{"_id":"f5c3dcac0abd78b2b1e719ef24062a1f","slug":"kidnapped-left-house-for-moustache-in-pakistan","type":"story","status":"publish","title_hn":"मूंछें बनीं मुसीबत, अगवा हुए और जान पर भी बन आई","category":{"title":"India News Archives","title_hn":"इंडिया न्यूज़ आर्काइव","slug":"india-news-archives"}}
मूंछें बनीं मुसीबत, अगवा हुए और जान पर भी बन आई
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
Updated Thu, 08 Aug 2013 03:44 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जहां आमतौर पर बड़ी-बड़ी मूंछें पौरुष व ताकत का प्रतीक मानी जाती हैं और वाहवाही बटोरती हैं वहीं पाकिस्तान में एक शख्स की मूंछें ही उसके लिए मुसीबत बन गईं।
विज्ञापन
पाकिस्तानी व्यापारी मलिक आमिर मोहम्मद खान अफरीदी का उनकी बड़ी-बड़ी मूंछों के कारण अपहरण हो गया, उन्हें मारने की धमकी मिली और अपने परिवार से अलग तक रहना पड़ा।
विज्ञापन
अफरीदी की 30 इंच की खड़ी मूंछें हैं। इन मूंछों को धोने, संवारने, तेल लगाने में उन्हें आधा घंटा लगता है। इसके बाद अफरीदी की मूंछें उनके माथे तक पहुंच जाती हैं।
विज्ञापन
पेशावर में रह रहे 48 साल के अफरीदी बताते हैं कि उन्हें अपनी मूंछों के कारण लोगों से बड़ा सम्मान मिलता था। वह मेरी पहचान हैं। जब से मेरी मूंछें इतनी बड़ी हुई तब से लोग मुझ पर ध्यान देने लगे। इससे मैं बहुत खुश हूं।
कट्टरपंथियों को पसंद नहीं आईं मूंछें
पाकिस्तान में कट्टरपंथियों को धार्मिक सिद्घांतों के मुताबिक बड़ी मूंछें मंजूर नहीं थीं। उनके अनुसार मूंछें या तो होनी ही नहीं चाहिए या फिर छोटी होनी चाहिए।
इस कारण अफरीदी को पाकिस्तान में कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा।
अफरीदी से आतंकी संगठन लश्कर-ए-इस्लाम ने मूंछों के बदले रंगदारी की मांग की। लश्कर-ए-इस्लाम अफगान सीमा पर खैबर के आदिवासी जिले में उपस्थिति तालिबान का सहयोगी संगठन है।
उनसे करीब 30 हजार रुपए मांगे गए और जब अफरीदी ने पैसे नहीं दिए तो चार बंदूकधारी उन्हें साल 2009 में घर से उठाकर ले गए। अफरीदी बताते हैं कि उन्हें एक महीने तक गुफा में कैद करके रखा गया और मूंछे कटवाने के वादे पर ही छोड़ा गया।
मिलती रहीं धमकियां
अफरीदी ने कहा कि इस घटना के बाद वह बहुत डर गए और उन्होंने अपनी मूंछें कटवा दीं। उसके बाद वह सुरक्षा के लिहाज से पेशावर चले गए। कुछ समय बाद उन्होंने फिर से मूंछें बढ़ाईं लेकिन तब भी धमिकयों से उनका पीछा नहीं छूटा।
पेशावर में भी अफरीदी को फोन पर मूंछों को कारण गला काटने तक की धमकियां मिलने लगीं। इसके बाद वह तालिबानी क्षेत्र से बचते हुए अपने परिवार से अलग पंजाब के फैसलाबाद में रहने लगे।
अफरीदी रमजान के लिए अभी पेशावर में हैं और बताते हैं कि वह अब भी डरे हुए हैं और फोन पर लोगों को कहते हैं कि वह फैसलाबाद में ही हैं।
दुबई से मंगाते हैं तेल
अपनी मूंछों को संवारने में अफरीदी हर महीने करीब 9000 रुपए खर्च करते हैं। उन्हें क्षेत्र को अलग पहचान देने वाली मूंछों के लिए गृह जिले से 3000 रुपए की सहायता भी मिलती है।
अफरीदी अपनी मूंछों को तैयार करने के सामान में हेयर ड्रायर, कई साबुन, शैंपू, शीशा और घर में बना नारियल का तेल शामिल है। उनके अनुसार वह दुबई से एक जर्मन तेल भी मांगते हैं जिसका वह लेबल निकाल लेते हैं ताकि कोई उसमें मिले तत्व न जान ले।