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काजमी को सुप्रीम कोर्ट ने दी जमानत
नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 20 Oct 2012 12:01 AM IST
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इस्राइली राजनयिक की कार पर हमले के मामले में गिरफ्तार सैयद मोहम्मद काजमी को सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को जमानत प्रदान कर दी। इस मामले में काजमी छह मार्च से जेल में बंद था। शीर्षस्थ अदालत ने काजमी के मामले में चीफ मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट की ओर से अपनाई गई प्रक्रिया पर नाखुशी भी जारी की है।
चीफ जस्टिस अल्तमस कबीर की अध्यक्षता वाली पीठ ने जमानत देते हुए निर्देश दिया कि वह अपना पासपोर्ट संबंधित अधिकारियों को जमा कराए दे। काजमी के विदेश जाने पर भी रोक लगा लगाई गई है। पीठ ने काजमी की अपील को अनुमति प्रदान करते हुए चीफ मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट के 20 जुलाई के आदेश को दरकिनार कर दिया है, जिसमें जांच और अभियुक्त की हिरासत की अवधि को 90 दिन बढ़ा दिया गया था।
यह अवधि मजिस्ट्रेट की ओर से पिछली तारीख, यानी 2 जून से बढ़ाई गई थी। जबकि 2 जुलाई, 6 जुलाई और 6 अगस्त को हाईकोर्ट ने काजमी की अपील पर मजिस्ट्रेट की संतुष्टि पर उसे जमानत देने का फैसला छोड़ा था। सर्वोच्च अदालत ने चीफ मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट की ओर से अपनाई गर्ठ प्रक्रिया पर नाखुशी व्यक्त करते हुए यह साफ किया है कि 17 जुलाई को काजमी जमानत पाने का अधिकारी था।
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उसकी हिरासत तब गैरकानूनी थी जबकि जमानत की मांग का उसका आवेदन अतिरिक्त सेशन जज के समक्ष लंबित था और उसी दौरान जांच को आगे बढ़ाए जाने की मांग अभियोजन की ओर से कर दी गई। पीठ ने कहा कि हमारी राय में अभियुक्त चीफ मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट और हाईकोर्ट की ओर से उसे जमानत न दिया जाना उचित नहीं था।
पीठ ने यह फैसला काजमी की अपील पर जारी किया जिसमें उसने जमानत की मांग खारिज किए जाने के दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश को शीर्षस्थ अदालत में चुनौती दी थी। याद रहे कि ईरान के एक अखबार के लिए लिखने का दावा करने वाले काजमी को जांच में यह पाए जाने के बाद गिरफ्तार किया गया था कि वह 13 फरवरी को इस्राइली राजनयिक ताल येहोशुआ की कार पर चुंबक बम चिपकाने वाले संदिग्ध के संपके में था।
काजमी पर आरोप है कि उसने राजनयिकों के आगमन-प्रस्थान की जानकारी लेने के लिए इस्राइली दूतावास की टोह लेने में संदिग्ध की मदद की थी। मामले के अनुसार मोटर साइकिल सवार एक व्यक्ति ने राजनयिक की कार पर चुंबक बम चिपका दिया था। इससे हुए विस्फोट में इस्राइली डिफेंस अताशी कर्नल योसी रेफेलोव की पत्नी एवं राजनयिक ताल येहोशुआ कोरियन और भारतीय चालक सहित चार लोग घायल हो गए थे।
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चीफ जस्टिस अल्तमस कबीर की अध्यक्षता वाली पीठ ने जमानत देते हुए निर्देश दिया कि वह अपना पासपोर्ट संबंधित अधिकारियों को जमा कराए दे। काजमी के विदेश जाने पर भी रोक लगा लगाई गई है। पीठ ने काजमी की अपील को अनुमति प्रदान करते हुए चीफ मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट के 20 जुलाई के आदेश को दरकिनार कर दिया है, जिसमें जांच और अभियुक्त की हिरासत की अवधि को 90 दिन बढ़ा दिया गया था।
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यह अवधि मजिस्ट्रेट की ओर से पिछली तारीख, यानी 2 जून से बढ़ाई गई थी। जबकि 2 जुलाई, 6 जुलाई और 6 अगस्त को हाईकोर्ट ने काजमी की अपील पर मजिस्ट्रेट की संतुष्टि पर उसे जमानत देने का फैसला छोड़ा था। सर्वोच्च अदालत ने चीफ मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट की ओर से अपनाई गर्ठ प्रक्रिया पर नाखुशी व्यक्त करते हुए यह साफ किया है कि 17 जुलाई को काजमी जमानत पाने का अधिकारी था।
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उसकी हिरासत तब गैरकानूनी थी जबकि जमानत की मांग का उसका आवेदन अतिरिक्त सेशन जज के समक्ष लंबित था और उसी दौरान जांच को आगे बढ़ाए जाने की मांग अभियोजन की ओर से कर दी गई। पीठ ने कहा कि हमारी राय में अभियुक्त चीफ मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट और हाईकोर्ट की ओर से उसे जमानत न दिया जाना उचित नहीं था।
पीठ ने यह फैसला काजमी की अपील पर जारी किया जिसमें उसने जमानत की मांग खारिज किए जाने के दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश को शीर्षस्थ अदालत में चुनौती दी थी। याद रहे कि ईरान के एक अखबार के लिए लिखने का दावा करने वाले काजमी को जांच में यह पाए जाने के बाद गिरफ्तार किया गया था कि वह 13 फरवरी को इस्राइली राजनयिक ताल येहोशुआ की कार पर चुंबक बम चिपकाने वाले संदिग्ध के संपके में था।
काजमी पर आरोप है कि उसने राजनयिकों के आगमन-प्रस्थान की जानकारी लेने के लिए इस्राइली दूतावास की टोह लेने में संदिग्ध की मदद की थी। मामले के अनुसार मोटर साइकिल सवार एक व्यक्ति ने राजनयिक की कार पर चुंबक बम चिपका दिया था। इससे हुए विस्फोट में इस्राइली डिफेंस अताशी कर्नल योसी रेफेलोव की पत्नी एवं राजनयिक ताल येहोशुआ कोरियन और भारतीय चालक सहित चार लोग घायल हो गए थे।