जनलोकपाल पर केजरी ने कुर्बान की सरकार
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जन लोकपाल बिल को अपनी सरकार के अस्तित्व का सवाल बना चुके दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शुक्रवार रात अपने पद से इस्तीफा दे दिया।
उन्होंने यह कदम कांग्रेस और भाजपा का समर्थन नहीं मिलने की वजह से जन लोकपाल विधेयक के विधानसभा में पेश नहीं हो पाने के चलते उठाया।
केजरीवाल और उनके मंत्रिमंडल के सहयोगियों ने उपराज्यपाल नजीब जंग से मिलकर अपना इस्तीफा उन्हें सौंप दिया। अपने इस्तीफे में केजरीवाल ने विधानसभा भंग कर तत्काल नए सिरे से चुनाव कराने की मांग की है। आम आदमी पार्टी की सरकार दिल्ली पर 49 दिन ही शासन कर सकी।
जुटे आम आदमी पार्टी के हजारों कार्यकर्ता
बिल को विधानसभा में पेश कराने में विफल रहे केजरीवाल ने सदन के अंदर ही इस्तीफे का संकेत दे दिया था। दिनभर के हंगामे के बाद अनुपूरक मांगों पर जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार खत्म करने की खातिर सौ क्या हजार बार वह सरकार कुर्बान करने को तैयार हैं। यह उनका आखिरी सत्र है। वह अब भ्रष्टाचार के खिलाफ इस क्रांति को सड़क से संसद तक ले जाएंगे।
इसके बाद कैबिनेट की दिल्ली सचिवालय में आपात बैठक हुई, जिसमें इस्तीफा देने का निर्णय लिया गया। इसके बाद वह हनुमान रोड स्थित पार्टी कार्यालय पहुंचे, जहां जुटे हजारों कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि जन लोकपाल बिल के लिए सरकार तो क्या वह अपनी जान तक कुर्बान करने को तैयार हैं।
21 साल बाद दिल्ली में लगेगा राष्ट्रपति शासन?
अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली के उपराज्यपाल नजीब जंग से दिल्ली विधानसभा को भंग करने की मांग की है। साथ ही नए सिरे से विधानसभा चुनावों को कराने की मांग की है।
अब उपराज्यपाल नजीब जंग, अरविंद केजरीवाल की बात मांग कर विधानसभा भंग कर सकते हैं। पर उपराज्यपाल इस बात को मानने के लिए बाध्य नहीं हैं। उपराज्यपाल दिल्ली के हालातों से राष्ट्रपति को अवगत कराएंगे।
उपराज्यपाल दिल्ली में राष्ट्रपति शासन लगाने के लिए गृह मंत्रालय से भी गुहार लगा सकते हैं। अगर दिल्ली में राष्ट्रपति शासन लगाया जाता है तो वर्ष 1993 के बाद पहला मौका होगा, जब दिल्ली में राष्ट्रपति शासन लगेगा। इसके बाद चुनाव आयोग को छह महीने के अंदर चुनाव कराने होंगे। चुनाव लोकसभा चुनावों के साथ और उसके बाद भी कराएं जा सकते हैं।