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'लाल बत्तियों की गाड़ी में घूमते थे चक्रधर'
अमर उजाला, दिल्ली
Updated Thu, 16 Jan 2014 03:29 PM IST
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हिंदी अकादमी के उपाध्यक्ष पद को लेकर उठे विवाद के बाद जानेमाने कवि और हिंदी अकादमी के पूर्व उपाध्यक्ष अशोक चक्रधर और कुमार विश्वास आमने सामने आ गए हैं।
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एक तरफ जहां अशोक चक्रधर ने हिंदी अकादमी के दफ्तर आना बंद कर दिया है वहीं कुमार विश्वास ने भी उन पर करारा हमला बोला है।
कुमार विश्वास ने चक्रधर पर निशाना साधते हुए कहा कि चक्रधर पिछली सरकार के बहुत खास रहे हैं। उन्होंने कभी जमीन पर उतरकर संघर्ष नहीं किया है।
लाल बत्तियों की गाड़ी में घूमते हैं और उन्हें सरकार की ओर से सारी सुविधाएं मिली हुई हैं।
अगर उन्हें नई सरकार के आने से काफी तकलीफ हो रही है तो वह अरविंद से कहकर उन्हें सारी सुविधाएं वापस दिला देंगे। आगे चक्रधर पर व्यंग्य कसते हुए विश्वास ने कहा था मैं अशोक चक्रधर से महंगा कवि हूं।
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चक्रधर बोले पहले ही भेज दिया था इस्तीफा
हिंदी अकादमी के उपाध्यक्ष पद को लेकर उठे विवाद के बाद अशोक चक्रधर ने दफ्तर जाना बंद कर दिया है। चक्रधर ने कवि सम्मेलन में शामिल होने से भी इनकार कर दिया है।
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लाल किले पर होने वाला मशहूर काव्य सम्मेलन आज होना है। चक्रधर ने कहा कि कार्ड देखकर साफ है कि वे उपाध्यक्ष नहीं रहे और कवि की सूची में उनका नाम भी नहीं है। श्रोता बनकर वे सम्मेलन में नहीं जाते।
कला, संस्कृति एवं भाषा विभाग और हिंदी अकादमी सचिव की तरफ से गणतंत्र दिवस के कवि सम्मेलन के कार्ड में मुख्य अतिथि में मंत्री राखी बिडलान का नाम और सम्मेलन की अध्यक्षता पद्मश्री गोपाल दास नीरज के अलावा सानिध्य कुमार विश्वास का दिया गया है।
जबकि अभी तक कार्ड में सानिध्य में अकादमी के उपाध्यक्ष का नाम होता था।
अशोक चक्रधर ने अमर उजाला से बातचीत में कहा है कि उन्होंने 28 दिसंबर को अकादमी के पदेन अध्यक्ष मुख्यमंत्री को इस्तीफा भेज दिया था।
उनकी नियुक्ति पूर्व की सरकार ने की थी, इसलिए नैतिकता के आधार पर इस्तीफा भेजने की जानकारी पत्र में लिख दी थी।
अकादमी या मुख्यमंत्री की तरफ से पत्र का कोई जवाब नहीं मिला। फिर 31 दिसंबर को रिमाइंडर भेजा। उसमें कहा कि जब तक उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं होता, वे काम करते रहेंगे। लेकिन अब कार्ड मिला तो उसमें सानिध्य कुमार विश्वास का लिखा है।
अशोक चक्रधर ने कहा है कि अब उन्होंने अकादमी के दफ्तर जाना बंद कर दिया है। उन्हें अभी इस्तीफा स्वीकार होने के संबंध में कोई सूचना नहीं मिली है। उल्लेखनीय है कि शीला दीक्षित ने कवि अशोक चक्रधर को अकादमी का उपाध्यक्ष बनाया था।
अभी उनका कार्यकाल बचा हुआ है। वहीं अकादमी से जुड़े अधिकारियों का कहना है इससे पूर्व भी विमलेश कांति वर्मा के उपाध्यक्ष रहने के दौरान सानिध्य में अशोक चक्रधर का नाम गया था, कोई नई बात नहीं है।