बिल्डरों को जमीन देने का विरोध है तबादले की वजह?

चंडीगढ़/ब्यूरो Updated Wed, 17 Oct 2012 08:59 AM IST
khemka transfered due to not alloting land to builders
तत्कालीन चकबंदी महानिदेशक अशोक खेमका ने अगस्त में बिल्डरों को पंचायतों की शामलात जमीन के हस्तांतरण की सीबीआई जांच की मांग की थी। माना जा रहा है कि खेमका का यह कदम ही उनके तबादले की वजह बना। हालांकि मुख्यसचिव पीके चौधरी का दावा है कि हाईकोर्ट के निर्देश पर ही खेमका का ट्रांसफर किया गया।

चकबंदी निदेशक द्वारा पंचायतों की शामलात जमीन का बिल्डरों को हस्तांतरण किए जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में कई याचिकाएं दायर की गई थीं। पिछले साल तत्कालीन चकबंदी महानिदेशक टीवीएसएन प्रसाद ने हाईकोर्ट में शपथपत्र देकर कहा था कि चकबंदी निदेशक को शामलात जमीन हस्तांतरण करने का अधिकार नहीं था। प्रसाद के शपथपत्र के आधार पर हाईकोर्ट ने जमीन का हस्तांतरण रद कर दिया था।

इसके बाद चकबंदी महानिदेशक बनाए गए खेमका ने भी टीवीएसएन प्रसाद का रुख अपनाया। जमीन हस्तांतरण से जुड़ी अन्य याचिकाओं पर हाईकोर्ट में हलफनामा दायर करने से पहले खेमका ने अतिरिक्त मुख्यसचिव (राजस्व एवं आपदा प्रबंधन) को पत्र लिखकर पूछा था कि बड़े लोगों की संलिप्तता वाले इस बड़े जमीन घोटाले की सीबीआई जांच क्यों नहीं होनी चाहिए?

खेमका ने सीबीआई जांच का आग्रह शामिल करते हुए हलफनामा अदालत में पेश करने की अनुमति मांगी। लेकिन चकबंदी महानिदेशक को सरकार से यह अनुमति नहीं मिली। अंतत: खेमका की ओर से दायर हलफनामे में सिर्फ चकबंदी निदेशक द्वारा जमीन हस्तांतरण आदेश जारी किए जाने के आदेशों को गलत बताया गया। इस बीच खेमका का सीबीआई जांच की मांग वाला पत्र मीडिया ने प्रकाशित कर दिया। तभी से खेमका के तबादले की चर्चाएं शुरू हो गई थीं।

हरियाणा सरकार में मुख्य सचिव पीके चौधरी का कहना है कि खेमका का तबादला पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के निर्देश पर एक अक्टूबर, 2012 को जारी दिशानिर्देश की पालना में किया गया है। खेमका ने वर्ष 2009 की याचिका की सुनवाई के दौरान उन्हें विशेष कलेक्टर के पद से मुक्त करने का अनुरोध किया था। चूंकि यह पद परंपरागत रूप से महानिदेशक चकबंदी के अधीन होता है, इसलिए उन्हें संबद्ध प्रभारों से मुक्त किया गया है। इसके अलावा उनके तबादले का कोई अन्य कारण नहीं है।

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