आखिर किसका है कोहिनूर, भारत या पाकिस्तान का?
पाकिस्तान में लाहौर की एक अदालत ने कोहिनूर हीरे को ब्रिटेन से पाकिस्तान लाने का अनुरोध करने वाली एक याचिका को स्वीकार कर लिया है।
जावेद इकबाल जाफरी की इस याचिका में कहा गया है कि ब्रिटेन ने महाराजा रंजीत सिंह के पोते दलीप सिंह से कोहिनूर छीन लिया था और ब्रिटेन का कोहिनूर पर कोई हक नहीं है। इससे पहले, भारत की ओर से भी ऐसी मांगें उठती रही हैं, लेकिन ब्रिटेन सरकार ऐसी मांगों को अस्वीकार कर चुकी है।
माना जाता है कि ये हीरा 1848 के ब्रिटेन-सिख युद्ध के बाद ब्रिटेन के हाथ उस वक्त आया जब नाबालिग दलीप सिंह ने इसे ब्रितानी शासकों को सौंप दिया था। तभी से कोहिनूर ब्रितानी ताज में लगा हुआ है।
लाहौर से 77 वर्षीय याचिकाकर्ता जावेद इकबाल जाफरी ने कहा, “दलीप सिंह को जब हटाया गया तब वो हमारे पंजाब के राजा थे। फिर ईस्ट इंडिया कंपनी ने उनसे कोहिनूर ले लिया।
कोहिनूर हीरा अफगानिस्तान के बादशाह ने हमारे लाहौर के बादशाह रंजीत सिंह को तोहफे के तौर पर दिया था। बाद में कहानी बनाई गई कि ये हीरा दलीप सिंह ने अंग्रेजों को दे दिया। ये कोई तोहफा नहीं था। ये हीरा उनसे जबरन लिया गया था।”
जावेद इकबाल जाफरी कहते हैं कि इस हीरे की चोरी लाहौर से की गई इसलिए कोहिनूर पर भारत से कहीं ज्यादा पाकिस्तान का हक है।
हिंदुस्तान से है कोहिनूर का तारीखी रिश्ता
उधर, दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया में इतिहासकार प्रोफेसर रिजवान कैसर इस पाकिस्तानी दावे को खारिज करते हैं। रिजवान कैसर कहते हैं, “पाकिस्तान 1947 के बाद अस्तित्व में आया और उससे पहले जो भी था वो सब हिंदुस्तान का है। कोहिनूर का तारीखी रिश्ता हिंदुस्तान से है।” 105 कैरट का कोहिनूर करीब 150 साल से ज्यादा वक्त से ब्रितानी ताज का हिस्सा रहा है।
19वीं सदी में सिख राजा महाराजा रंजीत सिंह ने अफगानिस्तान मुहिम के दौरान इसे हासिल किया था। बाद में उन्होंने खुद को पंजाब का राजा घोषित कर दिया।
जब रंजीत सिंह मृत्यु के करीब थे तब उन्होंने कोहिनूर को उड़ीसा के एक हिंदू मंदिर को देने की बात वसीयत में लिखी, लेकिन उनकी मौत के बाद ब्रितानी शासकों ने वसीयत पर अमल नहीं किया।
ब्रिटेन का दावा है कि नाबालिग दलीप सिंह ने कोहिनूर क़ानूनी आधार पर उन्हें दिया, लेकिन भारतीय इतिहासकारों का तर्क है कि ऐसा नहीं हुआ और दलीप सिंह को कोहिनूर देने के लिए मजबूर किया गया।
लंबे समय से कोहिनूर की भारत वापसी के लिए मुहिम चलाने वाले वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप नैयर के मुताबिक सबसे पहले ज़रूरी है कि कोहिनूर को वापस लाया जाए और बात में इस बात पर सहमति हो सकती है कि इसे भारत के पास रखा जाए, या पाकिस्तान के पास। लेकिन प्रोफेसर कैसर इससे सहमत नहीं हैं और वो कहते हैं कि कोहिनूर पर भारत का ही हक है।
मुमकिन है कोहिनूर को वापस लाना
क्या ये याचिका समय की बर्बादी मात्र नहीं क्योंकि ब्रितानी सरकार पहले ही कोहिनूर वापस किए जाने से इनकार करते रहे हैं? जावेद इकबाल जाफरी मानते हैं कि मामले में देर हो सकती है, लेकिन कोहिनूर को वापस लाना मुमकिन है।
जाफरी कहते हैं, “मैं ये नहीं कह रहा हूं कि इस हीरे को तुरंत पाकिस्तान भेज दिया जाए। पाकिस्तान में तो पहले ही लूटमार इतनी हो रही है। अगर हीरा यहां आ जाएगा तो उसकी जगह यहां नकली हीरा रख देंगे और असली हीरा लेकर वहां से भाग जाएंगे। इतिहास बदलने में वक्त लगता है।”
वो इन आरोपों से भी इनकार करते हैं कि उन्होंने ये याचिका प्रचार पाने के लिए दायर की है। वो कहते हैं, “पाकिस्तान सरकार ने मुझ पर दो किताबें छापी हैं। मुझ पर करीब 18 किताबें पहले ही छप चुकी हैं। मुझे पब्लिसिटी की जरूरत नहीं है।”