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लालू ने फंसाया पेंच, जनता परिवार के दलों में गठबंधन भी मुश्किल

Sat, 23 May 2015 12:27 PM IST
Updated Sat, 23 May 2015 12:27 PM IST
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lalu prasad yadav janta pariwar and bihar politics

जनता परिवार के दलों के विलय का मामला अधर में लटक जाने के बाद अब जदयू और राजद के बीच बिहार विधानसभा चुनाव से पहले गठबंधन की संभावना पर भी पेंच फंस गया है।

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शुक्रवार को सीटों के बंटवारे पर विवाद टालने के लिए बुलाई गई बैठक में गतिरोध और बढ़ गया। बैठक में राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने न केवल नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाए जाने पर विरोध जताया, बल्कि मोर्चा बनाकर उसमें जीतन राम मांझी को भी शामिल करने की मांग कर डाली।
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नतीजा यह हुआ कि बैठक महज आधे घंटे में ही बिना किसी निर्णय के निपट गई।

‌बिहार चुनाव के लिए मोर्चे का प्रस्ताव

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इस दौरान उपस्थित रहे एक नेता के मुताबिक बैठक शुरू होते ही राजद प्रमुख ने विलय को टालने और बिहार विधानसभा चुनाव से पहले मोर्चा खड़ा करने का प्रस्ताव रखा।

उन्होंने चुनाव से पहले किसी को मुख्यमंत्री के रूप में पेश न करने, मोर्चा में वाम दलों, कांग्रेस के साथ-साथ नीतीश के धुर विरोधी मांझी को भी शामिल करने की मांग कर डाली। इतना ही नहीं लालू ने जदयू के उलट लोकसभा चुनाव में प्रदर्शन के आधार पर सीट बंटवारे का प्रस्ताव रखा।

इसके बाद बैठक महज आधे घंटे में ही बिना किसी नतीजे के खत्म हो गई।

नीतीश कुमार ने बैठक से बनाई दूरी

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सूत्रों के मुताबिक नीतीश को बैठक में लालू प्रसाद की ओर से रखे जाने वाले प्रस्ताव की जानकारी थी। इसलिए उन्होंने पहले ही इस बैठक से दूरी बना ली थी। इसे भी विवाद बढ़ने का संकेत माना जा रहा है।

मुलायम के निवास पर हुई बैठक में जदयू अध्यक्ष शरद यादव, सपा महासचिव रामगोपाल यादव और शिवपाल सिंह यादव भी मौजूद रहे।

उल्लेखनीय है कि सीटों के बंटवारे का विवाद टालने के लिए जदयू और राजद के नेताओं ने सपा प्रमुख से कई बार बैठक बुलाने की गुहार लगाई थी। यह बैठक पहले बृहस्पतिवार को होनी थी मगर मुलायम के दिल्ली नहीं आने के कारण एक दिन के लिए टल गई थी।

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दबाव की राजनी‌‌ति कर रहे राजद, जदयू

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सूत्रों के अनुसार फिलहाल राजद और जदयू चुनाव पूर्व गठबंधन से पहले अधिक से अधिक सीट हासिल करने के लिए एक दूसरे पर दबाव बनाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। हालांकि चुनाव पूर्व गठबंधन की संभावना अभी बची हुई है।

सारी संभावना खत्म होने पर जदयू और राजद राज्य में अलग-अलग मोर्चा खड़ा कर चुनाव मैदान में उतर सकते हैं।

उल्लेखनीय है कि जनता परिवार में विलय को लेकर खुद सपा में भी भारी मतभेद हैं। इसी कारण जनता परिवार का मुखिया चुने जाने के बावजूद मुलायम ने इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में रुचि दिखाना कम कर दिया था। जदयू सूत्रों का कहना है कि विलय पर पार्टी में मतभेद के बाद सपा विवाद से पल्ला झाड़ रही है।

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