{"_id":"c61047e461786f25abe1d5fce95f17df","slug":"lady-doctor-will-get-compensation-after-17-years-from-railway","type":"story","status":"publish","title_hn":"17 साल पहले ट्रेन में चोरी हुआ सामान, अब मिलेंगे दो लाख","category":{"title":"India News Archives","title_hn":"इंडिया न्यूज़ आर्काइव","slug":"india-news-archives"}}
17 साल पहले ट्रेन में चोरी हुआ सामान, अब मिलेंगे दो लाख
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
Updated Wed, 24 Jul 2013 11:42 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ट्रेन में सामान चोरी होने की घटनाएं आम हैं, लेकिन फर्ज कीजिए कि ऐसा होने
विज्ञापन
के 17 साल बाद अगर किसी को हर्जाना मिले, तो वह खुश हो या इस देरी पर
दुखी।
शीर्ष उपभोक्ता आयोग ने रेलवे को उस लेडी डॉक्टर को हर्जाने के रूप में 2.01 लाख रुपए चुकाने के निर्देश दिए हैं, जिनका सामान 1996 में चोरी हो गया था। वह कुशीनगर एक्सप्रेस में सफर कर रही थीं।
नेशनल कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमिशन (एनसीडीआरसी) ने महिला का सामान चोरी होने के लिए रेलवे को जिम्मेदार ठहराया है।
उसका कहना है कि टिकट चेकर को यह सुनिश्चित करना चाहिए था कि कोई भी अनधिकृत व्यक्ति रिजर्व कोच में दाखिल न हो। वह ऐसा नहीं कर सका, जिसके लिए रेलवे प्रशासन जिम्मेदार है।
उन्होंने कहा, 'इस बात में कोई संदेह नहीं है कि शिकायतकर्ता और उनकी बेटी रिजर्व कोच में सफर कर रही थीं और यह टीटीई की ड्यूटी थी कि वह किसी अनाधिकृत को रिजर्व कंपार्टमेंट में दाखिल न होने दे।'
विज्ञापन
एनसीडीआरसी ने यह आदेश देते हुए रेलवे की अपील खारिज की, जो उसने उत्तर प्रदेश उपभोक्ता आयोग और डिस्ट्रिक्ट फोरम के आदेश के खिलाफ की थी।
अपनी अपील में रेलवे ने दलील दी थी कि उसकी तरफ से कोई लापरवाही नहीं हुई है और जब तक सामान उसके यहां बुक नहीं कराए जाता, उसे हर्जाना देने की जरूरत नहीं है।
शीर्ष उपभोक्ता आयोग ने रेलवे को उस लेडी डॉक्टर को हर्जाने के रूप में 2.01 लाख रुपए चुकाने के निर्देश दिए हैं, जिनका सामान 1996 में चोरी हो गया था। वह कुशीनगर एक्सप्रेस में सफर कर रही थीं।
नेशनल कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमिशन (एनसीडीआरसी) ने महिला का सामान चोरी होने के लिए रेलवे को जिम्मेदार ठहराया है।
उसका कहना है कि टिकट चेकर को यह सुनिश्चित करना चाहिए था कि कोई भी अनधिकृत व्यक्ति रिजर्व कोच में दाखिल न हो। वह ऐसा नहीं कर सका, जिसके लिए रेलवे प्रशासन जिम्मेदार है।
विज्ञापन
उन्होंने कहा, 'इस बात में कोई संदेह नहीं है कि शिकायतकर्ता और उनकी बेटी रिजर्व कोच में सफर कर रही थीं और यह टीटीई की ड्यूटी थी कि वह किसी अनाधिकृत को रिजर्व कंपार्टमेंट में दाखिल न होने दे।'
विज्ञापन
एनसीडीआरसी ने यह आदेश देते हुए रेलवे की अपील खारिज की, जो उसने उत्तर प्रदेश उपभोक्ता आयोग और डिस्ट्रिक्ट फोरम के आदेश के खिलाफ की थी।
अपनी अपील में रेलवे ने दलील दी थी कि उसकी तरफ से कोई लापरवाही नहीं हुई है और जब तक सामान उसके यहां बुक नहीं कराए जाता, उसे हर्जाना देने की जरूरत नहीं है।