अब गडकरी के सिर पर फूटा केजरी ‘बम’

नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो Updated Thu, 18 Oct 2012 12:21 AM IST
Kejri 'bomb' now bursting at the head of Gadkari
अभी तक कांग्रेस को मुसीबत में डालने वाले अरविंद केजरीवाल ने बुधवार को भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी को कठघरे में खड़ा कर दिया। उन्होंने भ्रष्टाचार के विरुद्ध अपनी लड़ाई को नया मोड़ देते हुए महाराष्ट्र में ‘माटी और मानुष’ की आवाज बुलंद की। उन्होंने भाजपा अध्यक्ष के रूप में दूसरी पारी खेलने की सारी तैयारियां कर चुके गडकरी पर आरोप लगाया कि किसानों की कीमत पर वह महाराष्ट्र में व्यावसायिक साम्राज्य खड़ा कर रहे हैं।

विदर्भ के उन्मेद तालुका के घुरसापुर गांव का उदाहरण देते हुए केजरीवाल ने कहा कि वहां 48 हेक्टेयर जमीन (करीब 120 एकड़) महाराष्ट्र सरकार ने किसानों के हितों को परे रखते हुए गडकरी को सौंप दी। यही नहीं, विदर्भ के किसानों के लिए बने बांध के पानी का इस्तेमाल गडकरी और दूसरों की कंपनियां कर रही हैं। केजरीवाल ने साफ किया कि वे सरकारी एजेंसी से जांच की मांग नहीं कर रहे। इसकी जगह वे मामला जनता की अदालत में ले जाना चाहते हैं।

राजधानी के कांस्टीट्यूशन क्लब में मीडिया के सामने केजरीवाल ने आरोप लगाया कि 4 जून, 2005 को गडकरी ने अजित पवार को चिट्ठी लिखी थी कि उन्हें 100 एकड़ जमीन चाहिए। पवार ने 8 जून को विदर्भ सिंचाई विकास निगम (वीआईडीसी) को कहा कि गडकरी के प्रस्ताव को 22 जून की बैठक में पेश किया जाए। इसमें गडकरी को जमीन मिल गई। जबकि 2002 से चली आ रही किसानों की जमीन वापसी की मांग को दरकिनार कर दिया गया।

केजरीवाल के अनुसार, वीआईडीसी की बैठक में सचिव ने आवंटन का विरोध करते हुए कहा था कि यह कानूनन संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि जब अंजलि दमानिया और इंडिया अगेंस्ट करप्शन (आईएसी) की एक महीने की छानबीन के बाद इतना बड़ा खुलासा हो गया तो सरकारी एजेंसियां इस घोटाले का पता क्यों नहीं लगा पा रही हैं?

केजरीवाल ने सवाल किए कि भाजपा अध्यक्ष क्या विदर्भ के किसानों के विरोध में हैं? क्या महाराष्ट्र के अंदर व्यवसाय किसानों की खुदकुशी पर हो रहा है? भाजपा विपक्षी पार्टी है या सत्ताधारी पार्टियों से मिली हुई है? गडकरी के व्यावसायिक हित क्यों महाराष्ट्र के किसानों के हितों से टकरा रहे हैं? क्यों किसान उनके बिजनेस एंपायर बढ़ने की कीमत चुका रहे हैं?

देश की सभी राजनीतिक पार्टियों को ‘एक’ बताते हुए केजरीवाल ने कहा कि सुषमा स्वराज, अरुण जेटली, नितिन गडकरी, अखिलेश यादव, शरद यादव, शरद पवार, मायावती, सलमान खुर्शीद समेत सभी नेता सिर्फ जनता के बीच अलग होने का दिखावा करते हैं। अंदर-अंदर सबकी सेटिंग है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में कांग्रेस, भाजपा, शिवसेना व एनसीपी के बड़े नेताओं के पास करीब 71 पावर प्लांट हैं। हरियाणा में कांग्रेस अध्यक्ष के दामाद रॉबर्ट वाड्रा तो महाराष्ट्र में भाजपा अध्यक्ष खुद ही किसानों की जमीन छीनने में लगे हैं।

