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इलेक्शन इफेक्ट: रेड कॉरिडोर के नीचे दबे हैं हजारों बम

Sun, 27 Apr 2014 10:57 AM IST
Updated Sun, 27 Apr 2014 10:57 AM IST
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landmines in naxal areas

सुरक्षा एजेंसियों को कतई अंदाजा नहीं था कि मौजूदा लोकसभा चुनाव का एक असर ऐसा भी होगा। 16 मई के चुनाव परिणाम के बाद जब देश की नजर दिल्ली की गद्दी की तरफ होगी तब सुरक्षा बल पूरे नक्सल प्रभावित इलाकों की जमीन से आइईडी विस्फोटक और लैंड माइन निकालने का खतरनाक मिशन पूरा करेंगे।

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नक्सलियों ने यह विस्फोटक चुनाव में तबाही मचाने के मकसद से जमीन के नीचे हजारों की संख्या में बिछा रखे हैं। तीसरे और चौथे चरण के चुनाव में छत्तीसगढ़ और झारखंड में मारे गए दर्जनों सुरक्षाकर्मी और चुनाव अधिकारियों की मौत के लिए जमीन के नीचे दबे यही विस्फोटक जिम्मेदार साबित हुए हैं।

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स्कूल और सरकारी भवनों को चुना

landmines in naxal areas

गृहमंत्रालय और सुरक्षा एजेंसियां इस मिशन को पूरा करने की योजना को अंतिम रूप दे रहे हैं। दरअसल दिसंबर में छत्तीसगढ़ में हुए विधानसभा चुनाव में नक्सलियों ने लोगों से चुनाव प्रक्रिया का बहिष्कार करने को कहा था।

लेकिन लोगों ने नक्सलियों को अंगूठा दिखा कर जमकर वोट डाला। जनता के इस तेवर से बौखलाए नक्सलियों ने लोकसभा चुनाव में हिंसा के भरपूर इस्तेमाल करने की योजना को अंजाम दिया।

इसी योजना के तहत रेड कॉरिडोर के करीब अस्सी फीसदी इलाके में आइईडी विस्फोटक लगाए गए। इसके लिए खासतौर पर स्कूल और सरकारी भवनों को चुना गया, जहां पोलिंग बूथ बनाए जाने की गुंजाइश थी।

दहशत से गिरा वोट प्रतिशत

landmines in naxal areas

छत्तीसगढ़ चुनाव से लौटे सीआरपीएफ के अधिकारी ने अमर उजाला को बताया कि आइईडी के डर से बस्तर के कई बूथ को खुले खेत में स्थानांतरित करना पड़ा।

हालांकि नक्सल इलाकों में करीब डेढ़ लाख सुरक्षा कर्मियों की मौजूदगी और पुख्ता व्यवस्था की वजह से नक्सली अपनी मनमानी नहीं कर पाए। लेकिन इस दहशत से वोट का औसत प्रतिशत घट गया।

सीआरपीएफ के महानिदेशक दिलीप त्रिवेदी के मुताबिक वोट का दस फीसदी तक घट जाना अफसोस की बात है। लेकिन इस इलाके में गुरिल्ला युद्ध जैसे हालात हैं।

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