मोदी सरकार जनता के लिए ला रही ये खास योजना
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केन्द्र सरकार सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार लाने के लिए एक कदम और आगे बढ़ा रही है। सरकार सीटी-स्कैन, एक्स-रे और खून की जांच को मुफ्त कर सकती है।
इस के लिए यदि आवश्यकता पड़ी तो प्राइवेट डाइग्नोस्टिक केंद्रों को भी इस योजना से जोड़ा जाएगा। विशेषज्ञों द्वारा मुफ्त जांच उपलब्ध कराने वाली इस योजना का स्वागत किया गया है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों और स्वास्थ्य अर्थशास्त्रियों ने कहा है कि प्राइवेट सेक्टर के द्वारा की जाने वाली जांचे मंहगी और बेअसर होती हैं।
इलाज का खर्च नहीं सहन कर पाते लोग
दवा और परीक्षण ज्यादा मंहगे होने की वजह से लोग उसका खर्च नहीं उठा पाते।
भारत में हर साल 5 करोड़ लोग गरीबी रेखा के नीचे चले जाते हैं क्योंकि उनकी कुल आमदनी 70 प्रतिशत दवा और संबंधित रोग के जांच में ही खर्च हो जाता है।
सरकार द्वारा प्रस्तावित योजाना का उद्देश्य यही है कि गांव के सामुदियक अस्पताल से लेकर जिले तक के अस्पताल में लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सके।
ये जांच होंगे मुफ्त
सरकार ने अभी उन जांचों को अपनी सूची में शामिल कया है जिसकी जरूरत आम तौर पर पड़ती है। लोगों को मुफ्त जांच उपलब्ध कराने की योजना में डायबटीज के लिए खून और पेशाब जांच, लीवर और किडनी की जांच, डेंगू और मलेरिया में होने वाले ब्लड टेस्ट शामिल है।
एचआईवी जांच तथा एक्स रे और सीटी- स्कैन भी इस योजना के अंतर्गत मुफ्त सेवा में आएंगे। इस योजना के लिए विशेषज्ञों का एक पैनल, सरकार के साथ मिल कर इस पर काम कर रहा है कि कौन से रोगों के जांच को इस श्रेणी में शामिल किया जाए।
स्वास्थ्य मंत्रालय इस संबंध में डायग्नोस्टिक सेक्टर में काम करने वाली कंपनियों से भी सलाह मशविरा कर रहा है। सरकार चाहती है कि जहां इस योजना से लोगों का स्वास्थ्य व्यय कम से कम हो।
लेकिन अर्थशास्त्री खड़े कर रहे हैं योजना पर सवाल!
इस योजना के अंतर्गत सरकार डाइग्नोस्टिक सेक्टर के मौजूदा बुनियादी ढांचे को मजबूत करना चाहती है, वहीं यह भी प्रयास करेगी कि जहां फिलहाल कोई बुनियादी ढांचा मौजूद नहीं है।
वहां भी राज्य सरकारों की मदद की जाएगी कि वे प्राइवेट सेक्टर के साथ मिल कर खून के नमूने लेने तथा उनके परीक्षण और उनकी रिपोर्टिंग कर सकने में सक्षम हों।
इस योजना के संबंध में स्वास्थ्य अर्थशास्त्री शक्तिवेल शेल्वराज संदेहपूर्ण नजरिए में कहना है कि एक तरफ तो सरकार ने स्वास्थ्य बजट घटा दिया है और इस योजना के लिए बजट में कोई राशि आवंटित नहीं की गई है तो अतिरिक्त संसाधन आएंगे कहां से?
आउटसोर्सिंग केवल खर्चे बढ़ाता है
शिवशक्ति का कहना है कि सरकार इस योजना को आउटसोर्सिंग के माध्यम से सफल बनाएगी लेकिन तमिलनाडु और राजस्थान में ऐसी ही योजना बिना आउटसोर्सिंग के बेहतर तरीके से चल रही है।क्या सरकार इस मॉडल को आगे नहीं बढ़ा सकती?
उन्होंने आगे यह भी जोड़ा की आउटसोर्सिंग का मॉडल बिहार और छत्तीसगढ़ सरीखे राज्यों में फेल हो चुका है तो आखिर सरकार उसे आगे क्यों बढ़ा रही है? आउटसोर्सिंग केवल खर्चे को बढ़ा देता है।
वहीं कुछ विशेषज्ञों की राय है कि आउटसोर्सिंग एक बेहतर रास्त है। उन्होंने एम्बुलेंस सेवा का उदाहरण देते हुए कहा कि बिना आउटसोर्सिंग के यह योजना सरकार के लिए पूरे देश में चलाना संभव ही नहीं था। ठीक इसी तरह लेबोरेट्री और डाइग्नोस्टिक जांचो के लिए भी चुनिंदा आउटसोर्सिंद करने की जरूरत है जो इस योेजना को आगे ले जा सके।