चार साल में 300 करोड़ के मालिक बने रॉबर्ट वाड्रा

नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो Updated Sat, 06 Oct 2012 01:21 AM IST
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आंदोलन के रास्ते राजनीति में जगह बनाने की कोशिश कर रहे अरविंद केजरीवाल ने प्रियंका गांधी के पति रॉबर्ट वाड्रा पर सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। केजरीवाल ने कहा है कि वाड्रा ने करीब चार साल में 300 करोड़ रुपये की संपत्ति बना ली। उन्होंने कहा कि 2007 से लेकर 2010 तक वाड्रा की संपत्ति 50 लाख से बढ़कर 300 करोड़ रुपये हो गई, जबकि उनकी आय का एकमात्र जरिया डीएलएफ से मिला ब्याज मुक्त 65 करोड़ रुपये का लोन था। केजरीवाल के इन आरोपों से सियासी तूफान खड़ा हो गया है। कांग्रेस ने जहां इन आरोपों को निराधार और गैर जिम्मेदाराना करार देकर खारिज किया है, वहीं भाजपा ने आरोपों की जांच कराने की मांग कर दी है।

शुक्रवार शाम मीडिया से रूबरू अरविंद केजरीवाल और उनके सहयोगी जानेमाने वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि पिछले चार साल में वाड्रा ने एक के बाद एक 31 संपत्तियां खरीदीं, जिसमें से ज्यादातर कांग्रेस शासित दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान में हैं। उन्होंने कहा कि 2007 में वाड्रा की पांच कंपनियों की कुल पूंजी 50 लाख रुपये थी। 2010 में इनकी संपत्ति 300 करोड़ रुपये हो गई। खास बात यह कि इस बीच कंपनियों की व्यावसायिक गतिविधियां न के बराबर रहीं। वाड्रा की संपत्ति बढ़ाने में डीएलएफ से मिले बिना गारंटी और ब्याज के लोन और डीएलएफ ने अहम भूमिका निभाई।

केजरीवाल और भूषण के मुताबिक कम कीमत पर संपत्ति का बड़ा हिस्सा डीएलएफ से खरीदा गया है। इसमें गुड़गांव के मैग्नोलिया अपार्टमेंट के 7 फ्लैट सिर्फ 5.2 करोड़ में खरीदे गए, जबकि उस वक्त भी एक फ्लैट की कीमत 35 से 70 करोड़ रुपये थी, जबकि मौजूदा कीमत 105 से 117 करोड़ रुपये है। इसी तरह गुड़गांव के एक अन्य फ्लैट की कीमत 89 लाख दिखाई गई है, जबकि उस वक्त इसकी कीमत करीब 20 करोड़ रुपये थी।

उन्होंने सवाल किया कि डीएलएफ ने 65 करोड़ रुपये का लोन क्यों दिया और वाड्रा के लिए संपत्ति की कीमत बाजार भाव से कम कीमत क्यों रखी गई? उन्होंने इसकी निष्पक्ष जांच की मांग भी की। उन्होंने आरोप लगाया कि वाड्रा को संपत्ति इतनी सस्ती मिलने के पीछे हो सकता है कि राज्यों की कांग्रेस सरकारों ने डीएलएफ को लाभ दिया हो। उन्होंने दावा किया कि वाड्रा की इन संपत्तियों का बाजार भाव 500 करोड़ रुपये के करीब है।

केजरीवाल के सवाल
1. चार साल में वाड्रा की संपत्ति 50 लाख से 300 करोड़ रुपये कैसे हो गई?
2. डीएलएफ ने 65 करोड़  का लोन बिना ब्याज क्यों दिया?
3. 7 फ्लैट सिर्फ 5.2 करोड़ में कैसे खरीदे, जबकिउस वक्त एक-एक फ्लैट की कीमत 35 से 70 करोड़ थी?
4. 20 करोड़ का फ्लैट 89 लाख में कैसे मिल गया?

केजरीवाल के आरोप आधारहीन और गैर जिम्मेदाराना हैं। कथित सिविल सोसाइटी समूह खुद को राजनीतिक दल में बदलने की कोशिश कर रहा है, लेकिन यह भाजपा की बी-टीम से ज्यादा कुछ नहीं है।
मनीष तिवारी, कांग्रेस

वाड्रा के साथ कारोबारी संबंध पूरी तरह पारदर्शी थे। इनमें नैतिकता के उच्च मूल्यों का पालन किया गया।
डीएलएफ प्रवक्ता

कांग्रेस अध्यक्ष के दामाद को फायदा दिलाने के लिए कांग्रेस सरकारों ने एनसीआर में बहुत सारी जमीन डीएलएफ को दे दी। यदि डीएलएफ ने संपत्ति सस्ते दामों पर देकर वाड्रा के लिए चैरिटी की तो उसे अन्य लोगों के साथ भी ऐसा ही करना चाहिए।
रविशंकर प्रसाद, भाजपा

हमने किसी को फायदा नहीं दिया। पारदर्शी तरीके से हुई नीलामी में सबसे ज्यादा ऊंची बोली लगाने वाले को ही जमीन आवंटित की गई है।
भूपेंद्र सिंह हुड्डा, हरियाणा के सीएम

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