सर्वे ने खोली केजरीवाल की पोल, हाथ से दिल्ली भी फिसली!
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दिल्ली विधानसभा चुनावों में जीत और फिर 49 दिन सरकार चलाने के बाद लोकसभा चुनावों पर निशाना लगा रहे अरविंद केजरीवाल के लिए एक बुरी खबर है। एक तरफ वो बनारस में नरेंद्र मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं, दूसरी तरफ दिल्ली हाथ से फिसलती दिख रही है।
आपको यह जानकर हैरानी हो सकती है कि बीते दो महीने में आम आदमी पार्टी को मिलने वाले समर्थन में भारी कमी है, जबकि कांग्रेस जोरदार वापसी करती दिख रही है।
ऐसे में यह साफ हो गया है कि दिल्ली की सात लोकसभा सीटों पर मुकाबला त्रिकोणीय होगा। एक टीवी चैनल के लिए किए गए ओपिनियन पोल के नतीजे केजरीवाल की नींद उड़ा सकते हैं।
तीनों पार्टी में रहेगी कड़ी टक्कर
जनवरी में इसी चैनल ने दिल्ली की सात सीटों पर संभावनाएं जताते हुए कहा था कि आम आदमी पार्टी छह सीट जीतने में कामयाब रहेगी, जबकि एक भाजपा के हाथ आएगी। इसके मुताबिक कांग्रेस की झोली दिल्ली में खाली रहेगी।
लेकिन अब यह समीकरण बदल गए हैं। इसी चैनल के पोल में संभावनाएं जताई गई हैं कि दिल्ली में अरविंद केजरीवाल की पार्टी को तीन, भाजपा को तीन और कांग्रेस को एक सीट मिलेगी।
एसी नील्सन की ओर से किए गए इस सर्वे में जनवरी में आम आदमी पार्टी को 55 फीसदी, भाजपा को 29 फीसदी और कांग्रेस को 9 फीसदी वोट शेयर दिया गया था।
कांग्रेस कर रही है वापसी
फरवरी के पोल में यह आंकड़ा आम आदमी पार्टी के लिए 49 फीसदी, भाजपा के लिए 30 फीसदी और कांग्रेस के लिए 14 फीसदी पर पहुंच गया। मार्च में आंकड़े और बदले। आम आदमी पार्टी का वोट शेयर 34 फीसदी, भाजपा का 32 फीसदी और कांग्रेस का उछलकर 28 फीसदी पर पहुंचा।
बीते दो महीने में यह साफ दिख रहा है कि पोल के मुताबिक आम आदमी पार्टी के आधार में 21 फीसदी की कमी आई है और कांग्रेस का वोट शेयर करीब-करीब 19 फीसदी बढ़ गया है। भाजपा इस बीच 3 फीसदी का फायदा लेने में कामयाब रही है।
इन आंकड़ों में 5 फीसदी घटा-जोड़ की गुंजाइश बताई गई है, ऐसे में लग रहा है कि दिल्ली की लोकसभा सीटों पर तीन दलों के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिल सकती है।
बाहर गए, तो दिल्ली में क्या असर बचा?
इस बीच आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल अगले हफ्ते दिल्ली में रोड शो की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन उनके सामने कड़ी चुनौती है। सिलसिलेवार उठे विवाद और हालिया रैलियों में मिले सीमित समर्थन की वजह से उन्हें कई सवालों का सामना करना पड़ सकता है।
वो उम्मीद कर रहे हैं कि इस रैली के जरिए पार्टी समर्थकों और कार्यकर्ताओं में एक बार फिर जोश भरा जा सकेगा। दरअसल, कई लोगों का मानना है कि अपने असर वाले इलाके से बाहर कदम रखने और भाजपा के करारे हमले की वजह से आम आदमी पार्टी की लोकप्रियता को चोट पहुंची है।
आम आदमी पार्टी के पुराने साथी पार्टी पर गंभीर इल्जाम लगा रहे हैं और गुड़गांव, रेवाड़ी और फरीदाबाद जैसे दिल्ली से सटे इलाकों में उसे कोई खास साथ नहीं मिल रहा।
नहीं मिल रहा ग्रामीण इलाकों का साथ
आम आदमी पार्टी दावा कर रही है कि उसके चुनाव प्रचार अभियान को गजब का समर्थन मिल रहा है, लेकिन खबरें आ रही हैं कि आम लोग, खास तौर से ग्रामीण लोगों में उसे कोई खास प्रतिक्रिया नहीं दे रहे।
केजरीवाल 31 मार्च से दिल्ली में अभियान शुरू करेंगे और 10 अप्रैल को चुनाव होने तक यही रहेंगे। पार्टी प्रवक्ता नागेंद्र शर्मा ने कहा, "हम नुक्कड़ सभा और रोड शो पर फोकस कर रहे हैं और विधानसभा चुनावों की तर्ज पर प्रचार करेंगे।"
AAP की गुड़गांव रैली में केजरीवाल के करीबी सहयोगी रमेश यादव और प्रदेश इकाई के दूसरे सदस्यों के इस्तीफों ने पलीता लगा दिया था। गुजरात में अहमदाबाद रैली को कुछ कामयाबी मिली, लेकिन ग्रामीण इलाके में केजरीवाल कोई असर नहीं छोड़ पाए।