फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   khademi in hiding after sexual harassment protest

इस ड्रेस को पहन मुश्किल में पड़ गई एक लड़की

Mon, 09 Mar 2015 01:17 PM IST
Updated Mon, 09 Mar 2015 01:17 PM IST
विज्ञापन
khademi in hiding after sexual harassment protest

हाल ही में एक यंग अफगानी आर्टिस्ट कुब्रा खादेमी लोहे से बनी एक खास ड्रेस पहनकर काबुल की गलियों में घूमी थीं। इस ड्रेस में खासतौर पर महिला के ब्रेस्ट और हिप्स को दिखाया गया था। इसके पीछे कुब्रा का उद्देश्य यौन शोषण के खिलाफ प्रोटेस्ट करना था।

विज्ञापन


हिंदुस्तान टाइम्स में छपी खबर के अनुसार खादेमी 26 फरवरी को इस ड्रेस को पहनकर काबुल की गलियों में घूमीं थीं, जिसके बाद से उन्हें जान से मारने की धमकियां मिल रही थीं और अब वह छुपती फिर रही हैं। इस खास ड्रेस के माध्यम से वह अफगानिस्तान में महिलाओं के साथ सार्वजनिक स्थानों पर होने वाली छेड़छाड़ का विरोध कर रही थीं।
विज्ञापन


(सभी फोटो: साभार- एपी)

टैक्सी से भागना पड़ा था उन्हें

khademi in hiding after sexual harassment protest

खादेमी के अनुसार, इस सूट की कीमत करीब 500 अफगानिस (करीब 600 रुपए) है, जिसे एक स्थानीय लोहार ने बनाया था। जब वह इस सूट को पहनकर बुर्के में काबुल की गली में पहुंचीं तो वहां पर उनके साथ छेड़छाड़ हुई। अंत में खादेमी इतनी परेशान हो गईं कि उन्हें वहां से टैक्सी का सहारा लेकर भागने पर मजबूर होना पड़ा।

खादेमी ने महिला दिवस पर एएफपी को बताया कि वहां पर ठीक वैसा हुआ, जैसी उन्हें अपेक्षा थी। उन्होंने अपने बचपन का एक दर्द भरा अनुभव भी बताया, जिसने उन्हें इस तरह का प्रोटेस्ट करने पर मजबूर किया।

काश लोहे की होती अंडरवियर

khademi in hiding after sexual harassment protest

उन्होंने बताया कि जब वह मात्र 4-5 साल की थीं, तो एक व्यक्ति ने उन्हें गलत तरीके से छुआ और चला गया। उस व्यक्ति को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ा कि आखिर जिस लड़की को उसने छेड़ा, वह कितने साल की थी। उस समय उनके मन में सिर्फ यही बात आई कि काश उनकी अंडरवीयर लोहे की बनी होती।

इस घटना के बाद वह सोच रही थीं कि क्या उनकी कोई गलती है और इस कारण से वह खुद को गलत भी समझ रही थीं। खादेमी का कहना है कि इस तरह की घटनाएं अफगानिस्तान कि गलियों में आए दिन होती रहती हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें बदनाम करने के साथ-साथ जान से मारने की धमकियां भी मिली हैं और घर छोड़ने पर विवश किया गया है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed