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भूमि अधिग्रहण बिल के मसौदे का किसानों ने किया विरोध

Sat, 20 Oct 2012 12:35 AM IST
नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो Updated Sat, 20 Oct 2012 12:35 AM IST
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 Land acquisition draft bill opposed by farmers
कृषि मंत्री शरद पवार की अध्यक्षता वाले मंत्रियों के समूह की अनुमति के बाद कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजे जाने वाले भूमि अधिग्रहण बिल के मसौदे का विरोध शुरू हो गया है। किसान महासंघ के नेतृत्व में बड़ी संख्या में किसानों ने शुक्रवार को ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश के घर के बाहर जबरदस्त प्रदर्शन किया और धरना दिया। वहीं रमेश ने किसानों की आशंकाओं को दूर करने के लिए शनिवार को चर्चा के लिए बुलाया है।
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किसानों का आरोप है कि जमीन की दलाली करने के लिए सरकार ने इस तरह का कानून बनाया है। इसे किसी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। उनका कहना है कि उन्हें बिल का यह मसौदा कतई मंजूर नहीं है। उद्योग जगत के दबाव में सरकार ने किसानों के हितों की अनदेखी की है। इससे निजी व सार्वजनिक क्षेत्रों के लिए किसानों की खेतिहर जमीन का अधिग्रहण आसान हो जाएगा।
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दूसरी ओर रमेश ने कहा कि बिल किसी भी स्तर से किसान विरोधी नहीं है। खास बात यह है कि इस मसौदे में खेतिहर भूमि के अधिग्रहण पर रोक लगाई गई है। निजी या सार्वजनिक उपयोग के लिए कोई भी किसान की उपजाऊ जमीन का अब जबरन अधिग्रहण नहीं कर सकेगा। जमीन का अधिग्रहण बगैर ग्रामसभा या ग्राम पंचायत की मंजूरी के बगैर संभव ही नहीं है। उस पर भी अधिग्रहण तभी संभव है जब दो तिहाई भू मालिक राजी होंगे।
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साथ ही अधिग्रहण के लिए जमीन की बाजार भाव से दोगुनी कीमत भी चुकानी होगी। यही नहीं जमीन मालिक के अलावा उस पर आश्रितों के पुनर्वास और पुनर्स्थापन का भी प्रावधान किया गया है। उन्होंने किसानों को बिल पर चर्चा के लिए शनिवार को बुलाया है, ताकि बिल से संबंधित उनके भ्रम को दूर किया जा सके।
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