फीस भरने के लिए बेचा मुफ्त मिला लैपटॉप
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19 वर्षीय रमेश (नाम बदला हुआ) उत्तर प्रदेश में हरदोई ज़िले के संडीला में रहते हैं। रमेश के पिता एक ग़रीब किसान हैं जिन्होंने बड़ी मुश्किल से रमेश की 12वीं तक की पढ़ाई की फ़ीस चुकाई थी।
इनके परिवार में मां के अलावा तीन बहनें और एक छोटा भाई भी है जो गांव के स्कूल में मुफ्त पढ़ाई करता है। रमेश ने जैसे ही 12वीं पास की, तो प्रदेश में आई समाजवादी पार्टी की सरकार ने ये घोषणा की थी कि ऐसे सभी छात्र-छात्राओं को मुफ्त लैपटॉप बांटे जाएंगे।
पिता ने अपनी तंगी के बावजूद रमेश को लखनऊ में आगे की पढ़ाई करने के लिए जैसे तैसे भेजा। शहर के एक प्रतिष्ठित मगर सस्ते कॉलेज में दाख़िला लिए कुछ ही महीने हुए थे कि रमेश को एक दिन स्कूल प्रांगण में हुए रंगारंग समारोह में मुफ्त लैपटॉप भी मिल गया।
इसलिए बेच दिया लैपटॉप
बड़ी मुश्किलों से रमेश ने कैमरे के सामने आकर बात करने की हामी भरी। निर्धारित जगह पर हमारी मुलाक़ात हुई और रमेश हिचकिचाए नज़र आए।
उन्होंने बताया, "मुझे अक्तूबर 2013 में मुफ्त लैपटॉप मिला। कुछ ही दिन में मुझे उसमे तकनीकी दिक़्क़त नज़र आने लगी और वो लोकल सॉफ़्टवेयर के साथ मिला था।"
हमने तुरंत ही रमेश को टोका, "लैपटॉप तो एचपी कंपनी का था और सॉफ़्टवेयर भी ब्रांडेड था?"
झिझकते हुए रमेश से जवाब मिला, "मेरे किसी काम का नहीं था, इसलिए हमने उसे बेच दिया"।
कम से कम पढ़ाई तो जारी रहेगी
उन्होंने आगे कहा, "आप मेरा नाम मत लीजिएगा, लेकिन हमें अपनी बीबीए की पढ़ाई के लिए फ़ीस की ज़रूरत थी। इसलिए हमने उसे 10,000 रुपए में बेच डाला क्योंकि फ़ीस रहेगी तभी पढ़ाई होगी और उसके बाद तो हमेशा कम्प्यूटर चलाने का मौक़ा मिलता रहेगा।"
उन्होंने ये भी बताया कि डर के मारे वे उसे बेचने हरदोई शहर तक गए और लैपटॉप को एक कम्प्यूटर रिपेयर शॉप वाले ने नक़द रक़म देकर ख़रीदा है।
लेकिन अब रमेश को इस बात की ख़ुशी है कि उनकी पढ़ाई तो कम से कम जारी रहेगी।
अफसोस नहीं
हमने रमेश को याद दिलाया कि जब अखिलेश यादव की सरकार ने चुनावी वादे को पूरा करते हुए मुफ्त लैपटॉप बांटने शुरू किए थे तब एक काग़ज पर इस बात के हस्ताक्षर भी लिए थे कि उनकी ख़रीद-फ़रोख़्त ग़ैर-क़ानूनी क़रार दी जाएगी।
अब तक रमेश खुल कर बात करने के मूड में आ चुके थे।
उन्होंने कहा, "साहब, सरकार हमसे पूछे तो सही, जवाब भी देंगे। प्रदेश में ग़रीब बच्चों के पास फीस देने के पैसे हैं नहीं, वे बिना इंटरनेट और बिजली के लैपटॉप का क्या करेंगे? इस बात का जवाब है किसी के पास?"
करीब पांच मिनट तक रमेश से हुई बातचीत मेरे ज़हन में बैठ सी गई है।
सियासी दलों के वादे पर सवाल
राजनीतिक दल चुनाव से पहले वादे भी करते हैं और कुछ जगहों पर पूरा भी कर देते हैं।
उत्तर प्रदेश में ही 2012 के विधानसभा चुनाव के ठीक पहले भाजपा ने मुफ्त गाय देने का वादा किया था।
लेकिन आम आदमी से मिले कर के पैसे से लैपटॉप जैसी महंगी चीज़ देने का वादा करने से पहले क्या सरकारों को मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराने पर भी विचार नहीं करना चाहिए?
इसी श्रृंखला की अगली कहानी में मिलिएगा एक और व्यक्ति से और जानिएगा क्यों बेचा उन्होंने भी अपना लैपटॉप।