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सर्वे: इस बार गच्चा खा गए आडवाणी

Thu, 13 Jun 2013 12:17 AM IST
नई दिल्ली/अमर उजाला नेटवर्क
नई दिल्ली/अमर उजाला नेटवर्क Updated Thu, 13 Jun 2013 12:17 AM IST
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lal krishna advani not consider bjp workers in survey

अपने कैरियर में पहली बार लालकृष्ण आडवाणी पिछले दिनों अपने समर्थकों और भाजपा कार्यकर्ताओं का मूड भांपने में नाकाम रहे।

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भाजपा में आए ‘आडवाणी संकट’ को लेकर ढाई हजार से ज्यादा पार्टी कार्यकर्ताओं/समर्थकों पर किए गए सीवोटर एक्सक्लूसिव सर्वे की मानें तो आडवाणी अतीत का अध्याय बन गए हैं और मोदी भविष्य हैं।

देश के महानगरों में किए गए इस सर्वे के मुताबिक करीब दो तिहाई लोगों (जिन्होंने पिछले दो विधानसभा और लोकसभा चुनावों में भाजपा को वोट दिए और अगले चुनावों में वोट देने का मन बना रहे हैं) ने कहा कि इस समय आडवाणी की जिद गलत है।
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ज्यादातर का मानना है कि आडवाणी के कारण आया संकट आगामी आम चुनावों में पार्टी को नुकसान पहुंचा सकता है। हर चौथा समर्थक मान रहा है कि इस विवाद से भाजपा को ‘गंभीर नुकसान’ हो सकता है।
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सर्वे की खास बात यह है कि करीब एक तिहाई समर्थकों (73 फीसदी) ने कहा कि आज गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी अपने वरिष्ठ आडवाणी से कहीं ज्यादा लोकप्रिय हैं।

हाल के दिनों में नेतृत्व को लेकर भाजपा उम्मीवारों में यह सबसे बड़ी खाई है। भाजपा का विशाल जनमत (81 प्रतिशत) कहता है कि पार्टी को मोदी के नेतृत्व में ही अगला चुनाव लड़ना चाहिए और उन्हें प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करना चाहिए। प्रत्येक दस में मात्र एक भाजपाई को लगता है कि वर्तमान विवाद के बाद मोदी को पीछे हट जाना चाहिए।


पिछले दिनों भाजपा कार्यकारिणी की बैठक में आडवाणी की अनुपस्थिति पर 80 प्रतिशत समर्थकों का कहना है कि वे ‘निजी कारणों’ से नहीं गए।

कम ही लोगों ने माना कि वे ‘स्वास्थ्य’ के कारण गोवा नहीं गए थे। जबकि तीन प्रतिशत के अनुसार आडवाणी ने सचमुच इस कारण इस्तीफा दिया था कि पार्टी अपने आदर्शों से भटक गई है।

आडवाणी के रुख से आए संकट पर आप क्या सोचते हैं?

- आडवाणी गलत हैं, बाकी सही हैं: 62 प्रतिशत
- आडवाणी सही हैं, बाकी गलत हैं: 24 प्रतिशत
- पार्टी में सभी गलत हैं: 3 प्रतिशत
- कह नहीं सकते: 11 प्रतिशत

विवाद का चुनावों में भाजपा पर क्या असर होगा?
- भाजपा को बहुत नुकसान होगा: 28 प्रतिशत
- भाजपा को थोड़ा नुकसान होगा: 30 प्रतिशत
- भाजपा के मौके थोड़े बढ़ेंगे: 5 प्रतिशत
- भाजपा के मौके ज्यादा बढ़ेंगे: 19 प्रतिश
- भाजपा के मौकों पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा: 18 प्रतिशत

अब क्या करे भाजपा?
- मोदी को ही पीएम पद का उम्मीदवार बनाए: 81 प्रतिशत
- मोदी को पीए पद का उम्मीदवार घोषित न करे: 12 प्रतिशत
- कह नहीं सकते: 7 प्रतिशत

मोदी या आडवाणी, कौन ज्यादा लोकप्रिय?
- नरेंद्र मोदी: 73 प्रतिशत
- लालकृष्ण आडवाणी: 19 प्रतिशत
- दोनों समान रूप से लोकिप्रय: 8 प्रतिशत

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