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'बात नहीं मानते पुलिसकर्मी, बढ़ रहा अपराध'

Mon, 03 Dec 2012 10:36 AM IST
अलीगढ़/ब्यूरो
अलीगढ़/ब्यूरो Updated Mon, 03 Dec 2012 10:36 AM IST
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lack of team spirit in uttar pradesh police

अपर पुलिस महानिदेशक कानून व्यवस्था और अपराध अरुण कुमार ने बढ़ते अपराधों की प्रमुख वजह पुलिस में चेन ऑफ आर्डर और टीम भावना की कमी बताई है। उन्होंने कहा कि हर नीचे वाला ऊपर वाले का आदेश नहीं मानता, इसलिए टीम भावना में कमी आ रही है और अपराध बढ़ रहा है। हमें इस कमी को दूर करना होगा और हाईटेक पुलिसिंग के साथ-साथ पुरानी पुलिसिंग को भी जिंदा रखना होगा, तभी स्वच्छ और अपराधमुक्त समाज की दिशा में हम बढ़ सकेंगे।

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अरुण कुमार रविवार को अलीगढ़-हाथरस के थानास्तर के अधिकारियों की मीटिंग कर रहे थे। पुलिस लाइन मनोरंजन सदन में हुई इस मीटिंग की शुरुआत परिचय से हुई। उन्होंने कहा कि डीजी स्तर से अगर कोई आदेश जारी होता है तो उसका पालन नहीं हो पाता, जबकि कोई भी बड़ा अधिकारी अगर आदेश देता है तो कुछ सोच-समझकर ही देता होगा। सबसे बुरा हाल थाना स्तर पर होता है। एसओ की बात न नीचे वाला मानता है और न ऊपर वाला। इसके पीछे विश्वास की कमी और टीम भावना का अभाव बड़ी वजह है। वे इसकी प्रमुख वजह स्टाफ में कुंठा भी मानते हैं।
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उन्होंने कहा कि सिपाही और दारोगा भरती होते हैं। मगर साहब की इच्छा के अनुसार काम न होने पर प्रमोशन के बजाय उसके खिलाफ फाइल खुल जाती है। इससे प्रमोशन लटक जाता है और वह कुंठा से ग्रसित हो जाते हैं। उन्होंने पब्लिक की बात सुनने पर विशेष जोर देते हुए कहा कि अगर आप सुनेंगे तो कोई नेता के पास नहीं जाएगा। खुद ही थानों और अधिकारियों के दफ्तरों में नेताओं की भीड़ कम होगी।
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उन्होंने कहा कि एसओ पुलिस की सबसे मजबूत कड़ी है। उसे मजबूत करना होगा, पुरानी पुलिसिंग को भी कायम रखना होगा। अधिकारियों को चाहिए कि वे एसओ की बात पर विश्वास करें, किसी की सुनकर सीधे एक्शन न लें। उन्होंने दिवाली पर फिरोजाबाद की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि प्रदेश में जुए के खिलाफ छापेमारी न करने के निर्देश थे। बावजूद वहां कार्रवाई हुई और एक मौत पर इतना बखेड़ा हुआ।


दूसरा उदाहरण उन्होंने दिया कि 200 पुलिसकर्मियों के सामने 50 लोग उपद्रव करते रहते हैं। यह कमजोरी नहीं तो और क्या है। स्टाफ लगातार बढ़ रहा है, मगर कार्यक्षमता कम हो रही है। हमें अपनी बेसिक पुलिसिंग का ध्यान रखना है, सिर्फ जमीनी विवादों के निपटाने में नहीं उलझे रहना है।

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