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हिंदू को मुस्लिम और मुसलमान को लगेगी हिंदू की किडनी

Mon, 29 Dec 2014 04:51 PM IST
Updated Mon, 29 Dec 2014 04:51 PM IST
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Kidney donation binds hindu and muslim family in Ayodhya

जहां एक ओर उत्तर प्रदेश में राम मन्दिर और घर वापसी के मुद्दे गरमाए हुए हैं, वहीं हिन्दू-मुस्लिम के भेदभाव को मिटाते हुए दो परिवार एक दूसरे की कुछ अलग ही अंदाज में मदद कर रहे हैं। यह मामला है किडनी देने का।

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अयोध्या की ज्योति चौरसिया अमरोहा में रहने वाली किश्वरी जहां के पति नौशाद को अपनी किडनी देने जा रही हैं। वहीं दूसरी ओर, नौशाद की पत्नी किश्वरी ज्योति के ब्रदर इन लॉ रमेश को अपनी किडनी देंगी।
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देखा जाए तो एक-दूसरे के परिवार के व्यक्ति को किडनी देकर ये दोनों ही परिवार सुख-दुख में भागीदार भी बन रहे हैं। ज्योति चौरसिया और किश्वरी जहां ने जात-पात से ऊपर उठकर समाज के सामने एक नया उदाहरण पेश किया है।

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अस्पताल में मिले थे किश्वरी और ज्योति

Kidney donation binds hindu and muslim family in Ayodhya

किश्वरी के पति नौशाद (35) नई दिल्ली के गंगा राम अस्पताल में भर्ती हैं। यहीं पर किश्वरी की मुलाकात ज्योति से हुई। दोनों ही परिवारों में एक-एक पुरुष किडनी फेल होने की समस्या से ग्रस्त हैं। दोनों ने जब एक दूसरे की परेशानी सुनी तो एक-दूसरे की मदद करने की सोची।

जब खून की जांच करवाई गई तो किश्वरी का ब्लड ग्रुप ज्योति के ब्रदर इन लॉ रमेश के ब्लड ग्रुप से मेल खा गया और ज्योति का ब्लड ग्रुप किश्वरी के पति नौशाद से मेल खा गया। जनवरी में दोनों ही परिवारों में किडनी ट्रांसप्लांट की जाएगी।

एक-दूसरे के लिए बने फरिश्ते

Kidney donation binds hindu and muslim family in Ayodhya

25 वर्षीय किश्वरी ने कहा, "मैं अपनी हर नमाज में रमेश चौरसिया और उनके परिवार के लिए दुआएं मांगूंगी। मैं अपने पति के कि़डनी ट्रांसप्लांट के लिए 25 लाख रुपए खर्च नहीं कर सकती थी। जिस मुझे मेरे खुद के परिवार वालों और दोस्तों से भी कोई मदद नहीं मिली, ऐसी स्थिति में अल्लाह ने इस हिंदू परिवार को मेरे पास भेज दिया। इनकी मदद से मेरे पति की जिंदगी बच सकेगी।"

ज्योति कहती हैं कि वह अपने ब्रदर इन लॉ रमेश को और अधिक परेशानी में नहीं देख सकती हैं। वह हर कीमत पर चाहती थीं कि रमेश ठीक हो जाए। ज्योति कहती हैं कि किश्वरी को स्वर्ग से भेजा गया है।

2 साल पहले भी हो चुका है ऐसा

Kidney donation binds hindu and muslim family in Ayodhya

करीब दो साल पहले दिसंबर 2012 में भी ऐसा ही एक उदाहरण देखने को मिला था। गुजरात के वड़ोदरा में रहने वाले एक व्यापरी मयूर गांधी को किडनी की जरूरत थी। हालांकि, उनकी पत्नी किडनी देना चाहती थीं, लेकिन ब्लड ग्रुप मेल न खाने की वजह से ऐसा न हो सका।

आईकेडीआरसी (IKDRC) अस्पताल के डॉक्टरों ने उन्हें एक अन्य व्यक्ति इरफान सिंधिया के बारे में बताया जिसे किडनी की जरूरत थी। डॉक्टरों को पता था कि मयूर की पत्नी का ब्लड ग्रुप इरफान से मेल खाता है और इरफान की मां का ब्लड ग्रुप मयूर से मेल खाता है।

दोनों ही परिवारों को किडनी आपस में बदलने की सलाह दी गई। धर्म और जात-पात की बात से ऊपर उठकर दोनों ही परिवारों ने एक दूसरे परिवार के व्यक्ति को किडनी देने का फैसला किया और भगवान का शुक्रिया अदा किया।

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