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मोदी सांप्रदायिक तो आडवाणी सेक्युलर कैसे?

Tue, 16 Apr 2013 12:52 PM IST
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क Updated Tue, 16 Apr 2013 12:52 PM IST
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lal krishna advani into prime ministerial race again

भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी एक फिर प्रधानमंत्री की दौड़ में शामिल हो गए हैं।

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जनता दल (यूनाइटेड) के बाद अब भाजपा के एक अन्य वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा ने लालकृष्ण आडवाणी का नाम प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में उछाला है।

अंग्रेजी दैनिक इकॉनोमिक्स टाइम्स को दिए साक्षात्कार में उन्होंने कहा है कि आडवाणी अगर तैयार हो जाते हैं तो उन्हें राजग की ओर से प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया जाना चाहिए।

वहीं, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी शनिवार की रात भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह और पार्टी के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली से मिल कर आडवाणी को राजग की ओर से प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाए जाने की बात कही है।
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बिहार सरकार में कृषि मंत्री व जदयू नेता नरेंद्र सिंह ने भी एक टीवी साक्षात्कार में लालकृष्ण आडवाणी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बताया है।

कांग्रेस, सीपीएम के निशाने पर जदयू

लालकृष्ण आडवाणी का समर्थन किए जाने के बाद विपक्ष ने भी जद (यू) पर निशाना साधा है। कांग्रेस नेता शकील अहमद ने पूछा है कि जद यू नरेंद्र मोदी का विरोध कर रही है और लाल कृष्ण आडवाणी का समर्थन कर रही है।
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उन्होंने कहा है, 'ये तर्क समझ से परे है। मोदी सांप्रदायिक हैं तो लालकृष्ण आडवाणी सेक्युलर कैसे हो सकते हैं।'

मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी की नेता वृंदा करात ने भी जदयू के सेक्युलरिज्म पर सवाल उठाया है।

उन्होंने कहा है, 'हर पार्टी का अपनी राय रखने का हक है लेकिन सेक्युलरिज्म की लड़ाई किसी एक नेता का विरोध करके नहीं लड़ाई जा सकती।

क्या बोले यशवंत सिन्हा


भाजपा के वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा ने अपने साक्षात्कार में कहा है कि कांग्रेस की ओर से मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री पद की रेस में तीसरी बार शामिल हो गए हैं।

उन्होंने कहा, 'इससे पहले मुझे भी लगता था कांग्रेस के उम्मीदवार राहुल गांधी होंगे लेकिन अब इसकी संभावनाएं कम हैं।'

सिन्हा ने कहा है कि नई परिस्थितियों में यदि आडवाणी तैयार हो जाते हैं तो उन्हे राजग की ओर से प्रधानमंत्री का उम्मीदवार बनाया जाना चाहिए।

2009 में आडवाणी ही थे उम्मीदवार

राजग 2009 में लालकृष्ण आडवाणी के नेतृत्व में चुनाव लड़ चुका है। हालांकि उन चुनाव में राजग को जबर्दस्त हार का सामना करना पड़ा था।

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