फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   Lalu-Mulayam buses big blow on UP transport dept.

लालू-मुलायम के नाम पर खेल, लग रहा लाखों का चूना

Mon, 19 Jan 2015 12:12 PM IST
Updated Mon, 19 Jan 2015 12:12 PM IST
विज्ञापन
Lalu-Mulayam buses big blow on UP transport dept.

लालू प्रसाद यादव ट्रांसपोर्ट, मुलायम सिंह यादव ट्रवेल्स, शिवपाल सिंह यादव बस कंपनी। आप सोच रहे होंगे आखिर ये नाम हम क्यों गिना रहे हैं, तो जनाब आप इन नामों को जिनसे जोड़ कर देख रहे हैं वैसा बिल्कुल नहीं है।

विज्ञापन


इनके नाम भले ही बड़े हों पर इन नामों के चक्कर से उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग को रोजाना लाखों की चपत लग रही है।

दरअसल, ये पूरा खेल आगरा में सामने आया है। जहां बड़े राजनेताओं के नाम पर अवैध तरीके से निजी बस ऑपरेटर अपनी बसें चलवा रहे हैं। बड़े नेताओं के नाम के चक्कर में विभाग को रोजाना लाखों का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
विज्ञापन

निजी बस ऑपरेटरों का 'कमाल'

Lalu-Mulayam buses big blow on UP transport dept.

टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर के मुताबिक ये सारा खेल नाम के चक्कर में चल रहा है। इस मामले पर आगरा रोडवेज के एक अधिकारी ने बताया कि बड़े नेताओं के नाम पर बसें चला कर निजी बस ऑपरेटर विभाग को रोजाना 30 से 35 फीसदी का चूना लगा रहे हैं।

अधिकारियों के मुताबिक अगर प्रशासन इन बसों पर कार्रवाई करता है तो उन्हें धमकियां दी जाती हैं। बड़े रसूख की बातें करके अधिकारियों को डराया जाता है।

रोडवेज के अधिकारी के मुताबिक आम तौर इन बस संचालकों का सीधा जवाब होता है कि ये बस नेता जी (यानी सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव) के गांव की है। अगर इसे पकड़ने की कोशिश की गई या फिर चालान काटा गया तो नेता जी को फोन मिला देंगे। इस तरह की धमकियां आम बात है।

आगरा सड़क परिवहन विभाग के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक राजेश कुमार ने बताया कि हम आगरा के 4 डिपो से करीब 300 बसें दूसरे जिलों में भेजते हैं।

लेकिन निजी बस ऑपरेटरों की वजह से विभाग को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। हालात ये हैं कि ये ऑपरेटर करीब एक तिहाई बसें संचालित कर रहे हैं।

'राजनैतिक दबाव में नहीं हो रही कार्रवाई'

Lalu-Mulayam buses big blow on UP transport dept.

विभाग के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक राजेश कुमार के मुताबिक, निजी बस ऑपरेटरों के चलते हर महीने विभाग को 8 से 10 लाख का नुकसान हो रहा है। ये हालात त्योहारों के मौसम में और भी बिगड़ जाते हैं।

उन्होंने बताया कि इस मामले को लेकर क्षेत्रीय आरटीओ कार्यालय से लेकर पुलिस विभाग से शिकायत की गई है लेकिन कोई भी कार्रवाई नहीं हुई है।

वहीं आरटीओ विभाग के सूत्रों के मुताबिक एक अधिकारी ने पिछले महीने इन बस ऑपरेटर के खिलाफ चालान किया था लेकिन बाद उसे राजनैतिक दबाव का सामना करना पड़ा। ऐसे में विभाग इन बसों के खिलाफ कार्रवाई से हिचकते हैं।

फिलहाल आगरा आईएसबीटी के बाहर ऐसी बसें खड़ी रहती हैं और विभाग को जमकर चूना लगा रही हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed