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सरकारी महकमों में तालमेल की कमी दिल्ली गैंगरेप की वजह

Fri, 22 Feb 2013 11:03 PM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Fri, 22 Feb 2013 11:03 PM IST
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lack of coordination in government departments cause delhi gangrape

दिल्ली में युवती के साथ हुई दरिंदगी के कारणों की जांच करने वाले जस्टिस उषा मेहरा कमीशन ने पुलिस और परिवहन विभाग के बीच तालमेल की कमी को घटना का मुख्य कारण बताया है। साथ ही कमीशन ने टेलीविजन पर बयान को लेकर युवती के दोस्त की भी निंदा की है। कमीशन ने दिल्ली पुलिस को इस घटना के लिए सीधा जिम्मेदार नहीं ठहराया है।

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शुक्रवार को जस्टिस मेहरा ने सरकार को तय समय से करीब महीने भर पहले अपनी रिपोर्ट सौंप दी। जस्टिस मेहरा ने कहा कि वारदात वाले दिन कॉल के छह मिनट के भीतर पीसीआर वैन लड़की और उसके दोस्त को अस्पताल पहुंचा चुकी थी। जांच में यह बात सामने आई है और युवती के दोस्त ने भी कमीशन को दिए अपने बयान में इसे स्वीकारा है। मगर टेलीविजन पर उसने पुलिस पर लापरवाही बरतने संबंधी बयान दिया था, इस संबंध में मेहरा ने कुछ नहीं कहा।
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रिपोर्ट में पुलिस, परिवहन विभाग और दूसरे नागरिक निकायों में तालमेल दुरुस्त करने की सिफारिश की है। रिपोर्ट के मुताबिक राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) की पुलिस और अन्य संस्थाओं में भी आपसी तालमेल बढ़ाने की सख्त जरूरत है।
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जस्टिस मेहरा ने कहा कि जिस बस में दरिंदगी की यह घटना हुई उसका मार्च से नवंबर के बीच कई बार चालान हुआ। लेकिन पुलिस ने इसकी जानकारी परिवहन विभाग को नहीं दी। लिहाजा वह बस खुलेआम पूरे एनसीआर में चलती रही और इस दरिंदगी भरे घटना की वजह बनी।

कमीशन ने बलात्कार से जुड़े सीआरपीसी में भी कुछ संशोधनों की सिफारिश की है। उसने कहा है कि सरकार मोबाइल कंपनियों के साथ मिलकर फोन में एक टच बटन का इंतजाम करे ताकि संकट के समय कोई भी महिला सीधे पुलिस और अपने घर से संपर्क कर सके।

मेहरा कमीशन ने भी जस्टिस जे एस वर्मा कमेटी की तरह पुलिस को ऐसे मामले निबटाने में संवेदनशील रवैया अपनाने की खास ट्रेनिंग की जरूरत पर जोर दिया है। इस मौके पर मौजूद कानून मंत्री अश्विनी कुमार ने कहा कि सरकार इस रिपोर्ट का गौर से अध्ययन करेगी और सभी सिफारिशों को जल्द से जल्द लागू करने के लिए सभी उपाए करेगी।


अस्पताल में हो वन स्टॉप सेंटर
जस्टिस मेहरा ने अपनी रिपोर्ट में रेप पीड़ितों के लिए वन स्टॉप सेंटर की तर्ज पर अस्पतालों का इस्तेमाल करने की सिफारिश की है। इस सेंटर में नर्स, महिला डॉक्टर, फोरेंसिक, पुलिस और मजिस्ट्रेट का इंतजाम होना चाहिए ताकि महिला और उसके परिवार वाले एक ही छत के नीचे इलाज से लेकर कानूनी प्रक्रिया का सुविधा उठा सकें। इससे मामले को अदालत तक पहुंचाने में तेजी आएगी।

और भी सिफारिशें
--मोबाइल कंपनियों के साथ मिलकर फोन में इमरजेंसी टच बटन का हो इंतजाम।
--पुलिस को संवदेनशील बनाने के लिए दी जाए खास ट्रेनिंग।

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