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भूमि बिल के बहाने 'कुछ और' चाहते हैं राहुल-मोदी?

Mon, 20 Apr 2015 11:57 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 20 Apr 2015 11:57 AM IST
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Land bill Became the center of political battle?

भूमि अधिग्रहण बिल देश की राजनीतिक जमीन का केंद्र बन गया है। इस बिल के विरोध के जरिये कांग्रेस अपने खोए आधार को पाना चाहती है तो भाजपा बीते लोकसभा चुनाव में मिले जनसमर्थन को बरकरार रखने के प्रयास में है।

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कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने रविवार को हुई रैली में अपनी राजनीतिक जमीन पुख्ता करने के लिए खुद को किसानों और गरीबों का मसीहा बताया। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भाजपा सांसदों की कार्यशाला में अपनी सरकार को गरीबों को समर्पित किया।
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सत्ताधारी दल और विपक्ष, दोनों ही आक्रामक तेवर में हैं। अपना खोया राजनीतिक आधार वापस पाने के लिए कांग्रेस ने भूमि अधिग्रहण बिल के विरोध में पूरी ताकत झोंक दी है।
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भाजपा के लिए चिंता का सबब बनी गरीब विरोधी छवि

Land bill Became the center of political battle?

रैली में राहुल का किसानों को आश्वस्त करना कि वे उनकी लड़ाई संसद से सड़क तक लड़ने को तैयार हैं, इसी की बानगी है। दूसरी ओर, सरकार ने इस बिल को अपने प्रतिष्ठा का सवाल बना लिया है।

हालांकि गरीब विरोधी छवि बनने से सरकार की चिंता बढ़ी हुई है। यही वजह है कि मोदी ने अपने सांसदों से कहा है कि वे गरीब विरोधी छवि से बचने के लिए सरकार की उपलब्धियों का बखान करें।

सांसदों के भ्रम को दूर करने के लिए केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने एक कार्यशाला में भूमि अधिग्रहण बिल के सभी पहलुओं को उनके सामने रखा। कार्यशाला में सांसदों को गरीबों के कल्याण के लिए सरकार द्वारा चलाई जा रही हर योजना की जानकारी दी गई।

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने सांसदों से कहा कि वे जनकल्याण की योजनाओं को जनता के बीच ले जाएं। राजीव प्रताप रूडी ने कौशल विकास के कार्यक्रमों की जानकारी दी तो वेंकैया नायडू ने शहरी-गरीबी दूर करने के लिए चलाई जा रही योजनाओं के बारे में बताया।

केंद्रीय मंत्री थावर चंद गहलोत ने सामाजिक विकास की योजनाओं का जिक्र किया। इसके अलावा कार्यशाला में गरीबी उन्मूलन से जुड़ी योजनाओं के मंत्रालयों का प्रस्तुतिकरण भी किया गया।

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