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रामकृपाल ने लालू के कुनबे को कहा राम-राम, दिया इस्तीफा

Sat, 08 Mar 2014 12:02 PM IST
Updated Sat, 08 Mar 2014 12:02 PM IST
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Lalu loyalist Ram Kripal quits party posts over ticket row

पाटलिपुत्र टिकट को लेकर लालू की पार्टी में हुए बवाल के बाद पार्टी के वरिष्ठ नेता रामकृपाल यादव ने सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में रामकृपाल ने ऐलान किया कि उन्होंने आरजेडी अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव को अपना इस्तीफा भेज दिया है।

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रामकृपाल ने कहा है कि वे अभी पार्टी के सदस्य बने हुए हैं। उन्होंने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम पर लालू प्रसाद यादव को विचार करना चाहिए। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बहुत भावुक रामकृपाल ने कहा पार्टी अपनी मूल विचारधारा से भटक गई है।
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रामकृपाल ने कहा कि लालू की बेटी मीसा का उनके घर पर आना एक तरह का इमोशनल अत्याचार था। लालू प्रसाद यादव पर निशाना साधते हुए रामकृपाल ने कहा कि पार्टी में उनकी ईमानदारी की अनदेखी की गई।

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मीसा का इमोशनल अत्याचार

Lalu loyalist Ram Kripal quits party posts over ticket row

पाटलिपुत्र टिकट पर मीसा के नाम का ऐलान होने के बाद जब ऐसी खबरें आईं थी कि रामकृपाल ने आरजेडी छोड़ दी है तो मीसा उन्हें मनाने उनके घर पहुंची थीं। हालांकि रामकृपाल उस समय मीसा से नहीं मिल सके थे।

मीसा ने इमोशनल कार्ड खेलते हुए कहा था कि अगर उनके चाचा चाहते हैं तो वो उनके लिए पाटलिपुत्र की सीट छोड़ देंगी। रामकृपाल ने मीसा के ऑफर को स्वीकार करते हुए पाटलिपुत्र से चुनाव लड़ने की अपनी इच्छा भी जाहिर कर दी थी और कहा था कि लालू प्रसाद यादव मीडिया के माध्यम से इस बारे में अपनी प्रतिक्रिया दें। हालांकि उन्हें इस पर कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला।

लालू ने कहा कि बीच रेस में घोड़े नहीं बदले जाते। रामकृपाल यादव ने कहा कि उन्होंने कभी घोड़े बदलने की बात नहीं की। पाटलिपुत्र से चुनाव लड़ने का ऑफर मीसा की तरफ से आया था और चूंकि वो मीसा को अपनी बेटी जैसा मानते हैं इसलिए वो इस ऑफर को ठुकरा नहीं सके थे।

'कभी नहीं किया विश्वासघात'

Lalu loyalist Ram Kripal quits party posts over ticket row

रामकृपाल यादव ने कहा कि उन्होंने पार्टी को अपना खून-पसीना दिया है और पूरी ईमानदारी के साथ पार्टी के हित में काम किया है। उन्होंने लालू के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि करीब सालभर पहले ही उन्होंने चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर कर दी थी।

रामक़ृपाल ने कहा कि पूरी जिंदगी उन्होंने पार्टी की सेवा की है और पार्टी की मजबूती के लिए ही काम किया है। पाटलिपुत्र उनकी पारंपरिक सीट रही है और वे यहां से पांच बार चुनाव लड़े और तीन बार जीत भी हासिल की है। उन्होंने 2010 में राज्यसभा का सदस्य बनाने के लिए पार्टी का आभार भी जताया।

रामकृपाल ने कहा कि मेरी और पार्टी कार्यकर्ताओं की इच्छा थी कि मैं लोकसभा का चुनाव लडूं। उन्होंने कहा कि मैं चाहता हूं कि मैडम भी लड़ें लेकिन पार्टी को उनके समर्थकों की भावनाओं का भी ख्याल रखना चाहिए।

रामकृपाल पर मीसा का पलटवार

Lalu loyalist Ram Kripal quits party posts over ticket row

इधर, मीसा भारती ने पलटवार करते हुए कहा, 'मैं रामकृपाल जी से मिलने गई थी। लेकिन उन्होंने इसे नौटंकी और इमोशनल अत्याचार करार दिया। मैंने उन्हें चाचा कहा। यदि मैं उनकी बेटी होती तो ‌फिर ऐसा क्यों कहते। यदि मेरी जगह कोई लड़का उनसे मिलने जाता तो क्या मेरे बारे में ऐसी बात कहते।'

मीसा ने कहा, 'पार्टी ने जो फैसला किया है उसे मैं मानूंगी। मैं पाटलिपुत्र से ही लोकसभा चुनाव लड़ूंगी। पार्टी में ऐसे कई विधायक हैं जो लोकसभा चुनाव लड़ना चाहते हैं। ऐसे में सभी को टिकट देना और संतुष्ट करना संभव नहीं है।'

वहीं विपक्षी दलों ने इस पूरे विवाद पर चुटकी लेनी शुरू कर दी है। लोकजनशिक्त पार्टी के चिराग पासवान ने कहा कि जब राजद में रामकृपाल यादव जैसे लोगों को इस तरह इस्तीफा देना पड़ता है तो इसकी वजह समझी जा सकती है।

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