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ललित मोदी प्रकरण: कुर्सी बचाने में जुटी वसुंधरा

Fri, 19 Jun 2015 09:42 PM IST
Updated Fri, 19 Jun 2015 09:42 PM IST
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Lalit Modi case

आईपीएल के पूर्व कमिश्नर ललित मोदी से गहरे संपर्कों के कारण विवादों में घिरीं राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और भाजपा नेतृत्व में निकट भविष्य में सीधे टकराव के हालात बनते दिख रहे हैं। ललित मोदी प्रकरण से निकलने के लिए जहां भाजपा नेतृत्व वसुंधरा की बलि चाहता है, वहीं वसुंधरा ने पलटवार के संकेत दे दिए हैं।

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कुर्सी बचाने के लिए वह अपनी ताकत का अहसास कराने में जुट गई हैं। उन्होंने अपने समर्थक विधायकों को एकजुट करना शुरू कर दिया है।  अगले एक-दो दिन में दिल्ली में भाजपा विधायकों का जमावड़ा लग सकता है। समझा जाता है कि मामले की गंभीरता को भांपते हुए बृहस्पतिवार को गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस विवाद पर चर्चा
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की। हालांकि दोनों नेता यूआईडी के संदर्भ में मिले थे। फिलहाल असमंजस में फंसे पार्टी नेतृत्व को सीएम की ओर से बगावती तेवर अपनाने का डर सता रहा है। वह इस मसले पर चुप्पी साधे हुए है। लेकिन राजस्थान सरकार में मंत्री राजेंद्र राठौड़ ने दावा किया कि भाजपा और केंद्र सरकार वसुंधरा के साथ है। उन्हें इस्तीफा देने की जरूरत नहीं है।
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इस्तीफे की पेशकश करने की संभावना नहीं

Lalit Modi case

इस बीच, शुक्रवार को पंजाब के आनंदपुर साहब में वसुंधरा की राजनाथ और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह से मुलाकात हो सकती है। वह यहां एक कार्यक्रम में शामिल होने पहुंच रही हैं। उल्लेखनीय है कि बुधवार को वसुंधरा ने पार्टी अध्यक्ष अमित शाह को फोन कर पूरे मामले में अपनी ओर से सफाई पेश की थी। हालांकि पार्टी नेतृत्व उनकी सफाई से संतुष्ट नहीं होने के संकेत दिए थे।

दरअसल, ललित मोदी की मदद के सवाल पर विदेश मंत्री को बचाने में पहले से उलझी भाजपा को वसुंधरा को बचाने का कोई रास्ता नहीं सूझ रहा। पूरे मामले में सीधे-सीधे भ्रष्टाचार और कालाधन का मुद्दा आ जाने के बाद पार्टी नेतृत्व वसुंधरा की छुट्टी कर इस विवाद से पार पाना

चाहता है। पार्टी के पास वसुंधरा की ललित मोदी के आव्रजन मामले में नाम सामने न आने देने की कड़ी शर्त पर समर्थन में दी गई गवाही, मोदी की पत्नी को इलाज के लिए दो बार पुर्तगाल ले जाने और वसुंधरा के पुत्र दुष्यंत की कंपनी के शेयर को कई गुणा कीमत पर खरीदने जैसे नए खुलासों का कोई जवाब नहीं है। 

पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक चूंकि मामला अब मानवीय मदद से हट कर भ्रष्टाचार और कालाधन पर चला गया है तो ऐसे में उनका सीधा बचाव करना मुश्किल हो गया है। उक्त नेता के मुताबिक पार्टी नेतृत्व एक दो दिन में वसुंधरा के भविष्य का फैसला कर लेगा।

वहीं, वसुंधरा के नजदीकी नेताओं के मुताबिक, आलाकमान की इच्छा के मुताबिक फिलहाल वसुंधरा की इस्तीफे की पेशकश की संभावना दूर-दूर तक नहीं है। पार्टी नेतृत्व ने अगर इस मामले में कड़ा रुख अपनाया तो वसुंधरा का भी बागी तेवर अपनाना तय है। बहरहाल दोनों ही पक्षों को एक दूसरे के भावी रुख का इंतजार है।

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