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1965: कीलर बंधुओं ने ऐसे रचा था इतिहास

Wed, 16 Sep 2015 05:00 PM IST
Updated Wed, 16 Sep 2015 05:00 PM IST
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Keelor brothers made history in 1965 war

उस दिन पठानकोट के नैट पायलटों को तड़के तीन बजे ही जगा दिया गया था। ब्रीफिंग रूम पहुंचने के लिए उन्हें दो किलोमीटर पैदल चलना पड़ा था। उस जमाने में जल्दी उठने पर बेड टी या नाश्ता देने का कोई रिवाज नहीं था। ब्रीफिंग के बाद भारत के चार मिसटियर्स विमान 1500 फीट की उँचाई पर उड़ते हुए छंब की ओर बढ़े।

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पाकिस्तानी रडारों ने इनकी गतिविधि को ट्रैक किया और कुछ ही पलों में उनको इंटरसेप्ट करने के लिए छह सेबर और दो स्टार फाइटर वहां पहुंच गए। लेकिन पाकिस्तानी रडार को ये नहीं दिखाई दिया कि इन मिसटियर्स विमानों के पीछे पीछे चार नैट लड़ाकू विमानों ने भी उड़ान भरी थी। वो चार उंगलियों का फॉर्मेशन बनाते हुए जमीन से 300 फीट की ऊँचाई पर उड़ रहे थे। नैट्स को लीड कर रहे थे स्क्वॉड्रन लीडर ट्रेवर कीलर।
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उनके विंग मैन थे कृष्णास्वामी। कीलर ने सबसे पहले 5000 फीट की दूरी पर सेबर को अपनी तरफ आते देखा। उन्होंने अपना नैट सेबर के पीछे लगा दिया। उनकी गति इतनी तेज थी कि उन्हें सेबर के पीछे बने रहने के लिए एयर ब्रेक लगाने पड़े। जैसे ही सेबर उनकी फायरिंग रेंज में आया, कीलर ने करीब 200 गज की दूरी से अपनी 30 एमएम कैनन से सेबर के दाहिने हिस्से पर फायर किया। अगले ही क्षण सेबर का दायां पंख गिरने लगा और वो अनियंत्रित हो कर नीचे की ओर जाने लगा।
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डेन्जिल कीलर की भिड़ंत

Keelor brothers made history in 1965 war

ये 1965 में भारतीय वायु सेना द्वारा गिराया गया पाकिस्तान का पहला जहाज था। ट्रेवर कीलर को उसी दिन वीर चक्र देने की घोषणा की गई। इसके ठीक 16 दिनों बाद चाविंडा सेक्टर में एक बार फिर नैट्स को मिसटियर्स को एस्कॉर्ट करने की जिम्मेदारी दी गई। नेट्स के एक सेक्शन को लीड कर रहे थे ट्रेवर कीलर के बड़े बाई डेन्जिल कीलर।

उनके साथ थे फ्लाइंग ऑफिसर मुन्ना राय। दूसरे सेक्शन में थे फ्लाइंग ऑफिसर विनय ‘कद्दू’ कपिला और फ्लाइंग ऑफिसर विजय मायादेव। जैसे ही ये लड़ाकू विमान चाविंडा पहुंचे उनका स्वागत विमानभेदी तोपों से किया गया। 1965 भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान ट्रेवर और डेंजिल कीलर ने अहम भूमिका निभाई थी। ये विमान बहुत नीचे उड़ रहे थे इसलिए तोपों के गोले उनके ऊपर फट रहे थे। सबसे पहले कपिला ने 2000 फीट की ऊँचाई पर चार सेबर्स को आते देखा। उन्होंने तुरंत रेडियो ट्रैफिक पर अपने साथियों को आगाह किया।

ये सेबर्स सरगोधा से आए थे और उनका नेतृत्व कर रहे थे स्क्वाड्रन लीडर अजीम दाउदपोता। न तो दाउदपोता और न ही उनके विंगमेन को पता चल पाया कि चार नैट्स नीची उड़ान भरते हुए उनके पीछे कब आ गए। कीलर सेबर के पीछे जाने की कोशिश कर ही रहे थे कि उन्हें देख लिया गया और चारों सेबर रक्षात्मक ब्रेक में चले गए। नैट्स ने भी अपने आप को दो हिस्सों में बांटा।

