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जानिए, मुंबई के डांस बार के बारे में सबकुछ
मुंबई/इंटरनेट डेस्क
Updated Wed, 17 Jul 2013 01:25 AM IST
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मुंबई में डांस बार शुरू होने की घटना भी काफी रोचक है। करीब 43 साल पहले
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मुंबई में डांस बार का चलन शुरू हुआ। शुरू में डांस नहीं होते थे।
1970 की शुरुआत में महाराष्ट्र के गरीब खेतिहर इलाकों से आने वाली युवतियों पर बार के मालिकों की नजर पड़ी और उन्होंने इन युवतियों को अपने यहां शराब परोसने के लिए रखना शुरू किया।
इसे ‘वेटर सर्विस’ नाम दिया गया। ये ‘साइलेंट बार’ थे। बाद में कुछ ने अपने यहां ऑर्केस्ट्रा सर्विस शुरू कर दी।
जब फिल्मों में आइटम नंबर जैसे गाने आने लगे तो बारों ने अपने यहां गायिकाओं के साथ ऐसी लड़कियां भी रख लीं जो उत्तेजक कपड़े पहन कर नाच सकें।
1984 में महाराष्ट्र में पंजीकृत बारों की संख्या मात्र 24 थी, लेकिन 2005 में इनकी संख्या 1500 के करीब पहुंच गई, इनमें से अकेले मुंबई में 700 बार थे।
वो भी मेहनत करती हैं...
लोग बार गर्ल्स को अच्छी नजरों से नहीं देखते, लेकिन वे तो उसी तरह मेहनत से अपनी रोजी रोटी कमाती हैं जैसे बाकी लोग। महाराष्ट्र सरकार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में लड़ाई जीतने वाली बार गर्ल्स को बधाई।
-पूनम पांडे, फेसबुक पर
बार सिंगर से बॉलीवुड तक
- शगुफ्ता रफीक बॉलीवुड में ऐसा नाम है, जिसने मुंबई और दुबई के बारों में काम करने से लेकर फिल्में लिखने तक का सफर तय किया है। शगुफ्ता इस समय महेश भट्ट की विशेष फिल्म्स की प्रमुख स्क्रिप्ट राइटर हैं। वो लम्हे (2006) से लेकर हाल में आई आशिकी-2 तक शगुफ्ता करीब एक दर्जन फिल्में लिख चुकी हैं।
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बढ़ेगा पुलिस का सिरदर्द
- डांस बार पुन: खोलने के फैसले से महाराष्ट्र पुलिस के सिरदर्द में बढ़ोतरी निश्चित है। पुलिस मानती है कि डांस बार अनैतिक कामों, गोलीबारी की घटनाओं और अंडरवर्ल्ड का अड्डा बन जाती हैं।
1970 की शुरुआत में महाराष्ट्र के गरीब खेतिहर इलाकों से आने वाली युवतियों पर बार के मालिकों की नजर पड़ी और उन्होंने इन युवतियों को अपने यहां शराब परोसने के लिए रखना शुरू किया।
इसे ‘वेटर सर्विस’ नाम दिया गया। ये ‘साइलेंट बार’ थे। बाद में कुछ ने अपने यहां ऑर्केस्ट्रा सर्विस शुरू कर दी।
जब फिल्मों में आइटम नंबर जैसे गाने आने लगे तो बारों ने अपने यहां गायिकाओं के साथ ऐसी लड़कियां भी रख लीं जो उत्तेजक कपड़े पहन कर नाच सकें।
1984 में महाराष्ट्र में पंजीकृत बारों की संख्या मात्र 24 थी, लेकिन 2005 में इनकी संख्या 1500 के करीब पहुंच गई, इनमें से अकेले मुंबई में 700 बार थे।
वो भी मेहनत करती हैं...
लोग बार गर्ल्स को अच्छी नजरों से नहीं देखते, लेकिन वे तो उसी तरह मेहनत से अपनी रोजी रोटी कमाती हैं जैसे बाकी लोग। महाराष्ट्र सरकार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में लड़ाई जीतने वाली बार गर्ल्स को बधाई।
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-पूनम पांडे, फेसबुक पर
बार सिंगर से बॉलीवुड तक
- शगुफ्ता रफीक बॉलीवुड में ऐसा नाम है, जिसने मुंबई और दुबई के बारों में काम करने से लेकर फिल्में लिखने तक का सफर तय किया है। शगुफ्ता इस समय महेश भट्ट की विशेष फिल्म्स की प्रमुख स्क्रिप्ट राइटर हैं। वो लम्हे (2006) से लेकर हाल में आई आशिकी-2 तक शगुफ्ता करीब एक दर्जन फिल्में लिख चुकी हैं।
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बढ़ेगा पुलिस का सिरदर्द
- डांस बार पुन: खोलने के फैसले से महाराष्ट्र पुलिस के सिरदर्द में बढ़ोतरी निश्चित है। पुलिस मानती है कि डांस बार अनैतिक कामों, गोलीबारी की घटनाओं और अंडरवर्ल्ड का अड्डा बन जाती हैं।