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जानिए कैसे रची गई मनमोहन सिंह को फंसाने की साजिश?

Sat, 30 May 2015 09:14 AM IST
Updated Sat, 30 May 2015 09:14 AM IST
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पूर्व कोयला सचिव एचसी गुप्ता ने तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से इस तथ्य को छिपाया था कि झारखंड सरकार ने विनी आयरन एंड स्टील उद्योग लिमिटेड (वीआईएसयूएल) को कोयला ब्लॉक आवंटित करने की सिफारिश नहीं की थी। सीबीआई ने अदालत के समक्ष उक्त तथ्य रखते हुए कहा कि सभी आरोपियों के खिलाफ अभियोग तय करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य हैं।

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पटियाला हाउस स्थित सीबीआई के विशेष न्यायाधीश भरत पराशर के समक्ष सीबीआई के अधिवक्ता ने जिरह करते हुए कहा कि सभी शीर्ष अधिकारी को पता था कि राज्य सरकार ने वीआईएसयूएल को कोयला ब्लॉक की सिफारिश नहीं की थी, बावजूद इसके आरोपी गुप्ता ने प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजी गई फाइल नोटिंग में इसका जिक्र नहीं किया। प्रधानमंत्री के पास ही उस समय कोयला मंत्रालय की भी जिम्मेदारी थी।

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झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा और अन्य आरोपी

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मामला झारखंड में राजहरा उत्तरी कोयला ब्लॉक के कोलकाता स्थित वीआईएसयूएल को ब्लॉक आवंटन में कथित अनियमितता से जुड़ा है, जिसमें गुप्ता, झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा और अन्य आरोपी हैं।

सीबीआई की और से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता वीके शर्मा ने अदालत को बताया कि गुप्ता ने जो फाइल कोयला मंत्री को भेजी उसमें इस बात को नहीं दर्शाया कि वीआईएसयूएल की सिफारिश राज्य सरकार ने नहीं की है।

लेकिन झारखंड के तत्कालीन मुख्य सचिव और मामले में आरोपी एके बसु ने जांच समिति की बैठक में इस बात पर जोर दिया था कि वीआईएसयूएल को ब्लॉक दिया जाना चाहिए।

कोयला मंत्रालय से इस तथ्य को छिपाया

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उन्होंने कहा कि गुप्ता ने फाइल में इस तथ्य का हवाला नहीं दिया न ही कोयला मंत्रालय को भेजे नोटिंग में इसका जिक्र किया। उन्होंने कोयला मंत्रालय से इस तथ्य को छिपाया। पूर्व कोयला सचिव ने 27 मई को अपनी दलील में कहा था कि कोयला मंत्री के नाते मनमोहन सिंह के पास ही कोयला ब्लॉक आवंटन के अधिकार थे।

सीबीआई ने कहा कि कोड़ा, बसु तथा दो अन्य आरोपियों ने अन्य के साथ साठगांठ कर वीआईएसयूएल का पक्ष लिया। इस तथ्य के बावजूद कि राज्य सरकार ने शुरू में दो अन्य कंपनियों की सिफारिश की थी, अधिकारियों ने वीआईएसयूएल का पक्ष लिया। जांच एजेंसी के अनुसार जांच समिति की बैठक में भाग लेने वाले बसु ने जोर दिया कि कोयला ब्लाक आवंटन के लिये वीआईएसयूएल की सिफारिश की जानी चाहिए।

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