सरगोधा के पास विमान गिरा

Keelor brothers made history in 1965 war

कीलर और राय सेबर के एक जोड़े के पीछे लग गए जबकि कपिला और मायादेव ने दूसरे सेबर जोड़े का पीछा करना शुरू कर दिया। डेन्जिल-कपिला की जुगलबंदी फ्लाइंग आफिसर विनय कपिला बीबीसी स्टूडियो में रेहान फजल के साथ। जब डेन्जिल सेबर का पीछा करते हुए दाहिने घूमे तो राय से उनका साथ छूट गया। उन्होंने राय को रेडियो ट्रैफिक पर बताया कि वो वापस आदमपुर चले जाएं।
अब वो दो सेबर्स के सामने अकेले रह गए थे।

इस बीच दूसरे सेबर्स का पीछा कर रहे कपिला अपने ड्रॉप टैंक गिरा चुके थे जिससे उनको सेबर के मुकाबले मामूली सी बढ़त हासिल हो गई था। उन्होंने अपनी गति बढ़ाई और 500 गज की दूरी से सेबर पर सीधा हिट लिया। उन्होंने 300 गज से सेबर पर दूसरा बर्स्ट मारा। उन्होंने देखा कि सेबर गुलाटियां खाने लगा है। तभी उन्हें कीलर की आवाज हेड फोन में सुनाई दी, "कैप्स यू हैव हिट हिम ! मोस्ट लाइकली ही इज इजेक्टिंग।" कपिला अपने विमान को 90 डिग्री पर उड़ाते हुए ऊंचाई पर ले गए और वहां से उन्होंने सेबर को जमीन पर टकराते हुए देखा।

इस बीच, डेन्जिल न सिर्फ अपने हिस्से में आए दो सेबरों पर नजर रख रहे थे बल्कि कपिला को रह रह कर टेल क्लीयर का संदेश भी भेज रहे थे। अचानक उन्होंने देखा कि एक सेबर वहाँ से सुरक्षित भाग निकलने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने अपना नैट उसके पीछे लगा दिया। सेबर नैट को नहीं देख पाया। जब वो अचानक दाईं और मुड़ा तो वो डेन्जिल की फायरिंग रेंज में आ गया। सेबर को डेन्जिल का बर्स्ट लगा। उसमें से धुआँ निकलने लगा और वो तेजी से नीचे जाने लगा।

उतरते समय टायर फटा

Keelor brothers made history in 1965 war

कीलर ने तेजी से अपने आप को हमले से अलग किया क्योंकि वो भी तब तक बहुत नीचे आ चुके थे और पेड़ की ऊँचाई पर उड़ रहे थे। तभी कपिला ने पीछे से आ कर ऊंचाई छोड़ रहे सेबर पर एक और कैनन बर्स्ट लगाया। सेबर धुआं छोड़ता हुआ सरगोधा की और मुड़ा। सरगोधा के रनवे से कुछ ही दूरी पर ये विमान जमीन पर जा गिरा।

विमान के गिरने के बाद इसके पायलट फ्लाइट लेफ्टिनेंट एसएम अहमद को आग की लपटों और विस्फोट करते गोला बारूद के बीच बहुत बुरी अवस्था में बाहर निकाला गया। अभी कहानी खत्म नहीं हुई थी। जब डेन्जिल कीलर के नैट ने लैंड किया तो उसका टायर फट गया जिसकी वजह से पूरा रन वे ब्लॉक हो गया। कपिला को हलवारा डाइवर्ट किया गया। जिस समय उन्होंने वहाँ लैंड किया उस समय उनके विमान में ईधन की कुछ बूंदे ही बची थीं।

कपिला और डेन्जिल को इस बहादुरी के लिए वीर चक्र दिया गया। इतिहास में ये संभवत: पहला मौका था जब दो भाइयों ट्रेवर और डेन्जिल को एक ही लड़ाई में एक जैसा विमान उड़ाते हुए वीर चक्र से सम्मानित किया गया। लड़ाई के बाद एयरमार्शल अर्जन सिंह खुद कीलर बंधुओं के घर लखनऊ गए और उनके पिता को उनके बेटों के कारनामे के लिए बधाई दी।

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