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अमरमणि को जेल में मोबाइल, कैदियों का हंगामा

Tue, 02 Feb 2016 08:48 AM IST
Updated Tue, 02 Feb 2016 08:48 AM IST
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laptop and mobile given to amarmani tripathi in jail

मंडलीय कारागार प्रशासन पर पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी को लैपटॉप, मोबाइल आदि की सुविधा उपलब्ध कराने का आरोप लगाते हुए सोमवार की सुबह बंदियों ने हंगामा कर दिया। कई बंदी अनशन पर बैठ गए। इससे जेल में हड़कंप मच गया।

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जेलर के समझाने पर भी वे नहीं माने। दोपहर बाद वरिष्ठ जेल अधीक्षक एसके शर्मा के आश्वासन पर बंदी खाना खाने के  लिए राजी हुए। बंदियों ने जेल प्रशासन से सभी के साथ एक जैसा व्यवहार करने की मांग की है।
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हाईकोर्ट की सख्ती के बाद 11 दिसंबर 2015 को मेडिकल कॉलेज से अमरमणि त्रिपाठी और मधुमणि को मंडलीय कारागार शिफ्ट किया गया था। अमरमणि को मंडलीय कारागार की शताब्दी बैरक में, जबकि मधुमणि को महिला बैरक में रखा गया है।
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वर्तमान समय में यहां 1474 पुरुष बंदी और 83 महिला बंदी हैं। इनमें 300 पुरुष और 11 महिला सजायाफ्ता हैं। सोमवार की सुबह जब बैरक खुली तो बंदियों ने हंगामा शुरू कर दिया।

अमरमणि को लैपटॉप, मोबाइल देने का आरोप

laptop and mobile given to amarmani tripathi in jail

उनका आरोप था कि पूर्व मंत्री अमरमणि को जेल प्रशासन सारी सुविधाएं मुहैया करा रहा है। उन्हें लैपटॉप और मोबाइल तक दिया गया है। उन्हें रहने के लिए शताब्दी बैरक के अलावा एक अन्य बैरक भी दी गई है। दूसरी तरफ एक-एक बैरक में 150 से 200 बंदियों को रखा जा रहा है।

हंगामे के बाद बंदी अनशन पर बैठ गए। इससे जेल में हड़कंप मच गया। जेल अधिकारियों ने बंदियों को मनाने का प्रयास किया, लेकिन वे मानने को तैयार नहीं थे।

उनकी मांग थी कि उन्हें भी अमरमणि की तरह मोबाइल इस्तेमाल करने दिया जाए। दोपहर बाद वरिष्ठ जेल अधीक्षक एसके शर्मा ने बंदियों से बातचीत कर उन्हें खाना खाने के लिए राजी कर लिया।

बैरकों की भी हुई तलाशी

laptop and mobile given to amarmani tripathi in jail

बंदियों के अनशन पर बैठने के बाद वरिष्ठ जेल अधीक्षक के नेतृत्व में बैरकों की तलाश ली गई। जेल अधिकारियों को सूचना मिली थी कि जेल में बंद कुछ बंदी मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर रहे हैं। हालांकि तलाशी में जेल अधिकारियों को कुछ नहीं मिला।

खाने को लेकर बंदियों ने हंगामा किया था। अमरमणि के लैपटॉप और मोबाइल इस्तेमाल करने की बात गलत है। आम बंदियों की तरह वह भी जेल में बंद हैं। दोपहर बाद बंदियों को समझाकर शांत करा दिया गया।
- एसके शर्मा, वरिष्ठ जेल अधीक्षक

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