आलाकमान से बेपरवाह कीर्ति ने साधा जेटली पर निशाना
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दिल्ली सचिवालय में सीबीआई की छापेमारी के बाद अचानक चर्चा में आया डीडीसीए में भ्रष्टाचार के मामले के विवाद ने रविवार को नई ऊंचाई हासिल की। भाजपा आलाकमान के कड़े रुख से बेपरवाह पार्टी सांसद और पूर्व क्रिकेटर कीर्ति आजाद ने रविवार वित्त मंत्री अरुण जेटली के डीडीसीए के अध्यक्ष रहते कई घोटाले होने का दावा किया।
इन घोटालों की जांच सीबीआई, प्रवर्तन निदेशालय और डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यु इंटेलिजेंट से कराने की मांग की। इस दौरान कई विडियो क्लिप्स दिखाए और दावा किया कि जेटली केडीडीसीए के अध्यक्ष रहते फिरोजशाह कोटला स्टेडियम के निर्माण के लिए नि किसी जांच और टेंडर के ठेके दिए गए।
दावा किया गया कि डीडीसीए ने बीसीसीआई से मिलने वाले करोड़ों रुपये में हेराफेरी की। एक पि्रंटर प्रति दिन 3000 रुपये, एक लैपटॉप 16000 रुपये और पूजा की एक थाली 5000 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से किराए पर लिए गए। जिन 14 कंपनियों के नाम पर करोड़ों रुपये के बिलों का भुगतान किया गया, उनके पते और अन्य जानकारियां गलत पाई गई।
दिखाया वीडियो
इस दौरान कीर्ति ने एक पुराना वीडियो भी दिखाया जिसमें वह जेटली से एक बैठक
के दौरान भ्रष्टाचार के मामले में तीखी बहस में उलझे हुए हैं। रविवार शाम
में बुलाई गई बैठक में पूर्व क्रिकेटर बिशन सिंह बेदी भी मौजूद थे। बहरहाल
संसद के शीतकालीन सत्र के जारी रहते कीर्ति के जेटली पर हमले ने विपक्ष को
बड़ा सियासी मौका उपलब्ध करा दिया है।
इससे पहले दिल्ली सचिवालय पर सीबीआई
की छापेमारी के बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने आरोप लगाया
था कि सीबीआई की टीम कोटाला घोटाले से जुड़ी फाइलों के लिए आई थी। इसके बाद
से ही अरसे से जेटली के खिलाफ मोर्चा खोले रखने वाले कीर्ति ने इस मुद्दे
को तूल दे दिया।
प्रेस कांफ्रेंस की शुरुआत करते हुए कीर्ति ने कहा
कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फैन हैं। उनकी लड़ाई किसी के साथ
व्यक्तिगत नहीं बल्कि भ्रष्टाचार के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि मैंने
डीडीसीए में भ्रष्टाचार पर किसी का नाम नहीं लिया है। हालांकि वित्तीय
अनियमितताओं की जानकारी तत्कालीन डीडीसीए अध्यक्ष अरुण जेटली को थी।
DDCA है 'लीगल इंस्टिट्यूट ऑफ करप्शन'
आजाद ने कहा कि डीडीसीए ने कोटला स्टेडियम के निर्माण में धांधली की। बिना
जांच और टेंडर जारी किए ठेके दिए गए। कई फर्जी कंपनियों से करार किए।
इनमें करोड़ों रुपये का भुगतान पाने वाली 14 कंपनियां तो ऐसी थी जिनके नाम
और पते महज कागजों पर थे।
कीर्ति ने कहा कि कॉमनवेल्थ आयोजन की तर्ज पर
डीडीसीए ने एक प्रिंटर के लिए प्रतिदिन के हिसाब से 3000 रुपये, लैपटॉप के
लिए 16000, पूजा की थाली के लिए 5000 रुपये चुकाए। दिसंबर 2008 में
इंजीनियर्स प्रा.लि. को 24 करोड़ का ठेका दिया गया। मगर कुछ दिनों बाद ही
ठेके की रकम को 24 करोड़ से बढ़ा कर 57 करोड़ रुपये कर दिया गया। उन्होंने
कहा कि लाभ हासिल करने वाले चुनिंदा लोग थे।
इन्हें लाभ पहुंचाने के लिए
कंपनियां बदल दी जाती थी। डीडीसीए को लीगल इंस्टिट्यूट ऑफ करप्शन का नाम
देते हुए आजद ने कहा कि इसकी जांच सीबीआई के साथ ही ईडी और डायरेक्टरेट ऑफ
रेवेन्यु इंटेलिजेंट को दी जानी चाहिए। हालांकि इस दौरान कीर्ति ने एक बार
भी जेटली का नाम नहीं लिया। मगर उनके साथ प्रेस कांफ्रेंस कर रहे समीर
बहादुर ने जेटली, नरेंद्र बत्रा, चेतन चौहान सहित 8 लोगों के खिलाफ
भ्रष्टाचार के आरोप लगाए।