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केजरीवाल नहीं बनेंगे दिल्ली के मुख्यमंत्री!
सुदीप ठाकुर/अमर उजाला, दिल्ली
Updated Sun, 22 Dec 2013 10:56 AM IST
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हस्तिनापुर की सत्ता की दहलीज पर खड़ी आम आदमी पार्टी यदि वाकई सरकार बनाती है, तो जरूरी नहीं कि अरविंद केजरीवाल ही मुख्यमंत्री बनें। उनकी जगह पार्टी किसी दूसरे वरिष्ठ नेता को सत्ता की कमान सौंप सकती है।
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साल भर पहले सियासी मैदान में उतरने वाली आम आदमी पार्टी का यह नया पैंतरा हो सकता है। अपने गठन के बाद से ही चालू राजनीति के मुहावरों को तोड़ने वाली आम आदमी पार्टी ऐसा अचंभित करने वाला फैसला करे तो हैरत नहीं।
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राजनीति की 'गंदगी' की सफाई के लिए उतरी आम आदमी पार्टी ने आखिर ऐसे-ऐसे लोगों को दिल्ली विधानसभा के चुनावों में टिकट दिया ही था, जिन्होंने कभी सियासत में आने के बारे में सोचा भी नहीं था। मगर ऐसे लोगों ने न केवल चुनाव लड़ा और जीता भी। खुद केजरीवाल और उनके सबसे करीबी लोगों में शामिल मनीष सिसौदिया जैसे लोग भी डेढ़ दो साल पहले तक सीधी राजनीति के बारे में सोच भी नहीं रहे थे।
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यदि आप को दिल्ली में अपने दम पर बहुमत मिल गया होता तब तो मुश्किल ही नहीं थी। यही नहीं उसे यदि 15-20 सीटें मिलतीं तब भी उसके लिए कोई खराब स्थिति नहीं होती। मगर पेच फंस गया 28 सीटों और सर्वाधिक सीटें पाने वाली भाजपा से महज चार सीटें कम पाने की वजह से!
जाहिर है, इतनी सीटें मिलने से कहीं अधिक खुशी पार्टी के लिए यह थी कि उसने कांग्रेस को तीसरे नंबर पर धकेल दिया। मगर भाजपा के सरकार बनाने से इंकार करने की वजह से आप पर एक तरह का नैतिक दबाव बना। पार्टी ने इसे एक अवसर की तरह देखा।
उप राज्यपाल नजीब जंग के न्योते और कांग्रेस से मिले बिना शर्त समर्थन के बाद आप के कार्यकर्ता दिल्ली के लोगों की राय जान रहे हैं। पार्टी के सूत्र बताते हैं कि आमतौर पर राय सरकार बनाने के पक्ष में बन रही है। मगर इसके साथ ही पार्टी के सामने एक नए तरह की चुनौती सामने आ रही है। यदि सरकार बनाने का फैसला हो तो क्या अरविंद केजरीवाल को ही मुख्यमंत्री बनाया जाए। ऐसा हुआ तो लोकसभा चुनावों की उसकी तैयारियां और रणनीति दोनों प्रभावित हो सकती हैं।
मनीष सिसौदिया हो सकते हैं चेहरा
बेशक केजरीवाल ने दिल्ली की तीन बार की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को पराजित किया। मगर मुख्यमंत्री बनने के बाद वह भाजपा और कांग्रेस पर वैसे तीखे हमले नहीं कर पाएंगे, जैसा अभी वे कर रहे हैं। इसके अलावा सरकार से बाहर रहकर वह आप को कहीं अधिक विस्तार दे सकेंगे।
असल में अरविंद आम आदमी पार्टी का चेहरा हैं, जिसे पार्टी सिर्फ मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारियों में बांधकर सीमित नहीं करना चाहेगी। इससे वह यह संदेश देने में भी सफल होगी कि केजरीवाल राजनीति में मुख्यमंत्री बनने नहीं आए हैं; जैसा कि वह खुद कहते भी आए हैं कि राजनीति में वे करियर बनाने नहीं आए हैं।
उनकी जगह मनीष सिसौदिया के नाम को आगे किया जा सकता है, क्योंकि केजरीवाल के बाद वही पार्टी के नवनिर्वाचित विधायकों में सबसे वरिष्ठ नेता हैं। वैसे कुछ और नामों पर भी पार्टी के भीतर चर्चा हो रही है। मुश्किल यह है कि गोपाल राय और शाजिया इल्मी चुनाव हार गए, उनके अलावा संजय सिंह ने चुनाव नहीं लड़ा था।
पार्टी के मार्गदर्शक की भूमिका निभा रहे योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण ने भी विधानसभा चुनाव नहीं लड़ा था। अरविंद के साथ मिलकर ये दोनों नेता आप की सरकार पर नजर तो रख ही सकेंगे और लोकसभा चुनावों के मद्देनजर अपनी रणनीति पर भी काम कर सकेंगे।