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जानिए, सज्जन सिंह के नाम कौन से हैं तीन रिकार्ड
नई दिल्ली/अखिलेश कुमार/विनोद डबास
Updated Wed, 01 May 2013 12:54 AM IST
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सांसद चुनने के दौरान सज्जन कुमार के नाम तीन रिकार्ड दर्ज हैं। वर्ष 1980 में बाहरी दिल्ली से कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर मात्र 35 वर्ष की आयु में उन्हें सांसद बनने का गौरव प्राप्त हुआ था।
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उन्होंने दिल्ली के प्रथम मुख्यमंत्री और उस समय केंद्रीय मंत्री चौधरी ब्रह्मप्रकाश को हराया था।
खास बात यह कि दिल्ली में वर्ष 1980 से पहले सबसे कम उम्र में सांसद बनने का रिकार्ड चौधरी ब्रह्मप्रकाश के नाम दर्ज था। वह 39 वर्ष की आयु में वर्ष 1957 में सदर से सांसद बने थे।
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वहीं, सज्जन के नाम देशभर में लोकसभा चुनाव में सबसे अधिक मत पाने का रिकार्ड है। इसके अलावा दिल्ली से सबसे अधिक मतों से चुनाव जीतने का रिकार्ड भी उनके ही नाम दर्ज है।
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उन्होंने यह दोनों रिकार्ड वर्ष 2004 के लोकसभा चुनाव में साहिब सिंह वर्मा को हराकर बनाए थे। उन्हें आठ लाख से अधिक मत मिले थे और वे ढाई लाख से अधिक मतों से जीते थे।
सज्जन सिंह का राजनीतिक ग्राफ
सज्जन कुमार का राजनीतिक ग्राफ और रुतबा दिल्ली में वर्ष 1977 से 1980 तक तेजी से बढ़ा।
उन्हें पार्षद से सीधे सांसद का टिकट मिला और पूर्व मुख्यमंत्री चौधरी ब्रह्मप्रकाश को हराकर संसद पहुंचे, लेकिन 1984 में इंदिरा गांधी की मौत के बाद हुए दंगों की आंच ने उसी साल हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने सिख वोट बचाने के लिए आरोपी सज्जन कुमार का टिकट काट दिया।
फिर वर्ष 1989 में भी टिकट कटा लेकिन 1991 में बाहरी दिल्ली संसदीय क्षेत्र से फिर टिकट मिला और विजयी हुए।
राजधानी में सिख दंगों को लेकर राजनीतिक पार्टियां एक-दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप करती रहीं। बाहरी दिल्ली में सज्जन को 1996 के चुनाव में भाजपा के वरिष्ठ नेता कृष्णलाल शर्मा के हाथों हार का सामना करना पड़ा।
इस बीच 1993 में दिल्ली विधानसभा चुनाव हुए तो सज्जन कुमार के कई राजनीतिक साथी विधानसभा में चुनकर आ गए।
दिल्ली की अलग-अलग अदालतों में चल रहे सिख दंगा मामलों को लेकर गरमाई राजनीति व सिख विरोध के बीच 1998 और फिर 1999 में हुए लोकसभा चुनाव में फिर से उनका टिकट कटा लेकिन बाहरी दिल्ली में रुतबा नहीं घटा और कांग्रेस ने वर्ष 2004 में फिर से लोकसभा का टिकट सज्जन कुमार को दिया।
इस बार वे भाजपा के प्रत्याशी साहिब सिंह वर्मा को हराकर तीसरी बार संसद पहुंचे।
लंबे राजनीतिक कैरियर के बीच 2009 में कांग्रेस ने फिर टिकट दिया लेकिन केंद्रीय गृहमंत्री पर जूता उछालने की घटना के बाद मचे बवाल में कांग्रेस ने टिकट वापस ले लिया।
हालांकि, बाहरी दिल्ली में दबदबे के कारण टिकट उनके छोटे भाई रमेश कुमार को दी गई और वह जीतकर संसद भी पहुंचे। अब सिख दंगे के एक मामले में बरी होने के बाद लोकसभा चुनाव 2014 में फिर से सज्जन कुमार की दावेदारी मजबूत मानी जा रही है।
हालांकि इस बीच 68 वर्षीय सज्जन कुमार के बेटे जगप्रवेश ने भी सक्रिय राजनीति में भागीदारी शुरू कर दी है।