue, 10 Jun 2014 06:52 PM IST
Updated Tue, 10 Jun 2014 06:52 PM IST
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largely handedness is continue in akhilesh yadav government

उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड में प्रधानाचार्य साक्षात्कार में मनमानी का दौर जारी है। चयन बोर्ड के एक सदस्य खुद एक साक्षात्कार पैनल में थे जबकि उनकी पत्नी दूसरे कमरे में मिर्जापुर मंडल से प्रधानाचार्य के लिए साक्षात्कार में शामिल हुईं।

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नियमानुसार अध्यक्ष अथवा किसी सदस्य के परिवार अथवा किसी रिश्तेदार के साक्षात्कार में अभ्यर्थी होने पर वह सदस्य उससे जुड़े किसी पैनल में स्वयं शमल नहीं होना चाहिए।

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ज‌िस बोर्ड में पत‌ि, उसी में पत्नी का इंटरव्यू

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चयन बोर्ड में चल रहे प्रधानाचार्य के साक्षात्कार को लेकर पहले ही वहां तैनात अधिकारियों सचिव, उपसचिव, वित्त एवं लेखाधिकारी ने मानक पूरा नहीं होने के कारण अपने को इस प्रक्रिया से अलग कर लिया है। इसके बाद भी साक्षात्कार जारी है।

चयन बोर्ड में सोमवार को मिर्जापुर मंडल के लिए प्रधानाचार्य का साक्षात्कार हुआ। इस दौरान चयन बोर्ड के सभी सात सदस्यों के नेतृत्व में बोर्ड का गठन किया गया।

एक सदस्य ललित श्रीवास्तव ने अस्वस्थ होने के कारण खुद को पैनल से अलग कर लिया जबकि सदस्य योगेन्द्र प्रजापति की पत्नी के स्वयं के साक्षात्कार में शामिल होने के बाद भी वह साक्षात्कार बोर्ड में शामिल रहे।

बोर्ड के अध्यक्ष ने बात नकारी

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उनकी पत्नी का साक्षात्कार दूसरे सदस्य मनोज यादव के बोर्ड में पड़ा। हालांकि चयन बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. आशाराम इस बात को नियम का उलंघन नहीं मानते, उनका कहना है कि संबंधित सदस्य के बोर्ड में उनकी पत्नी का साक्षात्कार नहीं था।

अध्यक्ष का कहना है कि संबंधित सदस्य योगेंद्र प्रजापति ने इंटरव्यू से पहले उनसे बता दिया था कि उनकी पत्नी का साक्षात्कार है, लिहाजा पत्नी को उनके बोर्ड में न रखा जाए।

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साक्षात्कार की गोपनियता भंग

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चयन बोर्ड में नियम यह है कि साक्षात्कार बोर्ड में पहुंचने के बाद ही सदस्य अथवा अध्यक्ष को पता चलता है कि उनके बोर्ड में किसका साक्षात्कार है।

ऐसे में उनका यह कहना कि सदस्य के आग्रह पर उनकी पत्नी को उनके बोर्ड में नहीं रखा गया, गोपनीयता को भंग करता है। साफ है कि चयन बोर्ड में साक्षात्कार से पहले बोर्ड में शामिल अभ्यर्थियों की जानकारी मिल जा रही है।

योगेंद्र श्रीवास्तव के काम गैर कानूनी

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चयन बोर्ड की सचिव नीना श्रीवास्तव ने सहायक लेखाकार योगेंद्र प्रताप श्रीवास्तव की ओर से जारी आदेश तथा शासकीय कार्य को गैर कानूनी बताया है। उन्होंने कहा कि योगेंद्र श्रीवास्तव को छह जून को ही निलंबित किया जा चुका है।

ऐसे में उनकी ओर से सचिव, उपसचिव और लेखाधिकारी का काम करना गैर कानूनी है। उन्होंने कहा कि उनकी ओर से किए गए सभी काम विधि शून्य हैं।

उन्होंने इस बात की सूचना प्रमुख सचिव माध्यमिक शिक्षा, आयुक्त इलाहाबाद मंडल, यूनियन बैंक टैगोर टाउन शाखा प्रबंधक को भेज दी है। सचिव नीना श्रीवास्तव अपने दूसरे कार्यालय परीक्षा नियामक प्राधिकारी में बैठकर सोमवार को दिन भर जरूरी काम करती रहीं।

इसी कार्यालय से उन्होंने सभी आदेश जारी किए। उधर अध्यक्ष डॉ. आशाराम ने इन अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। उन्होंने सचिव नीना श्रीवास्तव की ओर से लेखाकार योगेंद्र प्रताप श्रीवास्तव को निलंबित करने को नियम के विपरीत करार दिया है।

उनका कहना है कि निलंबन का पत्र चयन बोर्ड कार्यालय से जारी नहीं किया गया है। वह इस निलंबन को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर रहे हैं।

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