'जमीन घोटालों का खुलासा किया है, जेल तो जाना पड़ेगा'

डॉ. सुरेंद्र धीमान/चंडीगढ़ Updated Mon, 29 Oct 2012 12:02 PM IST
khemka ready to go to jail as he exposed land allotment irregularities
टर्मिनेट और लापता हाउसिंग बोर्ड कर्मचारी की पत्नी द्वारा शिकायत करने के बाद सीनियर आईएएस डॉ. अशोक खेमका का कहना है कि यह सब षडयंत्र के तहत किया जा रहा है। जमीन घोटालों का खुलासा किया है तो जेल भी जाना पड़ेगा, यदि किस्मत में यही लिखा है तो जेल भी जाऊंगा। इस मामले में हरियाणा के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कानून व्यवस्था) ने खेमका के खिलाफ किसी फैक्स शिकायत से इनकार किया है।   

सीनियर आईएएस डॉ. अशोक खेमका ने रविवार को अमर उजाला से भारी मन से बातचीत में कहा कि पौने सात साल पहले किसी कर्मचारी को आधिकारिक शक्ति के तहत डिसमिस करने की सजा दी गई तो उन्होंने कौन सा गलत काम किया था। उनका कहना है कि अगर कोई सांसद प्रधानमंत्री से मंत्री नहीं बनाने पर जलकर जान देने की बात करता है तो क्या प्रधानमंत्री पर खुदकुशी के लिए मजबूर करने का मामला दर्ज हो जाएगा।
 
यह है मामला
27 अक्टूबर को हाउसिंग बोर्ड हरियाणा के छह साल पहले डिसमिस हो चुके कर्मचारी जसवंत सिंह की पत्नी ने हरियाणा पुलिस के कंट्रोल रूम में फैक्स के जरिए शिकायत दी है। इसमें कहा गया है कि उसके पति जसवंत सिंह को बोर्ड के तत्कालीन मुख्य प्रशासक डॉ. अशोक खेमका ने डिसमिस कर दिया था। उसके बाद उसकी मानसिक स्थिति बिगड़ गई और साढ़े पांच साल पहले घर से चले गए। अब संभावना है कि जसवंत सिंह ने खुदकुशी कर ली है।
 
मीडिया से जानकारी मिली
खेमका का कहना है कि वैसे मुझे इसका पता नहीं है। मीडिया के जरिए शिकायत की जानकारी मिली है। इस मामले में बोर्ड के किसी मुलाजिम ने जानकारी दी है कि जसवंत सिंह को गैरहाजिर रहने के दोष में डिसमिस किया गया था। उसने अपील भी नहीं की। वह अपने घर से पांच साल पहले चला गया था। उसके परिजनों ने पुलिस थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज भी करा रखी है। 8 जनवरी, 2007 को मैंने बोर्ड का कार्यभार छोड़ दिया था। इतने वर्षों बाद अगर कोई खुदकुशी के लिए मजबूर करने की शिकायत करता है तो आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि इसके पीछे कैसा षडयंत्र हो सकता है।

'मुझे मीडिया की मदद चाहिए'  
खेमका का कहना है कि जसवंत के पुत्र ने 27 अक्टूबर की रात को पंचकूला के सरकारी पर्यटन परिसर रेड बिशप में प्रेस कान्फ्रेंस की है। समय देखकर अंदाजा लगा लें कि उनको किसका समर्थन हो सकता है। मैंने भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई है तो मैं और मेरा परिवार सजा भी भुगतेगा। मुझे मीडिया की मदद चाहिए। आधिकारिक श्रेणी के तहत किए फैसले के बाद कोई खुदकुशी कर ले तो वह अपराध की श्रेणी में नहीं आता है। मेरी किस्मत में अगर जेल जाना होगा तो जाऊंगा।

गौरतलब है कि खेमका ने रॉबर्ट वाड्रा-डीएलएफ डील की जमीन का इंतकाल 15 अक्टूबर को रद करने और एनसीआर के चार जिलों में वाड्रा और उनकी कंपनियों की संपत्ति की जांच का भी आदेश दिया था।   

संजीव कुमार को भुगतने पड़े थे मुकदमे
हरियाणा कैडर के 1985 बैच के आईएएस संजीव कुमार ने वर्ष 2000 में तत्कालीन मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला पर जेबीटी टीचर भर्ती में सूची बदलने का आरोप लगाया था। तब स्टेट विजिलेंस ब्यूरो ने कई केस संजीव कुमार के खिलाफ दर्ज किए थे। वे अब तक सस्पेंड चल रहे हैं। विजिलेंस केस कुछ महीने पहले सीबीआई अदालत से खत्म हो चुके हैं। जेबीटी टीचर भर्ती मामला दिल्ली स्थित सीबीआई की अदालत में चल रहा है।

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