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सीवीसी नियुक्त होने से पहले ही इस विवाद में घिरे केवी चौधरी

Wed, 03 Jun 2015 09:14 AM IST
राजीव सिन्हा / नई दिल्ली।
राजीव सिन्हा / नई दिल्ली। Updated Wed, 03 Jun 2015 09:14 AM IST
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KV Chaudhary in the controversy Before joining CVC

देश के अगले केंद्रीय सतर्कता आयुक्त (सीवीसी) माने जा रहे केवी चौधरी अपनी नियुक्ति से पहले ही विवादों में घिर गए हैं। प्रसिद्ध वकील प्रशांत भूषण ने आरोप लगाया है कि पूर्व सीबीआई निदेशक रंजीत सिन्हा की विवादास्पद विजिटर्स डायरी में चौधरी की चार बार एंट्री है। बतौर सीबीडीटी चेयरमैन चौधरी हवाला कारोबारी मोइन कुरैशी के खिलाफ जांच में शामिल थे।

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कुरैशी वही शख्स है जिसने सिन्हा से कई बार उनके निवास पर जाकर मुलाकात की थी। विजिटर्स डायरी में कुरैशी के नाम की भी एंट्री भी कई बार है। भूषण ने प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और वित्त मंत्री को इस बावत 20 मई को ही आगाह कर दिया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाले पैनल ने सोमवार को सीवीसी और सीआईसी के नाम तय किए।
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सूत्रों के मुताबिक, पैनल ने सीवीसी के लिए चौधरी के नाम पर मुहर लगाई है। सीवीसी और सीआईसी के नामों की आधिकारिक घोषणा राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी स्वीडन दौरे से लौटने के बाद करेंगे। प्रशांत भूषण ने बताया कि उन्हें कुछ दिनों पहले यह जानकारी मिली थी कि केवी चौधरी सीवीसी बनने की दौड़ में सबसे आगे चल रहे हैं।
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लिहाजा उन्होंने 20 मई को प्रधानमंत्र, गृहमंत्री और वित्तमंत्री को पत्र लिखकर आगाह किया था। भूषण ने यह बताने की कोशिश की थी कि चौधरी को सीवीसी नियुक्त नहीं किया जाए। लोकपाल न होने पर गलत कामों पर निगरानी रखने के लिए केंद्रीय सतर्कता आयोग सबसे बड़ा संस्थान है। भूषण ने कहा है कि सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को आश्वस्त किया है कि वह पारदर्शी तरीके से श्रेष्ठ व्यक्ति को सीवीसी नियुक्त करेगी। लिहाजा ऐसे व्यक्ति की नियुक्ति न की जाए जो विवादों में रहा हो।

चौधरी पर प्रशांत भूषण के आरोप

KV Chaudhary in the controversy Before joining CVC

पत्र में भूषण ने जानकारी दी थी कि रंजीत सिन्हा के कार्यकाल के दौरान सीबीआई ने स्टॉक गुरु घोटाले में चौधरी की भूमिका की जांच की थी। साथ ही चौधरी हवाला कारोबारी मोइन कुरैशी के खिलाफ इनकम टैक्स की जांच टीम के सदस्य रहे थे। चौधरी जब डीजीआईटी, दिल्ली थे, उसी दौरान राडिया टेप लीक मामला सामने आया था लेकिन उपलब्ध साक्ष्यों पर उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की।

इतना ही नहीं टूजी घोटाले में इनकम टैक्स का इंचार्ज रहते हुए चौधरी भी सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय की तरह इस मामले में कुछ खास नहीं कर सके। भूषण ने यह भी आरोप लगाया है कि एचएसबीसी बैंक के खाताधारकों की जांच में भी चौधरी इंचार्ज थे। वे तब तक इस पद पर थे जब तक सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त विशेष जांच दल (एसआईटी) को यह जिम्मा नहीं दिया गया।

भूषण ने यह भी कहा कि सीबीडीटी के तीन वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा चौधरी की परफॉरमेंस अप्रेजल रिपोर्ट में प्रतिकूल टिप्पणी की गई थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चौधरी ने पोंटी चड्ढा की कंपनी की अघोषित संपत्ति को गलत तरीके से 200 करोड़ रुपये कम कर दिया था।

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