{"_id":"6efb8b5c-1997-11e2-8947-d4ae52bc57c2","slug":"know-what-is-lavasa-project","type":"story","status":"publish","title_hn":"जानिए, क्या है लवासा प्रोजेक्ट","category":{"title":"India News Archives","title_hn":"इंडिया न्यूज़ आर्काइव","slug":"india-news-archives"}}
जानिए, क्या है लवासा प्रोजेक्ट
विजय जैन/नई दिल्ली
Updated Fri, 19 Oct 2012 08:24 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लवासा महाराष्ट्र में पुणे शहर से करीब 70 किलोमीटर दूर पश्चिमी घाट की खूबसूरत वादियों में बन रही पहली प्लान हिल सिटी है। दावा किया जा रहा है कि ये शहर शिमला, नैनीताल, दार्जिलिंग और मसूरी जैसे हिल स्टेशनों को भी खूबसूरती में पीछे छोड़ देगा।
विज्ञापन
100 स्क्वायर किलोमीटर में फैले औऱ 50 अरब की लागत से बनाए जा रहे इस हिल स्टेशन में जहां आलीशान 5 स्टार होटल होंगे, वहीं ऑक्सफोर्ड जैसी जानी मानी यूनिवर्सिटी का एक नया सेंटर भी यहां बनेगा। मॉल, बाज़ार, थिएटर और झील सब के सब स्विटजरलैंड की तर्ज पर यहां तैयार किए जा रहे हैं, लेकिन केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय को इस खूबसूरती के पीछे खामियां भी नज़र आ रही हैं।
विज्ञापन
मंत्रालय ने कहा था, 'लवासा प्रोजेक्ट 'पर्यावरण प्रभाव मूल्यांकन' की अधिसूचना का उल्लंघन करता है। वहां निर्माण अनाधिकृत है और इससे पर्यावरण को नुकसान हुआ है।' लवासा जैसे बड़े हिल स्टेशन के प्रोजेक्ट को शुरू करने के लिए पर्यावरण अनुमति सबसे अहम होती है। प्रोजेक्ट के लिए यह अनुमति देने का अधिकार सिर्फ केंद्र सरकार के पास है। हालांकि मंत्रालय ने ये भी कहा था कि जुर्माना लगाने, 'पर्यावरण उत्थान फ़ंड' का गठन करने, 'विस्तृत पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन' करने और एक प्रबंधन योजना बनाए जाने के बाद वो लवासा प्रोजेक्ट पर विचार कर सकता है।
विज्ञापन
वहीं, मंत्रालय की इस प्रतिक्रिया पर 'लवासा' का बयान आया था कि पर्यावरण मंत्रालय का ये फ़ैसला पर्यावरण मुद्दों के बजाय अधिकार-क्षेत्र पर आधारित है। लवासा शहर के लिए केंद्र सरकार की अनुमति की ज़रूरत नहीं है। प्रोजेक्ट को राज्य सरकार से सभी अनुमतियां मिली हुई है। मंत्रालय ने उसके द्वारा पर्यावरण सुरक्षा संबंधी जमा करवाए गए आंकड़ों को कोई वज़न नहीं दिया है। कंपनी लवासा के दौरे पर गई। मंत्रालय की टीम पर छोटी ग़लतियों को बढ़ा-चढ़ा कर पेश करने और पर्यावरण के लिए किए गए काम को नज़रअंदाज़ करने का आरोप लगाया था।
सीएजी की रिपोर्ट में लवासा पर उठे थे सवाल
लवासा प्रोजेक्ट पर इसी साल 17 अप्रैल को सीएजी ने रिपोर्ट जारी की थी। सीएजी रिपोर्ट में ये खुलासा हुआ था कि लवासा प्रोजेक्ट में नियमों का पालन नहीं हुआ है। लवासा प्रोजेक्ट के तहत निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाने की कोशिश की गई। कृषि मंत्री शरद पवार के लवासा प्रोजेक्ट का समर्थन करने की बात सीएजी रिपोर्ट में सामने आई। सीएजी रिपोर्ट के मुताबिक अगर एकसमान पॉलिसी होती तो कई और हिल स्टेशन बन सकते थे।