मोदी के खासमखास को हटा संघ ने इन पर लगाया दांव
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राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और भाजपा के बीच समन्वय का जिम्मा अब सुरेश सोनी की जगह कृष्णगोपाल संभालेंगे।
लखनऊ में आगामी 17 अक्टूबर से हो रही प्रांत प्रचारकों की तीन दिवसीय अखिल भारतीय बैठक से पूर्व संघ ने इस आशय का फैसला किया है। अरसे से यह जिम्मेदारी निभा रहे सुरेश सोनी को संघ में अन्य दायित्व दिए जाने की चर्चा है।
सोनी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चुनाव अभियान समिति की कमान के बाद प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाने में सोनी ने अहम भूमिका निभाई थी।
पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी सोनी के आलोचकों में थे। सोनी की तरह ही संघ में सह सरकार्यवाह का जिम्मा संभाल रहे कृष्ण गोपाल ने लोकसभा चुनाव के दौरान उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड राज्य की अहम जिम्मेदारी संभाली थी।
भाजपा में गए कई सदस्य वापस लौटेंगे
लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश और उत्तरखंड में धमाकेदार प्रदर्शन के बाद कृष्णगोपाल का कद अचानक बढ़ गया था। हालांकि कृष्ण गोपाल की जगह इस पद की दौड़ में दत्तात्रेय होसबोले भी शामिल थे, मगर अंत में कृष्णगोपाल को यह दायित्व देने का संघ ने फैसला किया।
माना जा रहा है कि संघ निकट भविष्य में अपनी ओर से भाजपा में भेजे गए कई अन्य प्रतिनिधियों की भी वापसी कराएगा। इस क्रम में कई राज्यों के संगठन मंत्री और संगठन महासचिव के नामों की चर्चा जारी है।
संघ सूत्रों ने बताया कि संघ ने करीब दो वर्ष पूर्व ही इस आशय की रणनीति बनाई थी। इसलिए सोनी की मदद के लिए बीते साल ही कृष्ण गोपाल और दत्तात्रेय को भाजपा से संबंधित कुछ जिम्मेदारी दी गई थी।
राजग सरकार बनने के बाद संघ का पहला बड़ा फैसला
बीते लोकसभा चुनाव में भाजपा के अनुरोध पर संघ ने कृष्ण गोपाल को उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की जिम्मेदारी दी थी। दोनों ही राज्यों में भाजपा ने लोकसभा चुनाव में धमाकेदार प्रदर्शन किया था।
संघ सूत्रों का कहना है कि केंद्र में भाजपा की सरकार बनने के बाद उसकी ओर से यह पहला बड़ा फैसला है। इस फैसले के बाद संघ की निगाह भाजपा में भेजे गए अपने अन्य प्रतिनिधियों पर है।
संघ की योजना चरणबद्घ तरीके से राज्यों के संगठन मंत्रियों के साथ ही केंद्रीय संगठन में शामिल अपने प्रतिनिधियों में से कुछ को वापस बुला कर नए प्रतिनिधियों को भेजने की है।
उल्लेखनीय है कि केंद्र की सत्ता में भाजपा को बैठाने के बाद संघ संगठन में अपनी पकड़ मजबूत बनाना चाहता है।
इसलिए चुनाव बाद संघ ने राम माधव, शिवप्रसाद जैसे कई जानेमाने चेहरे को न केवल भाजपा में भेजा है, बल्कि पहले से ही भाजपा में भेजे गए अपने प्रतिनिधियों को अहम जिम्मेदारी भी दिलाई है।