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नगालैंड में भाषा के सवाल पर बंटा नगा समाज

Sun, 14 Feb 2016 02:49 AM IST
Updated Sun, 14 Feb 2016 02:49 AM IST
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language problem in nagaland

पूर्वोत्तर के उग्रवाद प्रभावित राज्य नागालैंड में एक भाषा पर विवाद बढ़ता जा रहा है। मामला है केंद्र की ओर से नगामीज भाषा को राज्य की दूसरी अधिकृत भाषा के तौर पर बढ़ावा देने का। इस पर नगा समाज बंट गया है। दिलचस्प बात यह है कि राज्य में सबसे ज्यादा लोग यही भाषा बोलते हैं।

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नगामीज राज्य की संपर्क भाषा है। दो अलग-अलग समुदायों के लोग आपस में बातचीत के लिए नगामीज का इस्तेमाल करते हैं। यह टूटी-फूटी असमिया, हिंदी, बांग्ला और अंग्रेजी समेत कई भाषाओं का मिश्रण है। सरकारी कामकाज की भाषा के तौर पर नगामीज को मान्यता देने की पहल का विरोध करने वाले लोगों की दलील है कि किसी भी बोली को भाषा के तौर पर मान्यता देने की पहली शर्त यह है कि उसकी अपनी लिपि होनी चाहिए, लेकिन इसकी अपनी कोई लिपि नहीं है।
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उधर, नगा पीपुल्स फ्रंट (एनपीएफ) की दलील है कि नगामीज के जरिए राज्य के विभिन्न तबके के लोग आपस में बातचीत करते हैं। यह नगा समाज में आपसी संवाद का सबसे अहम जरिया है।

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पक्ष और विपक्ष में दलील

language problem in nagaland

केंद्र की इस पहल के खिलाफ नगा स्टूडेंट्स फेडरेशन (एनएसएफ) ने ही सबसे पहले आवाज उठाई थी। उसने कहा था कि केंद्र को जल्दबाजी में कोई ऐसा फैसला नहीं करना चाहिए जिससे नगा समाज के सांस्कृतिक व सामाजिक ताने-बाने को ठेस पहुंचे। संगठन के एक नेता का कहना है कि किसी चालू भाषा को सरकारी मान्यता देने की बजाय किसी ऐसी भाषा को चुनना चाहिए, जिसे नागा लोग अपनी भाषा कह सकें।

नगालैंड की ताकतवर आओ जनजाति के तीन प्रमुख संगठनों का कहना कि स्कूली किताबों में अंग्रेजी माध्यम है और विभिन्न जनजातियों की बोली में रोमन लिपि का इस्तेमाल किया जाता है। इसलिए राज्य में सरकारी कामकाज की भाषा अंग्रेजी ही होनी चाहिए। दूसरी ओर, राज्य में ग्राम प्रधानों के संगठन के सलाहकार टीएल अंगामी कहते हैं कि राज्य के ग्रामीण इलाकों के लोग आसानी से नगामीज भाषा बोलते व समझते हैं।

इसे सरकारी भाषा के तौर पर मान्यता देने पर नगा पहचान को कोई खतरा नहीं पैदा होगा। फिलहाल राज्य सरकार ने इस पूरे मामले पर चुप्पी साध रखी है। सरकार के एक प्रवक्ता ने कहा है कि नगामीज के मुद्दे पर बढ़ते मतभेदों को ध्यान में रखते हुए सरकार इस मामले में इंतजार करो और देखो की रणनीति पर आगे बढ़ रही है। दोनों पक्षों की दलीलों के बीच राज्य में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली नगामीज भाषा पर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है।

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