गडकरी पर प्रमुख आरोप
- महाराष्ट्र में किसानों की कीमत पर गडकरी ने ‘बिजनेस अंपायर’ खड़ा किया। कांग्रेस-एनसीपी ने उनकी मदद की। गडकरी बिजनेसमैन हैं या राजनेता?
- अजित पवार की मदद से किसानों की जमीन हड़पी और सिंचाई घोटाला किया। घोटाले में कांग्रेस-भाजपा की मिलीभगत।
- किसानों की अधिग्रहित 120 एकड़ जमीन महाराष्ट्र सरकार ने गडकरी को 11 साल की लीज पर दी।
-विदर्भ में बांध बनाने के लिए जरूरत से ज्यादा जमीन का अधिग्रहण। बांध से बची जमीन किसान खेती के लिए मांगते रहे। सरकार  नहीं मानी।
- जो जमीन किसानों को वर्षों तक नहीं दी गई, गडकरी के मांगने पर चार दिन में उन्हें जमीन दे दी गई। इस पर गडकरी गन्ना सैंपल का बिजनेस कर रहे हैं।
- किसानों की जमीन पर बने बांध का पानी किसानों को कम गडकरी के उद्योगों और अन्य कारोबारी घरानों को ज्यादा मुहैया कराया जा रहा है।
- कारखानों का प्रदूषित पानी जनता को सप्लाई किया जा रहा है जो जानवरों के पीने लायक तक नहीं है।

गडकरी और भाजपा की सफाई
- गडकरी ने कहा यह ‘षड्यंत्र’ है। उन्होंने कहा, ‘मैं हमेशा किसानों के हक के लिए लड़ता रहा हूं। मैंने सिंचाई की समस्या को लेकर एक किताब भी लिखी है। हमारी जमीनों को बांधों का मात्र 0.8 प्रतिशत पानी मिलता है। जबकि शेष पानी अन्य फैक्ट्रियों और किसानों को दिया जाता है।’
- सुषमा स्वराज ने कहा, ‘गडकरी जिस जमीन पर खेती कर रहे हैं, वह वेस्ट लैंड (बंजर) था। किसानों को जमीन अधिग्रहरण करने के बाद पूरा मुआवजा दिया जा चुका था। नितिनजी को जमीन का मालिकाना हक नहीं मिला है, यह 2006 में उन्हें सिर्फ 11 साल की लीज पर मिली है।’
- अरुण जेटली ने कहा, ‘गडकरीजी का प्रयास विदर्भ को हरा भरा करने का है, इसलिए उन्होंने खेती का यह कार्यक्रम चलाया। सभी जानते हैं कि यहां की जमीन बंजर है। केजरीवाल की टीम के द्वारा जो किया जा रहा है उसे तिल का ताड़ बनाना ही कहा जा सकता है।’

सवाल अभी बाकी हैं
- जमीन पर पहला हक किसानों का है। अगर बांध के लिए जरूरत से ज्यादा जमीन अधिग्रहित की गई थी, तो बांध बनने के बाद बची जमीन किसानों को क्यों नहीं लौटाई गई?
- 1983 में जमीना का अधिग्रहण हुआ। 1997 में बांध बन गया। सौ एकड़ जमीन बच गई। 2002 में किसानों ने जमीन खेती के लिए मांगी। दो साल बाद उन्हें जवाब मिला कि जमीन सरकार की है, यहां सौंदर्यीकरण का काम किया जाएगा। 2005 में गडकरी ने तत्कालीन सिंचाई मंत्री अजीत पवार को पत्र लिख कर जमीन मांगी और चार दिन में ही उन्हें यह दे दी गई। आखिर इतने ताबड़तोड़ कैसे काम हुआ?
- जिस जमीन को महाराष्ट्र सरकार और भाजपा बंजर बता रही है, उसी जमीन पर कैसे गडकरी की कंपनी गन्ना खेती कर रही है? गन्ने के लिए सैंपल बंजर जमीन पर कैसे उगाए जा रहे हैं?

बिजनेसमैन गडकरी
- पांच पावर प्लांट
- तीन चीनी मिल
- एक बायो-डीजल पंप
- इथनॉल ब्लेडिंग संयंत्र
- सोयाबीन संयंत्र
- 17 कंपनियों के मालिक

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