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सियासी पिच पर लालू को मिला नई पारी का मौका

Mon, 09 Nov 2015 12:02 PM IST
Updated Mon, 09 Nov 2015 12:02 PM IST
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lalu prasad yadav come back in bihar politics

बिहार विधानसभा चुनाव में सियासी बनवास झेल रहे राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव का सब कुछ दांव पर लगा था। राजग ने भी सूबे की सत्ता हासिल करने केलिए लालू को ही माध्यम बनाया था।

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मगर राजग के इस सियासी दांव ने चारा घोटाले में सजा के कारण राजनीतिक बनवास झेल रहे लालू को नई राजनीतिक जिंदगी दे दी। चुनाव प्रचार में पीएम नरेंद्र मोदी से ले कर राजग के सभी छोटे-बड़े नेताओं का कभी खत्म न होने वाले हमलों का सिलसिला झेलने वाले राजद सुप्रीमो ने बड़ी चतुराई से इन हमलों की आड़ में मुसलमानों के साथ पिछड़ों-अतिपिछड़ों को महागठबंधन के पक्ष में गोलबंद कर लिया।
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अब चुनाव नतीजे आने केबाद लालू के समक्ष अपने दोनों बेटों का सियासी कैरियर संवारने का मौका है तो दूसरी तरफ भाजपा के खिलाफ विपक्ष को गोलबंद करने का खूबसूरत मगर बेहद प्रभावी योजना। खुद लालू ने सूबे की कमान नीतीश को दे कर देश भ्रमण की घोषणा कर अपनी योजना का खुलासा भी कर दिया है।

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बेटों को सियासत में मजबूत करने का मिला मौका

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दरअसल जीवन का 69वां पड़ाव पार कर चुके राजद सुप्रीमो को जब चारा घोटाले में सजा मिली तो उनके सुनहरे सियासी सफर पर ब्रेक लग गया। उनकी मुश्किल यह थी कि यह तब हुआ जब उनके बेटे-बेटी सियासी जमीन पर पांव जमाने की कोशिश कर रहे थे। इसी बीच लोकसभा चुनाव के नतीजों ने उनकी परेशानी तब और बढ़ दी जब उनकी पत्नी और बेटी दोनों चुनाव हार गईं।

बिहार विधानसभा चुनाव से पहले जदयू अध्यक्ष शरद यादव की पहल पर बना महागठबंधन उनके लिए आखिककार वरदान साबित हुआ। अब भाजपा भी मानती है कि अगर पार्टी लालू पर जरूरत से ज्यादा हमला न करती तो स्थिति कुछ और होती।

दरअसल खुद पर ताबड़तोड़ हमलों को लालू से चतुर सियासी महारत दिखाते हुए न केवल पिछड़ों के अपमान से जोड़ दिया, बल्कि इसी बहाने अपने माय (मुस्लिम और यादव) समीकरण को और पुख्ता कर लिया।

लालू ने मनवाया अपनी ताकत का लोहा

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राजद सूत्रों का कहना है कि फिलहाल लालू की निगाहें अपने दोनों बेटों की सियासी जमीन मजबूत करने की है। इसलिए निकट भविष्य में उनकी नीतीश से तकरार की संभावना नहीं है।

हां, लालू अपने बेटे की जगह पार्टी के वरिष्ठ नेता अब्दुल बारी सिद्दकी को सरकार में नंबर दो की हैसियत दिला कर अल्पसंख्यक समुदाय में अपनी पैठ को और पुख्ता करने का दांव चल सकते हैं। इस क्रम में लालू के दो बेटों में से छोटे बेटे तेजस्वी राजनीतिक ककहरा सीखने के लिए किसी मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल सकते हैं।

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