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कई घरों में कोई रोने वाला भी नहीं बचा

Thu, 31 Jul 2014 01:11 PM IST
Updated Thu, 31 Jul 2014 01:11 PM IST
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landslides in pune

पुणे से करीब 60 किलोमीटर दूर मालीण गांव में दो दिन पहले ही श्रावण महीने के पहले सोमवार पर हजारों लोग भीमाशंकर में शंकर जी का दर्शन करने पहुंचे थे।

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भीड़ बुधवार को भी हुई लेकिन वजह बडी दुखद थी। डिंभे बांध के दूसरे छोर पर रहने वाले महादेव कोली आदिवासी और जनजातीय लोगों के लिए पहाड़ी उनके घर जैसी थी।
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गांव में पानी ने मचाई तबाही

landslides in pune

पुलिस ने इस गांव के पांच किलोमीटर पहले ही मुझे रोक लिया। गाड़ियों की आवाजाही रोक दी गई थी। हर जगह केवल एंबुलेंस और जेसीबी मशीनें ही नजर आ रही थीं। कभी-कभी बूंदा-बांदी तो कभी तेज बारिश हो रही थी।

मोबाइल नेटवर्क गायब था। हर जगह लाल कीचड़ फैला हुआ था। गांव का इकलौता 35 फुट ऊंचा मंदिर अपने कलश तक मिट्टी में धंस चुका था। इससे मलबे की परत की ऊँचाइयों का अंदाजा लगाया जा सकता था।

उत्तराखंड में जैसी तबाही का दृश्य

landslides in pune

चारों तरफ पहाडियों से घिरे इस गांव में अब भी मिट्टी-कंकड लेकर आते हुई पानी की धाराएं नजर आ रही थीं। एक साल पहले उत्तराखंड में जिस तबाही के दृश्य टीवी पर देखे थे, वह यहां साक्षात दिख रहे थे।

राहतकर्मी और चिकित्साकर्मी जी-जान से लोगों को बचाने में जुटे थे। वो घुटनों तक कीचड़ में धंसे थे।

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टूटी हुई छतें

landslides in pune

चार जेसीबी मशीनें गीली मिट्टी हटा रही थीं। उनमें से टूटे हुए घरों की छतें नजर आ रही थीं। एक स्थानीय निवासी ने बताया कि बुधवार सुबह यहां केवल दो मशीनें पहुंच पाई थीं। काफी वाहन अभी भी संकरे रास्ते में फंसे थे।

परिवार के परिवार मिट्टी के अंदर धंसे थे, इसलिए कई घरों में कोई रोने वाला भी नहीं बचा था। कोई भी व्यक्ति बात करने की स्थिति में नहीं था।यह बताने के लिए भी वहाँ कोई मौजूद नहीं था कि आखिर यह घटना हुई कैसे।

सामूहिक अंतिम संस्कार

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आसपास के गांवों से आए लोग घटना की थोड़ी-बहुत जानकारी दे रहे थे।

वहां से 50 किलोमीटर दूर मंचर में मैं करीब पांच बजे लौटा जहां शव लाए जाने वाले थे। वहां करीब 100 स्थानीय लोग जमा थे। सभी गमगीन थे और शवों के आने की प्रतीक्षा कर रहे थे।

कइयों को उनके परिजनों का हाल-चाल पूछने के लिए फोन आ रहे थे। वहां जमा लोग घटना को लेकर बातें कर रहे थे।

चार घंटों बाद भी शव नहीं पहुंचे

landslides in pune

उप जिला अस्पताल में डॉक्टर और नर्सें तैयार बैठी थीं। लेकिन चार घंटों बाद भी शव नहीं पहुंचे। पूछने पर पता चला कि सभी शवों का पोस्टमार्टेम वहीं पर ही किया गया। उनका दाह-संस्कार भी सामूहिक होगा।

इस खबर के आने के बाद अस्पताल में जमा भीड़ घटनास्थल की ओर चल पड़ी।

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