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पुलिस बोली छेड़छाड़ से बचना है तो अपनाओ ये 12 तरीके

Wed, 10 Sep 2014 07:37 PM IST
Updated Wed, 10 Sep 2014 07:37 PM IST
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kolkatta police release 12 point guidelines for save women to sexsual haressment.

अगर लड़कियां चाहती है कि उनके शारीरिक छेड़छाड़ न हो, तो उन्हें सलीके से कपड़े पहनने चाहिए और साथ ही देर रात चलने वाली पार्टियों से भी बचना चाहिए। ये फरमान कोलकत्ता के एक डिप्टी कमिश्नर ने लड़कियों के लिए जारी किया है।

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टीएनएन के मुताबिक लड़कियों को छेड़छाड़ से बचाने के लिए कोलकत्ता स्थित बिधाननगर शहर की पुलिस ने 12 सलाह जारी की हैं। बिधाननगर पुलिस ने अपनी वेबसाइट पर जारी सलाह में यह बताया कि छेड़छाड़ से बचने के लिए लड़कियों को क्या-क्या करना चाहिए?
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पुलिस की तरफ से जारी की गई लिस्ट में नंबर एक पर यह सलाह दी गई है कि लड़कियों को किस तरह के कपड़े पहनने चाहिए। सफर के दौरान छेड़छाड़ से बचने के लिए किस कैसे सफर करना चाहिए। पुलिस की तरफ से दी गई सलाह में यह भी कहा गया है कि छेड़छाड़ से बचना है तो महिलाओं को अच्छी तरह से व्यवहार करना चाहिए।
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पुलिस की इन गाइडलाइंस का विरोध शुरू

kolkatta police release 12 point guidelines for save women to sexsual haressment.

पुलिस की तरफ से जारी की गई गाइडलाइंस का विरोध करते हुए एक एनजीओ से जुड़ी अनुराधा कपूर ने कहा यह फरमान पूरी तरह से बकवास है।

समस्या पुरूषों की मानसिकता में है। क्यों नहीं पुरुषों के लिए गाइडलाइंस जारी की जाती है? उनको क्यों नहीं बताया जाता है कि महिलाओं के साथ कैसे व्यवहार करें।

पुलिस महिलाओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी लेने के बजाए, महिलाओं को यह बता रही कि उन्हें भीड़भाड़ वाले परिवहन से सफर न करें। यह पूरी तरह से बकवास है।

क्या उनका कहने का मतलब है कि महिलाएं घर पर ही बैठी रहें। कुछ भी न करें। राज्य सरकार महिलाओं की सुरक्षा के लिए कुछ भी नहीं कर पा रही है। तो अब ऐसी मोरल पुलिसिंग का सहारा ले रही है।

तो फिर क्यों हो जाता है 6 साल की बच्‍ची का रेप?

kolkatta police release 12 point guidelines for save women to sexsual haressment.

फैशन डिजाइनर अगनिमित्रा पॉल ने कहा कि महिलाओं के लिए जारी की गई यह गाइडलाइंस सिर्फ पुलिस द्वारा अपनी जिम्मेदारी से पीछे हट जाना है।

क्या यहां पर तालिबान का शासन चल रहा है? यहां पर कौन निर्णय ‌लेगा कि कौन सी ड्रेस सही है और कौन सी ड्रेस गलत है? बैकलेस टॉप पर बोलते हुए कहा कि हमें मत बताइए कि इस तरह के कपड़ो से लोगों पर प्रभाव पड़ता है।

अगर ऐसा है तो कोई पुरूष छह साल की बच्‍ची और 85 साल की महिला का बलात्कार क्यों कर देता है। जब पुरूष अपने शरीर पर नियंत्रण नहीं कर पाते हैं तो महिलाओं के शरीर पर क्यों बात करते हैं?

पुलिस की तरफ से जारी सलाह में यह भी कहा गया है कि महिलाओं को समूह एक साथ बाहर जाना चाहिए। इससे छेड़छाड़ के मामले में कमी आ सकती है।

दिल्‍ली पुलिस भी जारी कर चुकी है ऐसी गाइडलाइंस

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इस बात पर टिप्‍पणी करते हुए शाश्वती कालेज की शिक्षिका और महिलाओं के अधिकारों के लिए लड़ने वाली शाश्वती घोष ने कहा कि दिल्‍ली पुलिस ने भी कुछ साल पहले इसी तरह की गाइडलाइंस जारी की थी।

और अब यहां पर भी ऐसा की ही किया गया है। यह बहुत ही निराशाजनक बात है। महिलाओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी लेने के बजाय, अब इस जिम्मेदारी को महिलाओं पर ही डाल दिया गया है।

डिप्टी कमिश्नर(डीडी) कांकर प्रसाद बरूई जिन्होंने इस गाइडलाइंस पर हस्ताक्षर किए थे, उनका कहना कि इस गाइडलाइंस को जारी करने का मतलब लिंग भेदभाव नहीं है। यह गाइडलाइंस सभी के लिए हैं। इन गाइडलाइंस को सही तरीके से नहीं समझा गया है। बरूई ने कहा कि उन्हें नहीं मालूम है कि इन गाइडलाइंस को वापस ले लिया गया है।

उन्होंने कहा कि पुलिस की तरफ से और बिदुंओं पर भी सलाह दी गई थी। पर इस बात को नहीं बताया गया है। इस गाइडलाइंस में महिलाओं से यह भी कहा गया है कि अपने मोबाइल में आपातकालीन स्पीड डायल नंबर होन चाहिए। साथ ही सेल्फ डिंफैस का अभ्यास और पेप्पर स्प्रे को साथ में लेकर चलने की बात भी कही गई है।

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