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गोवा टू बंगलूरू: मार्गदर्शक से मूकदर्शक तक आडवाणी

Updated Sat, 04 Apr 2015 07:44 PM IST
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lal krishna advani political journey from goa to bangalore

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लाल कृष्‍ण आडवाणी के जिन रथों पर सवार होकर भाजपा केंद्र की सत्ता का व्यूह भेद पाई थी, उन्हीं रथों के पहिए 2013 में गोवा में पटरी से उतरे और बंगलुरू में उसके परखच्‍चे उड़ गए।
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पिछले लोकसभा चुनावों में बहुमत पाकर सत्ता में आई भाजपा ने सबसे पहले अपने तीन वरिष्ठ नेताओं अटल ‌बिहारी वाजपेयी, लालकृष्‍ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी को संसदीय समि‌ति से बाहर कर मार्गदर्शक मंडल में रखा। बंगलूरू में हो रही राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में उनसे मार्गदर्शन का अधिकार भी छीन लिया गया।


राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के पहले दिन से ही मुरली मनोहर जोशी चर्चा से बाहर थे, जबकि संभावना था कि पार्टी मे पितृपुरुष की पदवी पर बैठे आडवाणी को बोलने का मौका दिया जा सकता है। शुक्रवार को दिन भर चर्चा रही कि किसी प्रस्ताव में हस्तक्षेप या किसी अन्य माध्यम से आडवाणी को बोलने का मौका दिया जाऐगा।

हालांकि शनिवार को भी वक्ताओं की सूची में उनका नाम नहीं डाला गया। अनदेखी से व्यथित आडवाणी ने स्वयं ही भाषण देने से इनकार कर दिया।
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भाजपा में आडवाणी का सूर्य अस्त हो चुका है

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