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जानिए, सदन में कैसे बदला एफडीआई का गणित
नई दिल्ली/ब्यूरो
Updated Thu, 06 Dec 2012 07:37 AM IST
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सुषमा स्वराज ने अपने भाषण में सरकार की पोल खोलते हुए कहा कि रिटेल में एफडीआई के मामले में सचाई यह है कि इसके पक्ष में केवल चार पार्टियों (कांग्रेस, आरजेडी, एनसीपी, आरएलडी,) ने ही बात रखी, जबकि बहस में सभी ने 18 पार्टियों के लोगों को इसके विरोध में बातें कहते देखा है। इसे आधार मानें तो सरकार सदन में विश्वास खो चुकी है।
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रिटेल एफडीआई का समर्थन करने वाली पार्टियों के सदस्यों की कुल संख्या केवल 224 है, जबकि एफडीआई का विरोध कर रही पार्टियों के सदस्यों की संख्या 284 है। केवल निहित स्वार्थों के कारण कुछ दलों ने सरकार को बचाया है।
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संसद की हकीकत
नियम 184 के तहत बहस के बाद रिटेल में एफडीआई लाने पर हुई वोटिंग में सरकार जीत गई। सरकार का फ्लोर मैनेजमेंट यहां जबर्दस्त रूप से कामयाब दिखा। इस प्रकार साफ हुआ कि इस मुद्दे पर सब कुछ पहले से तय था। राजनीतिक दलों की कथनी और करनी का फर्क साफ नजर आया।
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सरकार के पास सदन में भले ही बहुमत का 272 का आंकड़ा नहीं है, लेकिन सपा और बसपा समेत सदन से 70 सांसद वोटिंग में अनुपस्थित रहे। ऐसे में कुल 471 वोटों में से सरकार (रिटेल एफडीआई) के पक्ष में 253 वोट पड़े और इसके विरोध में आए प्रस्ताव को मात्र 218 वोट प्राप्त हुए।
सुषमा के तीखे तीर
- दिल्ली में नहीं जगह : दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित कहती हैं कि वॉलमार्ट सबसे पहले दिल्ली में खुलेगा। वहीं कपिल सिब्बल कहते हैं कि चांदनी चौक में जगह नहीं है, इसे एनसीआर में लगाएंगे।
- बड़ी गाड़ी वालों के लिए : सिब्बल साहब कहते हैं कि वॉलमार्ट में स्कूटर-बाइक वाले नहीं जाएंगे। बड़ी-बड़ी गाड़ियों वाले यहां खरीदारी करेंगे। ऐसे में आम आदमी के हितों का दावा झूठा है। सच यह है कि सरकार बात आम आदमी की करती है लेकिन नीतियां बड़ी-बड़ी गाड़ियां चलाने वालों के लिए बनाती है।
- मिलेंगे दो घाटे वाले : एक तरफ हमारी अर्थव्यवस्था की गति धीमी पड़ रही है और सरकार राजकोषीय घाटे की बात करती है, दूसरी तरफ विश्व मंदी के कारण वॉलमार्ट की भी हालत खराब है। वह घाटे में है। अब जब वॉलमार्ट भारत में आएगा तो एक घाटे वाला दूसरे घाटे वाले को कैसे उबारेगा?
- लालू सुनें : लालूजी आपने मेरे ऊपर एक जुगाड़ू शेर पढ़ा था। मैं उसका जवाब उसी तरह के एक शेर से देना चाहती हूं : आपको गांठें खोलना नहीं आता और मसखरी के अलावा कुछ बोलना नहीं आता। उल्लेखनीय है कि लालू यादव ने अपने भाषण में सुषमा को संबोधित करते हुए कहा था : मोहब्बत में तुम्हें आंसू बहाना नहीं आता/बनारस आके बनारस का पान खाना नहीं आता।
- दो फुट का आलू : कांग्रेस के भूपिंदर हुड्डा खुद के किसान पुत्र होने की बात करते हैं। लेकिन मैकडोनाल्ड को दो फुट का आलू पैदा करके देने का दावा करते हैं, जबकि लौकी भी ढंग से दो फुट की नहीं होती।
- सदियों ने सजा पाई : सुषमा ने अपने भाषण में सरकार को भविष्य को देख कर कोई भी फैसला लेने की बात कही और यह शेर पढ़ा : तारीख की आंखों ने वो हाल भी देखा है/लम्हों ने खता की थी सदियों ने सजा पाई।
आज राज्य सभा में बहस
- लोकसभा के जीत के बाद सरकार आत्मविश्वास से भरी है। उच्च सदन राज्यसभा में रिटेल में एफडीआई पर बृहस्पतिवार को बहस होगी। यहां सरकार का अंक गणित कमजोर है, लेकिन उसे भरोसा है कि यहां भी वह राह निकाल लेगी। बहस के बाद सात दिसंबर को राज्यसभा में वोटिंग हो सकती है।
जो तटस्थ हैं
- शरद यादव ने अपने भाषण में विदेशी किराना के मुद्दे पर सदन में कुछ बोलने और बाद में कुछ और करने वालों को चेतावनी दी। उन्होंने राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की कविता का अंश पढ़ा : समर शेष है, नहीं पाप का भागी केवल व्याघ्र/जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध।