बीजेपी बेच रही है सस्ती सब्जियां
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चुनाव का मौसम जैसे-जैसे नज़दीक़ आ रहा है, पार्टियों की ओर से जनता को लुभाने की नई-नई कोशिशें भी वैसे-वैसे सामने आ रही हैं। वोटरों को ललचाने के लिए कहीं लैपटॉप या टैबलेट बाँटने का वादा हो रहा है तो कहीं लालच देने के लिए सब्ज़ियों का भी इस्तेमाल हो रहा है।
केंद्र की गद्दी पर आंखें लगाए बैठी भाजपा ने अपने लोकसभा चुनाव अभियान के तहत महानगर में स्टॉल लगाकर इन चीजों को दस साल पहले यानी 2004 की कीमतों पर बेच रही है।
वैसे, यह स्थाई व्यवस्था नहीं है, लेकिन आख़िर पार्टी दस साल पहले की कीमत पर यह चीजें क्यों बेच रही है? भाजपा के प्रवक्ता रीतेश तिवारी कहते हैं, ''हमारा यह सांकेतिक प्रयास दिन दूनी-रात चौगुनी बढ़ती महंगाई के ख़िलाफ़ है।''
महंगाई पर काबू
वह कहते हैं कि केंद्र में एनडीए सरकार के कार्यकाल में हरी सब्ज़ियों और दूसरी ज़रूरी चीजों की कीमतें काफ़ी कम थीं, लेकिन उसके बाद कीमतें लगातार बढ़ी हैं।
पार्टी की दलील है कि 2009 के आम चुनाव में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सत्ता में आने की स्थिति में सौ दिनों के भीतर महंगाई पर अंकुश लगाने की बात कही थी। रीतेश कहते हैं, ''सौ दिन की कौन कहे, अब तो पूरा कार्यकाल ही ख़त्म हो गया है, लेकिन महंगाई कम होने के बजाय लगातार बढ़ रही है।''
पार्टी का दावा है कि अगर नरेंद्र मोदी की अगुवाई में केंद्र में उसकी सरकार बनी तो महंगाई पर नकेल कसना पहली प्राथमिकता होगी।
आम लोगों को हो रहा फायदा
सब्ज़ियों का स्टॉल लगाना भले ही भाजपा की राजनीतिक और चुनावी कवायद हो, इससे फ़ायदा तो आम लोगों को ही हुआ है।
27 जनवरी को महानगर के धर्मतल्ला इलाके में लगे स्टॉल पर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष राहुल सिन्हा समेत तमाम नेता मौजूदा बाज़ार दर से एक चौथाई से भी कम कीमत पर सब्ज़ियां बेचते नजर आए।
इसका पता चलते ही आम लोगों ने भी बहती गंगा में हाथ धोते हुए घर के लिए सब्जियां खरीद लीं।
बैंक कर्मचारी नीतीश सेन कहते हैं, ''चार रुपए किलो बैगन और पांच रुपए किलो भिंडी! क्या आज के दौर में आप इसकी कल्पना कर सकते हैं? इसलिए मैंने दो किलो सब्ज़ी ख़रीदी है।''
एक निजी कंपनी में काम करने वाली शुभ्रा दास ने भी दस रुपए किलो के भाव से दो किलो प्याज खरीदी। वह कहती हैं, ''अब भाजपा को भले इसमें अपना भावी सियासी फायदा नजर आता हो, हमें तो इसका तात्कालिक फ़ायदा मिल गया।''
चुनावी चोंचला ज्यादा दिन तक नहीं चल सकता
वैसे, भाजपा की इस कवायद से स्थानीय दुकानदारों पर कोई खास असर नहीं है। सब्ज़ी विक्रेता धीरेन मंडल कहते हैं, ''यह सब चुनावी कवायद है। जेब से पैसा लगा कर कोई घाटा सह कर कितनी सब्जी बेच सकता है? आखिर लोग हमारे पास ही आएँगे।''
एक अन्य दुकानदार मनोज दास कहते हैं, ''यह चुनावी चोंचले ज्यादा दिनों तक नहीं चल सकते।''
लेकिन भाजपा को इसे ज्यादा दिनों तक चलाना भी नहीं है। रीतेश कहते हैं, ''हमारा यह कदम तो सांकेतिक है। इससे आम लोगों को समझ में आ जाएगा कि मोदी की सरकार बनने पर उनको महंगाई से काफ़ी हद तक राहत मिल सकती है।''
पांच फ़रवरी को नरेंद्र मोदी की रैली
महानगर में पांच फ़रवरी को अपने प्रधानमंत्री पद के दावेदार नरेंद्र मोदी की रैली के लिए भाजपा ने बड़े पैमाने पर प्रचार अभियान शुरू किया है। इसके लिए ऑनलाइन बुकिंग तो बहुत पहले ही शुरू हो गई थी।
रैली के लिए कभी रन फ़ॉर मोदी का आयोजन किया जा रहा है तो कभी हस्ताक्षर संग्रह अभियान चलाया जा रहा है। रैली के प्रचार के लिए हुगली नदी का भी जम कर इस्तेमाल हो रहा है।
बड़ी-बड़ी नौकाओं पर रैली के बैनर लगा कर घुमाए जा रहे हैं। पार्टी का दावा है कि इस रैली में जुटने वाली भीड़ पिछले सभी रिकॉर्ड ध्वस्त कर देगी।