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इंसाफ के इंतजार में बीते 39 साल, फिर टला फैसला

Mon, 10 Nov 2014 03:05 PM IST
Updated Mon, 10 Nov 2014 03:05 PM IST
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lalit narayan mishra

दो जनवरी 1975, बिहार के समस्तीपुर रेलवे स्टेशन पर चल रही थी एक सभा जिसे संबोधित कर रहे थे तत्कालीन रेल मंत्री एलएन मिश्रा। उसी समय वहां एक बम फेंका गया जिसमें मिश्रा गंभीर रूप से घायल हो गए और अगले दिन तीन जनवरी को अस्पताल में उनकी मौत हो गई।

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इस मामले में पांच लोगों को आरोपी बनाया गया था, जिनमें से एक की मौत हो चुकी है। फिलहाल रंजन द्विवेदी, संतोषानंद अवधूत, सुदेवानंद अवधूत और गोपालजी पर फैसला आएगा। एक नवंबर 1977 को पटना की सीबीआई अदालत में आरोपपत्र दायर किया गया था। 17 दिसंबर 1979 में सुप्रीम कोर्ट ने मुकदमे की कार्यवाही दिल्ली स्थानांतरित कर दी।
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13 अक्तूबर 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने 36 वर्षों के बाद भी फैसला नहीं आने पर हैरानी जताते हुए धमाके की परीक्षण पर स्टेटस रिपोर्ट तलब की। 17 अगस्त 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी रंजन द्विवेदी की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें निचली अदालत में चल रहे मुकदमे को खारिज करने की अपील की गई थी।
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शीर्षस्थ अदालत ने कहा कि सिर्फ इस आधार पर अदालती कार्यवाही बंद नहीं की जा सकती कि पिछले 37 साल में इस मामले में किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जा सका है। रंजन द्विवेदी व सुदेवानंद ने सुप्रीमकोर्ट में याचिका दाखिल कर देरी के आधार पर मुकदमा समाप्त करने की मांग की थी।

ललित नारायण मिश्रा का परिचय

lalit narayan mishra

रेल मंत्री ललित नारायण मिश्रा का जन्म 1922 में बिहार के सहरसा में हुआ था। वह वह पहली, दूसरी और 5वीं लोकसभा के सदस्य थे। वह दो बार राज्यसभा सांसद भी रहे।

केंद्र सरकार में वह उप गृह मंत्री (1964-66), उप वित्त मंत्री (1966-67), रक्षा उत्पाद राज्य मंत्री (1967-70) और विदेश व्यापार मंत्री (1970-73) रहे। पांच फरवरी, 1973 में वह इंदिरा गांधी सरकार में रेल मंत्री बने।

उन्होंने अपने विदेश व्यापार मंत्री रहते हुए पहली बार डॉ. मनमोहन सिंह (पूर्व प्रधानमंत्री) को अपने मंत्रालय के लिए सलाहकार नियुक्त किया।

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