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भूमि अधिग्रहण बिल का मसौदा जल्द होगा तैयार
नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 30 Oct 2012 10:17 PM IST
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भूमि अधिग्रहण कानून पर किसानों को दिए गए कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी के वादे को पूरा करने के लिए सरकार ने फिर से कवायद तेज कर दी है। यूपीए अध्यक्षा सोनिया गांधी की ओर से अधिग्रहण के लिए अस्सी फीसदी भू मालिकों की सहमति जरूरी होने की सिफारिशों के साथ ही किसान, मजदूर, उद्योग सहित विभिन्न मंत्रालयों की राय के आधार पर भूमि संसाधन विभाग विधेयक के संशोधित मसौदे को अंतिम रूप देने मे जुट गया है। सरकार का इरादा 13 नवंबर को होने वाली कैबिनेट बैठक में इसे पेश करने का है। इसके लिए शरद पवार की अध्यक्षता वाले मंत्रियों के समूह को अपने सुझाव व सिफारिशों को 5 नवंबर तक भेजने का समय दिया गया है।
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ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश ने बताया कि भूमि अधिग्रहण विधेयक के नए मसौदे में थोड़े बदलाव किए गए हैं, लेकिन इन बदलावों से किसानों या भू स्वामियों के हितों को किसी तरह का नुकसान नहीं होगा। विधेयक में पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन के प्रावधान पहले जैसे ही हैं।
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विधेयक के तहत रेलवे, बंदरगाह, सड़क, और बिजली परियोजनाओं के लिए राज्य सरकारें जनहित के तहत तभी भूमि अधिग्रहण कर सकेंगी, जब इन परियोजनाओं को पूरा करने में उनकी सौ फीसदी भूमिका होगी। यदि इन परियोजनाओं को वे निजी-सार्वजनिक भागीदारी (पीपीपी) के तहत बनाने का प्रावधान करती हैं तो उन्हें भूमि अधिग्रहण के लिए 80 फीसदी किसानों से मंजूरी लेना अनिवार्य होगा।
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विधेयक को इस तरह से बनाया गया है कि न सिर्फ भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया आसान हो, बल्कि किसानों को भी भूमि की वाजिब कीमत मिल सके और जीवन यापन के लिए भी उन्हें दूसरों पर आश्रित न रहना पड़े। साथ ही प्रस्तावित नए कानून में किसानों को अधिग्रहीत जमीन के पांच किमी. के दायरे में पुनर्वास व पुनरुत्थान के तहत जमीन उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है।
हालांकि मौजूदा बिल में अधिग्रहण से जीविका खोने वाले यानी भू-स्वामियों या किसानों के आश्रितों के प्रावधानों को लचीला किया गया है। पहले के मसौदे में आश्रितों के लिए 12 महीने के लिए प्रति परिवार 3000 रुपये प्रति माह जीवन निर्वाह भत्ता, उपयुक्त मुद्रा-स्फीति सूचकांक सहित बीस वर्षों के लिए प्रति परिवार को वार्षिक भत्ते के रूप में प्रति माह 2000 रुपये दिए जाने का प्रावधान था।