कैसे आएंगे मुसलमानों के अच्छे दिन?
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मोदी सरकार देश भर में फैली वक्फ की अकूत संपत्तियों का बेहतर व्यावसायिक इस्तेमाल कर मुसलमानों के लिए अच्छे दिन लाने की तैयारी कर रही है।
सरकार की योजना वक्फ संपत्तियों को विकसित करने के बाद इनका व्यावसायिक इस्तेमाल कर सालाना 12 हजार करोड़ रुपये जुटाने की है। इस राशि से मुसलिम समुदाय की आर्थिक बेहतरी के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं शुरू करने की है।
अल्पसंख्यक मंत्रालय ने अपने पहले सौ दिन के एजेंडे में वक्फ संपत्तियों को विकसित करने और इसका व्यावसायिक इस्तेमाल बढ़ाने की योजना को पहली प्राथमिकता दी है।
संसद के नए सत्र में मिलेगी मंजूरी
मंत्रालय की योजना हाल ही में स्थापित नेशनल वक्फ डेवलपमेंट कार्पोरेशन (नवाडको) के माध्यम से इसके लिए एक बड़ा अभियान छेड़ने की है।
इस योजना में कोई अड़चन न आए इसलिए मंत्रालय की योजना आगामी 7 जुलाई से शुरू हो रहे संसद के सत्र में राज्यसभा की स्थायी समिति के पास विचाराधीन वक्फ संपत्ति बिल 2014 को हर हाल में कानूनी जामा पहनाने की है।
बीते मंगलवार को सेंट्रल वक्फ काउंसिल की बैठक में भी अल्पसंख्यक मामलों की मंत्री नजमा हेपतुल्ला ने सदस्यों से नई सरकार की इस योजना पर विस्तार से चर्चा की।
12,000 करोड़ रुपए की मुहिम
नई सरकार की योजना देश भर में फैली वक्फ संपत्तियों का बेहतर और व्यापक व्यावसायिक इस्तेमाल कर सालाना 12 हजार करोड़ रुपये जुटाने की है।
हेपतुल्ला ने अपने मंत्रालय के पहले सौ दिन के एजेंडे में इस योजना को पहले नंबर पर रखा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मंत्रालय के पहले सौ दिन के एजेंडे पर हुई चर्चा में हेपतुल्ला ने वक्फ की देश भर में फैली अकूत संपत्ति की जानकारी देकर इस योजना को शुरू करने का जिक्रकिया।
उल्लेखनीय है कि वक्फ के पास देश भर के प्रमुख शहरों में 6 लाख एकड़ जमीन है। प्रमुख स्थानों पर जमीन होने के बावजूद इसका व्यावसायिक इस्तेमाल रणनीति के तहत नहीं किया जा रहा है। इसके अलावा वक्फ संपत्तियों पर अवैध कब्जा एक अलग समस्या है।
बहरहाल मंत्रालय की योजना अवैध कब्जों को हटाने के लिए 7 जुलाई से शुरू हो रहे संसद के सत्र में वक्फ संपत्ति बिल को पारित कराने की है। हालांकि इससे पहले ही नवाडको संपत्तियों के विकास और व्यवसायीकरण की योजना पर काम शुरू कर देगा।
राशि का सर्वाधिक इस्तेमाल शिक्षा के क्षेत्र में होगा
मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक इस मद से प्राप्त रकम का सर्वाधिक इस्तेमाल शिक्षा के क्षेत्र में करने की योजना है। खासतौर से मदरसों के आधुनिकीकरण योजना में कंप्यूटर शिक्षा के लिए इस राशि का इस्तेमाल किए जाने की तैयारी है।