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खतराः भूकंप के बाद अब पानी में घुल रहा जहर

Thu, 14 May 2015 02:13 PM IST
टीम डिजिटल / अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल / अमर उजाला, दिल्ली Updated Thu, 14 May 2015 02:13 PM IST
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Kolkata’s arsenic levels to rise after Nepal earthquake

25 अप्रैल को नेपाल में आए विनाशकारी भूकंप के बाद अब पानी में जहर घुलने की आशंका है जो कि आपकी सेहत पर भारी पड़ सकता है। नेपाल भूकंप के बाद वैज्ञानिकों ने अब पानी में आर्सेनिक जहर घुलने की बात कही है।

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चीन के बीजिंग वैज्ञानिकों की पांच सदस्यों की एक टीम के एक खुलासे के बाद कोलकाता में भी पानी में काफी मात्रा में आर्सेनिक पाया गया है। इसको लेकर अब वैज्ञानिकों में चिंता और लोगों में दहशत है।

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भूकंप के बाद पैदा हुआ खतरा

Kolkata’s arsenic levels to rise after Nepal earthquake

हिंदुस्तान टाइम्स की खबर के मुताबिक वैज्ञानिकों की एक टीम ने कोलकाता शहर के कई हिस्सों का अध्ययन किया। जिसमें पाया कि शहर के कई हिस्सों में पानी में आर्सेनिक रासायनिक पदार्थ की मात्रा बढ़ रही है। वैज्ञानिकों ने शहर के कई हिस्सों में पानी में मौजूद आर्सेनिक की मात्रा बढ़ने की संभावना जताई है। इस बारे में चीन के बीजिंग की एक वैज्ञानिक टीम ने इस बारे में शोध कर आगाह भी किया है।

मालूम हो कि 2008 में चीन के सिचुआन में आए भूकंप के बाद बीजिंग की वैज्ञानिक टीम ने पाया कि चीन के देयांग और गुयांग्यांग में काफी गुना पानी में आर्सेनिक की मात्रा बढ़ गई। इसके बाद लोगों ने लंबे समय तक यहां भूमिगत जल के उपयोग करने के बजाय खरीदकर पानी पिया।

आर्सेनिक की चपेट में 144 में 80 वार्ड

Kolkata’s arsenic levels to rise after Nepal earthquake

राज्य आर्सेनिक टॉस्क फोर्स के अध्यक्ष केजी नाथ का कहना है कि वाकई में दिलचस्प है। लेकिन यहां आर्सेनिक की मात्रा अस्‍थाई तौर पर बढ़ी है। निश्चित तौर पर इस पर शोध करने की आवश्यकता है।

जाधवपुर विवि के स्‍कूल ऑफ इनवायरमेंट स्टडी के दीपांकर चक्रवर्ती का कहा है कि जब नदियां अपना रूख या रास्ता बदल लेती हैं तब भी भूमि में आर्सेनिक की मात्रा छोड़ देते हैं, और इस कारण भी भूमिगत जल में आर्सेनिक की मात्रा बढ़ने की संभावना बढ़ जाती है। उन्होंने बताया कि सबसे पहले 1993 में कोलकाता में आर्सेनिक मिला।

अभी हाल ही में कोलकाता में 144 में से 80 वार्ड आर्सेनिक की चपेट में हैं। साऊथ कोलकाता इलाके में एक लीटर में करीब 10 माइक्रोग्राम्स आर्सेनिक पाया गया है। जाधवपुर और विक्रम गढ़ समेत आस-पास के इलाकों में काफी मात्रा में आर्सेनिक पाया गया है। एक लीटर में करीब 199 माइक्रोग्राम्स आर्सेनिक मिला है। लेकिन अब वैज्ञानिकों को ये चिंता है कि कैसे दुबारा आर्सेनिक की मात्रा कम होगी।

ये हैं खतरे
पानी में आर्सेनिक की मात्रा बढ़ने से त्वचा केंसर, किडनी का केंसर, मधूमेय और प्रजनन संबधि बीमारियां हो सकती हैं।

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