केजरीवाल को क्यों याद आने लगा है संविधान?
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आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने अराजकतावादी होने के आरोपों को दरकिनार करते हुए कहा है कि उनकी पार्टी संविधान के दायरे में काम करने के लिए प्रतिबद्ध है।
अराजकतावादी होने और बगैर किसी आपसी सामंजस्य वाली अलग-अलग विचारधाराओं के तत्वों का नेतृत्व क रने के आरोपों का जवाब देते हुए केजरीवाल ने कहा यह ठीक है कि उनकी पार्टी के साथ-अलग विचारधारा के लोग हैं।
लेकिन पार्टी भारतीय संविधान के दायरे में काम करने को प्रतिबद्ध हैं। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री केजरीवाल ने कहा कि वह खुद को किसी विचारधारा में नहीं बांधना चाहेंगे। वह किसी राजनीतिक विचारधारा के प्रति झुकाव वाले किसी वाद में विश्वास नहीं करते।
महात्मा गांधी से हूं प्रभावित
बृहस्पतिवार को एक मराठी न्यूज चैनल के साथ इंटरव्यू में अरविंद केजरीवाल ने कहा, मैं महात्मा गांधी से प्रभावित हूं और मानवतावादी विचारधारा में विश्वास करता हूं। हम लोगों को अधिकार देना चाहते हैं और राजनीतिक भ्रष्टाचार पर टिकी व्यवस्था को बदलना चाहते हैं।
चैनल के सवालों के जवाब में केजरीवाल ने कहा कि वह पहले नास्तिक थे लेकिन पिछले तीन साल से आस्तिक हो गए हैं क्योंकि उनका रास्ता किसी दैवीय इच्छा से तय हो रहा है।
उन्होंने कहा, मैंने सपने में भी नहीं सोचा था कि इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की अपनी नौकरी छोड़ दूंगा और न ही कभी यह सोचा था एक दिन चुनाव लड़ूंगा। यह सब ईश्वर की मर्जी है। कोई शक्ति है, जो आपको रास्ता दिखाती है।
केजरीवाल ने कहा कि वह गीता के कर्म सिद्धांत में विश्वास करते हैं। वह कर्म करना चाहते हैं फल की चिंता नहीं करते। उन्होंने कहा कि गीता सिर्फ विश्वास नहीं बल्कि एक विज्ञान है।