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केजरीवाल कौन? एक नेता या स्ट्रीट फाइटर
विजय जैन/नई दिल्ली
Updated Thu, 18 Oct 2012 07:58 AM IST
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तूफ़ानी मौजों से दो-दो हाथ करने का इंतज़ाम भी हो।
पहले कांग्रेस सुप्रीमो सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा, फिर देश के कानून मंत्री सलमान खुर्शीद और अब भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी। अरविंद केजरीवाल ने कुछ ही दिनों में जिस तरह से देश के बड़े राजनीतिक घरानों और नामचीन नेताओं को घेरे में लिया है उससे नेताओं और राजनीतिक दलों की नींद उड़ गई है। आखिर कौन हैं केजरीवाल? एक नेता या स्ट्रीट फाइटर।
कई राजनेता केजरीवाल को पब्लिसिटी का भूखा व्यक्ति करार दे रहे हैं जो मीडिया की नज़रों के बीच रहकर राजनीतिक दांवपेंच खेलते हैं। लोगों की राय ली जाए तो केजरीवाल लोगों को सदाचार का पाठ पढ़ाते हैं, वे बड़े नेताओं पर गंभीर आरोप लगाते हैं और वो भी ऐसे तथ्यों के आधार पर जो उनकी नज़र में ठोस सबूत हैं...और इससे पहले कि एक मामला किसी छोर पर पहुंचे वो अगले व्यक्ति पर निशाना साधने में लग जाते हैं।
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पिछले हफ़्ते केजरीवाल ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद बिज़नेसमैन रॉबर्ट वाड्रा पर आरोप लगाया कि वाड्रा और एक रियल इस्टेट कंपनी के बीच संबंध थे और इन संबंधों के कारण वाड्रा को व्यापारिक फायदा हुआ, लेकिन डीएलएफ और वाड्रा दोनों आरोपों से इनकार करते हैं।
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इसके कुछ दिन बाद ही केजरीवाल ने कानून मंत्री सलमान खुर्शीद को निशाने पर लिया। आरोप लगाया कि खुर्शीद और उनकी पत्नी ने उस धनराशि में धांधली की है जो उनके एनजीओ डॉ. जाकिर हुसैन मेमोरियल ट्रस्ट को विकलांगों को उपकरण मुहैया कराने के लिए दी गई थी, ग़ुस्साए खुर्शीद इन आरोपों को सिरे से नकार रहे हैं। उसके बाद केजरीवाल ने आईएएस अधिकारी खेमका के तबादले को लेकर हरियाणा सरकार पर निशाना साधा। पहले इस तबादले को रुटीन तबादला करार करने वाले हरियाणा सरकार ने रात होते-होते अचानक यू-टर्न ले लिया और कहा कि तबादला हाईकोर्ट के आदेश पर किया गया है।
अब केजरीवाल ने निशाने पर लिया है भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी को। गडकरी पर आरोप लगाया है कि उन्होंने धोखाधड़ी और सरकार की मिलीभगत से किसानों की जमीन हथिया ली और उसका इस्तेमाल गन्ना तथा सोयाबीन उगाने और फायदा कमाने के लिए किया है। उधर, केजरीवाल के आरोपों को मामूली बताने वाली भाजपा की ओर से सफाई देने लोकसभा में नेता विपक्ष सुषमा स्वराज, राज्यसभा में नेता विपक्ष अरुण जेटली और परम प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद पहुंचे और आरोपों पर जवाब दिया, उससे लग नहीं रहा था कि वे मामले को गंभीरता से नहीं ले रहे।
केजरीवाल अपने हर आंदोलन को आर-पार की लड़ाई वाला आंदोलन करार देते हैं, लेकिन हर बार उनका आंदोलन अधूरा दिखाई पड़ता है। पहले वाड्रा की गिरफ्तारी की मांग पूरी नहीं हो पाई। फिर कानून मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर केजरीवाल गिरफ्तार भी हुए और जेल में भी रात गुजारनी पड़ी, लेकिन अचानक इस आंदोलन को फर्रुखाबाद ले जाने के नाम पर स्थगित कर दिया गया है। अब सवाल यह खड़ा हो रहा है कि क्या वहां के आंदोलन से अरविंद अपने मकसद में कामयाब हो पाएंगे और क्या ये आंदोलन पूरा हो पाएगा?
बहरहाल, अरविंद कहते हैं कि हम जानते हैं कि इस मामले में भी सरकार कोई जांच नहीं करवाएगी, लेकिन हम देश की जनता के सामने इन लोगों का सच लाना चाहते हैं। देश को लोग डरे हुए हैं और हम यह खुलासे करके देश के लोगों को व्यवस्था परिवर्तन के खिलाफ तैयार करना चाहते हैं। हम भाजपा या सरकार से कोई मांग नहीं कर रहे हैं। हम सिर्फ देश के लोगों से मांग कर रहे हैं कि जागृत हो जाएं और अपने हितों के लिए लड़े।
इस माहौल में दुष्यंत कुमार की पंक्तियां याद आती हैं
हो गई है पीर पर्वत-सी पिघलनी चाहिए,
इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए।
आज यह दीवार, परदों की तरह हिलने लगी,
शर्त लेकिन थी कि ये बुनियाद हिलनी चाहिए।
हर सड़क पर, हर गली में, हर नगर, हर गाँव में,
हाथ लहराते हुए हर लाश चलनी चाहिए।
सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं,
सारी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए।
मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही,
हो कहीं भी आग, लेकिन आग जलनी चाहिए।